अपने पापकमर् की स्वयं आत्म आलोचना करेए प्रायश्चित कर जीवन को पावन बनाये – संत श्री जयमलजी मसा

महावीर अग्रवाल
मंदसौर ३१ दिसंबर ;अभी तक;  प्रभु महावीर का दया धमर् का जो मागर् है वह मानव को सदकमर् करने की प्रेरणा देता है प्रभु महावीर ने आगमो में कहाॅ कि अपने पापकमर् की स्वयं आलोचना करे तथा प्रायश्चित कर जीवन को पवित्र एवसं पावन बनाये । एक और दण्ड विधान पापकमर् करने पर सजा देता है तो उसके कारण मनुष्य में सुधार हो यह जरूरी नही है लेकिन यदि मनुष्य को स्वयं अपने पापकमर् का एहसाय होने पर वह यदि आत्म आलोचना कर प्रायश्चित करता है तो जीवन में परिवतर्न होना निश्चित है।
उक्त उदगार परम पुज्य संत श्री जयमलजी मसा आदिठाणा 6 ने नई आबादी स्थित नई आबादी स्थित जैन दिवाकर स्वाघ्याय भवन में आयोजित व्याख्यान में कहे। आपने प्रवचन माला के द्वितीय दिवस धमर्सभा में कहा कि वषर् 2021 में हमसे जो भी पापकमर् हुए है हम उसका चिंतन करे मानन करे और यदि संभव हो तो आत्म आलोचना कर जवीन को पुनीत पावन बनाये जीवन में जाने अनाजे में भुल या बुरि होना स्वाभविक है। यह त्रुटी अगले वषर् यष आगामी समय में न हो इसके लिये अपने पापो की आलोचना कर प्रायश्चित करे न्यायालय में मुलजिम पर आरोप लगने पर मुकदमा चलता है आरोप लगाते है सुनवाई होती है फिर सजा सुनायी जाती है। लेकिन क्या हम अपने जीवन में स्वयं मुलजिम और स्वयं जज बनकर अपने को जो भी योग्य हो सजा दे सकते है। इस पर विचार करे। स्वयं को पापकमर् से दूर रखने का प्रयास भी हमे पाप कमर् के दुष्पभाव से बचा सकता है।
  संत श्री आदिशमुनिजी ने कहा कि जीवन में इगो अथार्त अंहकार  जब भी पडता है हमारे अपने सगे संबधियो रिश्तेदारो से हमे हरकर देता है मै जो कहा रहा हूॅ वहीसही है। यह भी एक प्रकार का अंहकार ही है। जीवन में दुखो का कारण अत्यधिक महत्वाकाशाये है जिससे सुकना नही सिखा उसका अपने को धामिर्क कहना उचित नही है। धमर् हमें विनय सिखता है बडो के सामने सुकना सिखता है। जीवन में जिसके अंहकार रूपी हवा भरी है वह ज्ञान एवं विनय प्राप्त नही कर पाता है। आपने लिये विनय को जवीन में धारण करे भगवान ऋषभदेव के पुत्र बाहुबलि ने कई वषोर् तक तप किया लेकिन जब उसने अंहकार नही छोडा तो उनकी बहन नेउसे हाथी में उतरने अथार्त अंहकार को छोडने की प्रेरणा दी जैसे ही बाहुबली ने अंहकार छोड केवल ज्ञानहो गया । इस अवसर पर साध्वी ने भी अपने विचार रखे। धमर्सभा में बडी संख्या में स्थानकवासी जैन समाज केस भी श्रीसंघो के श्रावक श्राविकाओ नेसंत की अमृतमयी वाणी का लाभ लिया। धमर्सभा का संचालन अशोक उकावत ने किया।
आज भी होगे प्रवचन. आज दिनांक 1 जनरी को नववषर् के प्रथम दिवस संत श्री के प्रवचन प्रात 9ण्15 से 10ण्30 बजे तक जैन दिवाकर स्वाघ्याय भवन शास्त्री काॅलोनी नई आबादी में होगे। श्री वधर्मान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ अध्यक्ष अशोक उकावतए महामंत्री मनोहर नाहटा राजीव मेहता आदि ने प्रवचन का लाभ लेने की अपील की है ।