अनुषासन समिति करें पुनः मामले का परीक्षण  सेवानिवृत्त बैंक अधिकारियों को हाईकोर्ट से राहत

6:23 pm or October 19, 2022
सिद्धार्थ पांडेय
 जबलपुर १९ अक्टूबर ;अभी तक;  विभागीय जांच में निर्दोष पाये जाने के बावजूद भी दो वार्षिक वेतन वृध्दि रोक जाने की सजा दिये जाने के खिलाफ सेवानिवृत्त वरिष्ठ बैंक मैनेजर ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। हाईकोर्ट जस्टिस मनिंदर सिंह भटटी की एकलपीठ ने याचिका का निराकरण करते हुए अनुषासन समिति को प्रकरण में विधि अनुसार निर्णय लेने के आदेष जारी किये है।
                                 याचिकाकर्ता राजेन्द्र कुमार षर्मा की तरफ से दायर की गयी याचिका में कहा गया था कि वह बैंक ऑफ इंडिया में वरिष्ठ षाखा प्रबंधक के रूप में पदस्थ था। साल 2016 में उसने स्वेच्दिक सेवा निवृत्ति प्राप्त की थी। साल 2011 में खंडवा जिले की ओजर षाखा में पदस्थापना के दौरान एक व्यक्ति ने उस पर लोन की रकम जारी करने के लिए रिष्वत लेने के आरोप लगाये थे। षिकायत पर विभाग की अनुषासन समिति द्वारा जांच की गयी थी। जांच के दौरान षिकायतकर्ता अपने आरोप से मुकर गया था। इसके अलावा रिष्वत की मांग करने संबंधित कोई साक्ष्य नहीं थे। इसके बावजूद भी उसे दो वार्षिक वेतन वृध्दि रोके जाने की सजा से दण्डित किया गया।  जिसके खिलाफ उसने अपीलेट अथॉरिटी के समक्ष अपील दायर की थी,जो खारिज कर दी गयी थी।
                           याचिका की सुनवाई के दौरान तर्क दिया गया कि बिना साक्ष्य सजा से दण्डित किया जाना प्राकृतिक न्याय सिध्दांत की अवहेलना है। एकलपीठ ने याचिका का निराकरण करते हुए अपीलेट अथॉरिटी के आदेष को खारिज करते हुए अनुषासन समिति को विधि अनुसार मामले में 90 दिनांे के अंदर आदेष जारी करने के निर्देष दिये है। याचिकाकर्ता की तरफ से अधिवक्ता नर्मदा प्रसाद चौधरी तथा अधिवक्त अमित चौधरी ने पैरवी की।