अरूण यादव के राजनैतिक भविष्य को भवंर से बचाने के उनके अगले कदमों के लिये अगले टवीट की सभी को बेसब्री से प्रतीक्षा

मयंक शर्मा
खंडवा 4 अक्टूबर अभी तक ;  खंडवा लोकसभा उपचुनाव के प्रबल दावेदार माने जा रहे अरुण यादव ने
दावेदारी छोड़कर सबको चैंका दिया है। वे पार्टी के लिए काम करते रहने की
बात कह रहे हैं। राजनैतिक हल्को में तेजी से कयास लग रहे है कि अब अरुण
यादव कौन सा फैसला लेने जा रहे हैं। दो-तीन दिन में ऐसा क्या हुआ कि
दिग्विजय सिंह जिन्हें शुभकामनाएं दे रहे थे, वहीं अरूण यादव ंने दिल्ली
दौरे के बाद अचानक मैदान छोड़ दिया है।
हालांकि, अरुण के बयानों से ऐसी बात सामने नहीं आई है कि वे भाजपा से
संपर्क में हैं या कांग्रेस हाईकमान से नाराज हैं, लेकिन भााजपा ने
उन्हें रिझाना शुरू कर दिया है। भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष वीडी शर्मा ने तो
यहां तक कह दिया कि उनको लगता है कि देश सेवा कर सकते हैं तो ऐसे सभी
लोगों का स्वागत है।
पिछले दो माह पहले भी श्री यादव के भाजपा में जाने की खबरे कौधी थी लेकिन
उन्होने स्वयं आगे बढकर इन खबरों का खंडन किया था। संसदीय क्षेत्र में
काम करने और पूरा चुनावी नेटवर्क तैयार करने के बाद ऐसा क्या हुआ कि अरुण
यादव ने प्रत्याशी बनाए जाने से पहले मैदान छोड़ गये है। उन्होंने  जो वजह
बताई कि वह किसी के गले नहीं उतर रही। उन्होंने दिल्ली में सोनिया गांधी
और राहुल गांधी से मुलाकात के बाद रविवार देर शाम सोशल मीडिया पर चुनाव न
लडने का काण  पारिवारिक  बताया था।
सियासत करने वालों का मानना है कि  अरुण यादव के प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ
से सियासी रिश्तें ठीक नहीं चल रहे थे। इसकी शुरुआत इसी साल फरवरी में
गोडसे समर्थक बाबूलाल चैरसिया को कांग्रेस में शामिल हुए थे। तब यादव ने
सार्वजनिक तौर पर कमलनाथ के खिलाफ बयानबाजी की थी। उस समय कमलनाथ ने
प्रतिक्रिया नहीं दी थी, लेकिन जब खंडवा उपचुनाव में उम्मीदवार बनाए जाने
के भरोसे जब यादव प्रचार में लग गए थे, तब कमलनाथ ने कहा था- उन्होंने इस
बारे में मुझसे बात नहीं की है। फिलहाल यह तय नहीं है कि कौन चुनाव
लड़ेगा।पार्टी सूत्रों का दावा है कि श्रीें यादव के सामने कमलनाथ ने
सर्वे रिपोर्ट का खुलासा किया था। यादव ने कमलनाथ से तल्खी भरे लहजे में
बात की थी। इसके बाद ही यादव का पहला बयान सोशल मीडिया पर आया था- कि
उन्होने  कमलनाथ से आग्रह किया है कि पार्टी किसी समर्पित कार्यकर्ता को
प्रत्याशी बनाना चाहे, तो मैं उसकी मदद करूंगा।  श्री यादव ने  कमलनाथ से
दो बार मुलाकात की। दोनों नेताओं की 6 अगस्त व  इसके बाद 30 सितंबर को
दिल्ली में ही  मुलाकात की थी।
अब अरुण यादव पर बीजेपी की ओर से डोरे डालने की भी चर्चा है।  बीजेपी
उपचुनाव प्रबंधन कमेटी के प्रभारी व नगरीय विकास एवं आवास मंत्री
भूपेंद्र सिंह ने तीन दिन पहले कह चुके है कि अरुण यादव की बीजेपी को
जरूरत नहीं है। हालांकि, करीब दो महीने पहले भी अरुण यादव के बीजेपी में
शामिल होने की चर्चाओं ने जोर पकड़ा था। तब उन्होंने खुद ही ट्वीट कर इससे
इनकार किया था।अब नयं ट्वीट की प्रतीक्षा है।