अन लॉक की खबर से हर कोई होगा खुश लेकिन कोरोना से बचने के लिए समझने वाले समझ गए ,ना समझे वो अनाड़ी है

       ( महावीर अग्रवाल )
मंदसौर २९ मई ;अभी तक;  जनता में तो समझ प्रशासन के सहयोग से ही संभव हो पा रही है। इस ना समझी ने ही तो फिर से लॉक डाउन के लिए मजबूर किया है। अब फिर डेढ़ माह के लॉक डाउन के बाद 1 जून 2021 को अनलॉक होने जा रहा है । जनता में समझ की अपेक्षा है। जनता की स्थिति तो स्पष्ट है लेकिन प्रशासन क्यों नियम लागू कर ढिलाई बरत लेता है। 16 अप्रैल 2021 को दूसरी बार लॉकडाउन के पूर्व 144 धारा प्रशासन ने लगा रखी थी लेकिन जनता व कार्यक्रमों का रेला सामान्य दिनों की तरह चलता रहा । आखिर क्यों यदि इस अवसर के दौरान कोरोना से बचने के नियमों का पालन सुनिश्चित रहता तो संभव है मंदसौर को फिर से इतने लंबे लॉकडाउन के दौर से नहीं गुजरना पड़ता। अभी स्थिति तो फिर वही रहेगी जब तक किसी तीसरी लहर का जैसा कि बताया जा रहा है उसके गुजर जाने या ना आने की स्थिति तक सावधानी पूरी बरती जाए और यह तो यही कहा जाएगा कि समझने वाले समझ गए जो ना समझे वो अनाड़ी है।
                 कोरोनावायरस को सदी की एक अनजान बीमारी की दस्तक ही कहा जाएगा क्योंकि भारत तो ठीक पूरा विश्व इसकी चपेट में आया ।वह भी इससे नासमझ ही था ।यह तो अभी तक भी स्पष्ट नहीं हो पा रहा है कि यह बीमारी छोड़ी कहां से गई।  हालांकि चीन पर जैविक प्रयोग की शंका है लेकिन यह अभी तक सिद्ध करके चीन को जिम्मेदार ठहराने का काम नहीं हुआ है।  मंदसौर में पुनः दूसरी बार लगा कोराना कर्फ्यू।  वाकई में कर्फ्यू से कम नहीं था। बाजार बंद ,सड़कों पर सन्नाटा ,तेजी से बढ़ते विकास पर कोराने की यह ऐसी चोट है कि इससे उभरने के बाद ही पता चल सकेगा कि कौन कितना पिछड़ गया है।
                   पूरे प्रदेश के साथ मंदसौर में कोरोना ने ऐसा कहर बरपाया कि शमशान सुना नहीं रहा।जहां रात में शव  जलाए नही जाते ऐसा कहा जाता है लेकिन रात में भी वहां शव जलते रहे। कभी शमशान में भी वेटिंग नहीं सुना लेकिन वहां वेटिंग भी लगी।  क्या यह सदी की महामारी की त्रासदी के कहर का रूप इतिहास के पन्नों पर स्थान प्राप्त नहीं करेगा । इतिहासकार भी हैरान होंगे कि उन्हें इतिहास लिखने के लिए 2020 व 2021 के कोरोना महामारी का दृश्य पर्याप्त माना जा सकता है। कोरोना से मरने वालों के आंकड़ों को लेकर लुका छिपी का खेल समझ से परे है। मंदसौर में इससे प्रतिदिन मरने वालों की संख्या जिला चिकित्सालय व दीनानाथ अनाथ आश्रम में दिन-रात का फर्क है 27 मई का शासकीय जिला चिकित्सालय की रिपोर्ट में एक की कोरोना से मृत्यु बताई गई जबकि अनाथ आश्रम  के अनुसार 8कोविड से व 5 सामान्य शवदाह कीजानकारी बताइ गई है। आखिर यह ऐसा क्यों किया जा रहा है
                    कोरोना की महामारी से लोगों को बचाने के लिए सरकार के द्वारा मास्क, पर्याप्त दूरी व सैनिटाइजेशन का उपयोग करने की सलाह दी गई है लेकिन जनता है कि वह नासमझी का खुलकर प्रदर्शन करती रही है। प्रशासन ने भी अपनी पूरी शिथिलता का परिचय दिया। जिन लोगों को जांच के बाद कोरन्टीन किया गया वे  बाजार में खरीदी करते रहे। घूमते रहे इस दौरान कोरोना बाजार में बेरोकटोक घूमता रहा। मेरे एक मित्र ने इसी दौरान मुझे फोन कर बताया कि उसकी गली में एक परिवार को कोरन्टीन किया गया है लेकिन वह तो बाजार में घूम रहे हैं।  ऐसे अनेक लोग जो कोरन्टीन के बाद भी बाजार में घूमते रहे । क्या इससे कोरोना के प्रकरण लॉकडाउन के दौरान एकदम ज्यादा नहीं बड़े ।  यहां जनता की नासमझी के साथ प्रशासन की शिथिलता ही कहा जाएगा ।
                     कोरोनावायरस पर वही शिथिलता, नियमों का पालन नहीं करना एक साथ नहीं चल सकते। ऐसा होने पर उदाहरण सामने है। इस प्रकार अब एक जून 2021 से होने जा रहे हैं अनलॉक के दौरान नहीं होना चाहिए। सतर्क तो जनता नहीं प्रशासन को रहना पड़ेगा ।अनलॉक भी जैसा की शर्तें पढ़ने को मिली वह भी शायद सशर्त ही रहेगा । अब सशर्त अन लॉक को हम बिना शर्त में नहीं बदल सके इसके लिए पूरी सतर्कता बरतना पड़ेगी ।यह भी तब तक पूरी सतर्कता रखना होगी जब तक तीसरी लहर या और कोई लहर का तूफान समाप्त ना हो जाए।
                    कोरोना को लेकर मंदसौर में आपदा प्रबंध समिति के दर्शन हुए ।आपदा प्रबंध समिति में पहले तो यह कि क्या यह सभी राजनीतिक दलों व नगर के प्रबुद्ध जनों को लेकर बनी है या शासन के और कोई नियमों के तहत। पता नहीं लेकिन बैठकों में कभी कभी यह सुझाव , प्रश्न , उत्तर और अमल में लाने जैसे निर्णय को नहीं देखा गया ।  इस पर भी कभी चर्चा होकर क्यों स्थिति नहीं बताई गई कि शमशान में कोविड के जल रहे शवोकी संख्या व जिला चिकित्सालय द्वारा दी जा रही जानकारी में इस में मरने वालों की संख्या में अंतर क्यों है ।जनता के जीवन में यदि यह इस सदी का महत्वपूर्ण प्रश्न खड़ा रह जाएगा तो आखिर इतिहास के पन्नों का क्या होगा और तो ठीक दान कौन कर रहा है कितना दे रहा है और उसका उपयोग भी चर्चा में नहीं रहा । एक दो बार यह स्थिति सामने आई थी ।बैठक में एक- दो वरिष्ठ नेताओं ने कुछ बातें रखी लेकिन शायद वह हवा के झोंकों में खो गई।  उसके बाद वे नेता बैठक में देखे नहीं देखे गए । अब यह भी पता नही की हर बार की बैठक में उपस्थिति बदलती रही या वे औचित्य के कारण नही आए वे ही जाने।  पानी की बोतलें दान में दी जा रही है जिसकी चर्चा की भी बैठक में नहीं हुई ।  आखिर क्या शासन के पास  मरीजों को पिलाने के लिए स्वच्छ पानी भी नहीं है जो दानदाताओं द्वारा पानी की महंगी  बोतले खरीद कर  दी जा रही है । अभी हुई बैठक के दौरान क्या कठोरता रहेगी और जनता को कैसे विचरण करना है यह भीनहीं  बताया।
                   अभी दूसरी लहर के प्रभाव को निष्प्रभावी व कम करने के लिए डेढ़ माह के लॉक डाउन के दौरान यदि व्यापार धंधों से लेकर बाजार में घूमने फिरने वाले तक गले गले तक ऊब गए हो तो आश्चर्य नहीं ।  हर किसी के दिल दिमाग में बस एक ही बात घूम रही थी अब कब खुलेगा बाजार। बाजार खुलने पर दिल दिमाग में जश्न रहता है तो खुशी तो होगी लेकिन कठोरता से पालन भी इसके साथ जुड़ जाएगा।  लॉकडाउन जिनके  लिए था उनके लिए तो पूरी तरह से था लेकिन कुछ किराने वाले और कुछ औद्योगिक क्षेत्र से मिठाई ,नमकीन की आपूर्ति दबे पांव से होती रही लेकिन यह तो प्रशासन को ही पता करना है कि सच क्या है । शराब प्रेमियों को भी भरपूर शराब मिलती  रही तो कोई आश्चर्य नहीं होगा। हालॉकि प्रशासन ने अवैध शराब भी खूब पकड़ी है। जिन्होंने कोरोना प्रोटोकॉल का पालन  कर  मानव जीवन को आगे बढ़ाने में सहयोग किया वह तो खुद भी और उनका परिवार भी खुश होगा ही । बहर हाल अब अन लॉक को सफल करने की जिम्मेदारी भी जनता पर ही रहेगी। नियमों का पालन करने की। हां सतर्कता के लिए प्रशासन को भी उतना ही सतर्क रहना होगा।