अधिक मास कैसे बना 

महावीर अग्रवाल
  मंदसौर १९ सितम्बर ;अभी तक;     हिरण्यकश्यप को अस्त्र शस्त्र एवं अन्य वरदानो  सहित दिन रात एवं ब्रह्मा के बनाए हुए *वर्ष के 12 माह के किसी भी माह में उसकी मृत्यु नहीं हो इस प्रकार का वरदान प्राप्त था* इसलिए हिरण्यकश्यप का वध करने के लिए विष्णु को 13 वे माह का निर्माण करना पड़ा
                  तभी से प्रत्येक तीसरे वर्ष में एक  अधिक मास  आता है किंतु हम सभी जानते हैं कि *सूर्य की 12 संक्रांति के आधार पर वर्ष में 12 माह होते हैं और  प्रत्येक माह का  कोई न कोई देवता  और स्वामी आवश्य है* किंतु प्रत्येक 3 वर्ष में आने वाले इस *अधिक  मास* का ही कोई स्वामी नहीं होने के कारण सर्वत्र इसकी अवमानना एवं निंदा होती थी तब  भगवान श्रीकृष्ण से इसने अपने आप को प्रतिष्ठित करने की प्रार्थना की तो श्री कृष्ण ने इस अधिक मास को अपने दिव्य गुण प्रदान करते हुए *इसको पुरुषोत्तम मास के नाम से प्रतिष्ठित करते हुए* यह वरदान दिया कि इस माह में जो धार्मिक अनुष्ठान ,भगवान की कथा अथवा तीर्थ यात्रा, ईश्वर दर्शन एवं पवित्र नदियों में स्नान करके प्रभु भक्ति मे लीन रहेगा अथवा दान पुण्य करेगा उसे मनचाहा यथा योग्य फल प्राप्त होगा
                      तभी से इस अधिक मास को पुरुषोत्तम मास के नाम से जाना जाता है अर्थात इसमें ईश्वर का निवास होता है* इसलिए यह मास हम सबके लिए चिंतन मनन एवं आत्म निरीक्षण का महीना है! आपके लिए यह जानकारी संक्षिप्त में प्रस्तुत है ।
रमेशचंद्र चंद्रे

Related Articles

Post your comments

Your email address will not be published. Required fields are marked *