अफसरों से सांठगाठ कर पशु आहार, मानव उपभोग के अयोग्य चांवल गोदामों में जमा

आनंद ताम्रकार
बालाघाट २० नवंबर ;अभी तक;  जिले में कस्टम मिंलिग के माध्यम से चांवल प्रदाय करने की आड़ में जिले के राईस मिलर्स ने आपूर्ति निगम के आला अफसरों से सांठगाठ कर पशु आहार, मानव उपभोग के अयोग्य चांवल गोदामों में जमा करा दिया गया है।
केन्द्र सरकार के खादय मंत्रालय के उपायुक्त द्वारा की गई जांच में इस मामले के उजागर होने के बाद संबधित राईस मिलर्स एवं संलिप्त अधिकारियों के विरूद्ध कोई प्रभावी कार्यवाही करने की बजाय निगम के आला अफसर राईस मिलर्स को राहत पहुंचाने की कवायद कर रहे है। चूकि एक तयशुदा कमीशन की रकम लेकर पशु आहार जैसा चांवल आला अफसरों की शह पर खरीदा गया है जो अब राईस मिलर्स तथा अफसरों की गले की फास बनकर रह गया है।
                    राईस मिलर्स को बचाने के लिये अमानक चांवल को सारटेक्स कर मानक स्तर का चांवल वापस जमा करने के आदेश जारी किये गये जिनका कागजों में ही अपग्रेड कर पून अमानक चांवल वापस लिया जा रहा है।
                  निगम के निर्देश पर गोदाम से चांवल वापस किये जाने की तथा वापस किये गये चांवल पुन जमा कराये जाने की विडियोग्राफी कराये जाने की बजाये जिले के कुछ चहते मिलर्स को खुली छूट देकर उनसे बिना अपग्रेड किया हुआ चांवल लिया जा रहा है। इन्हीं विसंगतियों के चलते बालाघाट जिले से 19 नवंबर 2020 रेलवे रैंक के माध्यम से रैंक पाईट मेघनगर जिला झाबुआ को 2636.0 मैट्रिक टन चांवल जिला लागत मूल्य लगभग 8 करोड रूपये बताया गया है  बालाघाट स्टेशन से रवाना किया गया। इस रैंक में जो चांवल लोड किया गया है वह कागजों में ही अपग्रेड किया गया ही है।
                  चूकि झाबुआ जिले में चांवल खपत कम है इस लिये यह चांवल वहां जाकर गोदामों में जमा हो जायेगा और कागजों में वितरण बताकर फिर राईस मिलर्स को कालाबाजार में बेच दिया जायेगा जैसा की अब तक होता रहा है।
                यह उल्लेखनीय है की पशु आहार तुल्य अमानक स्तर का चांवल मात्र सारटेक्स प्रक्रिया से उसकी छनाई और छटाई करवाने से वह मानव उपभोग के काबिल कैसे हो जायेगा। इतना ही नही सारटेक्स प्रक्रिया के बाद चांवल की ज्यादा पालिष कर उसे सिल्की और चमकदार बनाकर प्रदाय किया जा रहा है ऐसे चांवल जिसकी ज्यादा पालिश की गई है जिसके कारण चांवल में उपस्थित रहने वाले पौष्टीक तत्व नष्ट हो जाते है। कैसे प्रदाय किया जा रहा जबकि सिल्की चांवल दिये जाने पर बंदिश लगी हुई है।
बालाघाट सहित मण्डला जिले में उजागर हुये इस काण्ड के बाद पूरे प्रदेश जांच किये जाने पर बडी मात्रा में अमानक चांवल खरीदे जाने का मामला प्रकाश में आया इसके बावजूद आपूर्ति निगम के मुख्यालय में पदस्थ अधिकारियों की मानसिकता में कोई बदलाव नही आया है। तभी तो चहते राईस मिलर्स को कमीशन की आड़ में फायदा पहुंचाने का सिलसिला बदस्तुर जारी है।

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