अरुण यादव के चुनाव में न लड़ने के फैसले से कांग्रेस में घमासान

मयंक शर्मा
खंडवा 4 अक्टूबर अभी तक ;  अरुण यादव ट्वीट करते हुए लिखा था कि मेरे दुश्मन भी मेरे मुरीद
हैं शायद, वक्त-बेवक्त मेरा नाम लिया करते हैं, मेरी गली से गुजरते हैं
छुपा के खंजर, रुबरू होने पर सलाम किया करते हैं। इससे शायरी के जरिए
शायद उन्होंने  पार्टी के मौजूदा हालातों को बयां किया था।
खंडवा लोकसभा उपचुनाव में कांग्रेस के सशक्त उम्मीदवार माने जा रहे पूर्व
मंत्री अरुण यादव ने चुनाव लड़ने से मना कर दिया है। इस बारे में उन्होंने
पार्टी आलाकमान को पत्र भी लिखा है। पत्र में उन्होंने अपने चुनाव न लड़ने
के कारणों का स्पष्टीकरण भी दिया है इसमें लिखा है कि वह पारिवारिक
कारणों से चुनाव का हिस्सा नहीं बन पा रहे है।अरुण यादव ंने दावेदारी
छोड़ने की पुष्टि करते हुए बताया कि वे पारिवारिक कारणों से चुनाव नहीं
लड़ना चाहते हैं। इसकी जानकारी सोनिया गांधी को दे दी है।
अरुण यादव के चुनाव में न लड़ने के फैसले से कांग्रेस में घमासान मच गया
है। दरअसल पिछले काफी लंबे समय से अरुण यादव क्षेत्र में सक्रिय थे और
पार्टी में का टिकट लगभग पक्का माना जा रहा था। हयकमान  को पत्र देकर
अरुण यादव इंदौर लौट आए।उन्होंने कहा कि  अब पार्टी जिसे भी उम्मीदवार
बनाएगी मैं उनके समर्थन में पूर्ण सहयोग करूंगा।
दो दिन पहले कांग्रेस के वरिष्ठ नेता व पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह
का सोशल मीडिया पर अरुण यादव को शुभकामनाएं दे दी थी। माना जा रहा था कि
अरुण यादव का नाम लगभग फाइनल हो चुका है, लेकिन इसके तत्काल बाद
बुरहानपुर से निर्दलीय विधायक सुरेंद्र सिंह शेरा का बयान सामने आया था।
इसमें शेरा ने कहा था कि अरुण यादव को नहीं, मेरी पत्नि को  टिकट मिलेगा।