अपने आर्थिक हितों को संवारने के लिए नये नवेले भाजपाई बने सिंधिया कांग्रेस के विकास कार्यों के नाम पर वोट क्यों मांग रहे है?

मयंक शर्मा

खंडवा  25 अक्टूबर ;अभी तक;  प्रदेश कांग्रेस महामंत्री एवं मीडिया प्रभारी केके मिश्रा ने सोमवार को खंडवा शहर में भाजपा प्रत्याशी के समर्थन में केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के संबोधन में परोसे गये झूठ को अक्षम्य राजनैतिक अपराध बताते हुए उन पर कांग्रेस की विकास योजनाओं के नाम पर वोट मांगने का गंभीर आरोप लगाया है।

मिश्रा ने सभा में सिंधिया द्वारा अपने स्वर्गीय पिता और यूपीए सरकार के दौरान रेलमंत्री के रूप में माधवराव सिंधिया द्वारा खंडवा में प्रारंभ कराये गये रेलवे स्लीपर कारखाने की स्थापना और उसमें लाखों लोगों को रोजगार मिलने की उपलब्धि को आपत्तिजनक बताते हुए कहा कि यह उपलब्धि यूपीए सरकार की थी, ना कि भाजपा की। यदि वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकास कार्यों से प्रभावित होकर भाजपा में प्रवेश की बात कर रहे हैं तो उन्हें इस बात को भी स्पष्ट करना चाहिए कि जिन उपलब्धियों को रेलमंत्री के रूप में यूपीए सरकार के माध्यम से उनके पूज्य पिता ने उपलब्ध कराया है तो उन्ही रेलों को बेचने देने वाले नरेंद्र मोदी सरकार के निर्णय पर वे खामोश क्यों है। यदि उनके पूज्य पिता ने लाखों लोगों को रोजगार उपलब्ध कराया तो सिंधिया देश बेचने वालों और बेरोजगारी का तांडव मचाने वालों के खिलाफ भी वे खामोश क्यों है। मिश्रा ने यह भी कहा कि सिंधिया यदि अपने पूज्य पिता से प्रेरणा लेते तो आज सभी एयरलाइंस व विमान तल जिनका प्रभार वर्तमान में ज्योतिरादित्य सिंधिया के अधीन है, उन्हें क्यों, किसने, किसलिए  और किसके हित साधने के लिए बेच दिया गया?

मिश्रा ने स्वतंत्रता संग्राम में सिंधिया खानदान के योगदान का उल्लेख करने पर भी सिंधिया को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि पूरा देश जानता है कि स्वतंत्रता संग्राम में उनके खानदान की भूमिका क्या थी और  गांधी की हत्या में प्रयुक्त पिस्टल गांधी के हत्यारे नाथूराम गोडसे को देने वाला खानदान भी कौन था। यह राष्ट्रद्रोह के समकक्ष है जिससे सिंधिया बच नहीं सकते?
कमलनाथ सरकार और वल्लभ भवन को भ्रष्टाचार का अड्डा बताने पर भी मिश्रा ने सिंधिया से पूछा कि उसी वल्लभ भवन में उनके बिकाउ समर्थक भी विभिन्न मंत्रालयों के मंत्री थे, क्या वे शंकराचार्य थे? क्या सिंधिया में इतना बताने का साहस है कि उन्हीं कमलनाथ जी से उसी वल्लभ भवन में 6 घंटों तक बैठकर अपने अपंजीकृत फर्जी ट्रस्टों के नाम पर उन्होंने कितने करोडों रूपए की जमीने हथियाई, जब कमलनाथ जी ने इन फर्जी ट्रस्टों को जमीन देने से मना कर दिया तो उन्होंने अपने आर्थिक हितों के खातिर कमलनाथ जी से राजनैतिक ब्लैकमेलिंग शुरू कर दी! वे कितने बडे भू माफिया है, पूरा प्रदेश जानता है। यदि सिंधिया अत्यंत ईमानदार नेता है तो एक बडी आर्थिक सौदेबाजी के बाद प्रदेश में पिछले वर्ष हुए उपचुनाव में ग्वालियर- चंबल अंचल में रहते हुए मैंने (केके मिश्रा) सिंधिया के विरूद्ध अरबों रूपए के प्रमाणिक जमीन घोटाले उजागर किये थे, यदि मैं गलत था तो सिंधिया ने मुझ पर कानूनी कार्रवाई क्यों नहीं की? लिहाजा, सिंधिया पहले ऐसे झूठे संबोधन देने से पहले शीशे में अपना चेहरा देख लेंगे तो उस सच्चाई का उन्हें बोध हो जाएगा।
मिश्रा ने यह भी आरोप लगाया कि सिंधिया की सभा में भाजपा ने भीड बढाने के भूमिहीन व बेघर कर दी गई महिलाओं को झूठ बोलकर बुलाया गया जिन्होंने मीडिया के समक्ष सभास्थल पर विवाद भी किया, उन्होंने इसके वीडियो भी जारी किये।