अर्जुन सिंह की संवेदनशीलता उनके कर्म का मूल मंत्र था, जन्म दिवस पर व्याख्यान माला सम्पन्न

8:27 pm or November 5, 2020
अर्जुन सिंह की संवेदनशीलता उनके कर्म का मूल मंत्र था जन्म दिवस पर व्याख्यान माला सम्पन्न
सीधी से विजय सिंह
सीधी, 5 नवम्बर ;अभी तक; कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कुंअर स्व. अर्जुन सिंह के आज 91 वे जन्म दिवस पर उनकी समाधि स्थल राव सागर चुरहट एवं अस्पताल चौक सीधी में स्थापित प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर पुण्य स्मरण किया गया। पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह “राहुल” सहित रीवा, सतना, शहडोल, सिंगरौली के कांग्रेस नेताओं सहित आमजनों ने श्रद्धा सुमन अर्पित किया।
                  इस अवसर पर स्थाननीय मानस भवन में कुंअर साहब के जीवन पर आधारित चित्र प्रदर्शनी एवं साझा संस्कृति के अग्रदूत “हमारी विरासत : अर्जुन सिंह” एक व्याख्यान माला सम्पन्न हुई। व्याख्यान माला में प्रो. यू. पी. सिंह, प्रो. डॉ. लहरी सिंह व प्रो. डॉ. महेश शुक्ला “दीवाना” एवं श्री राहुल ने अपने विचार, संस्मरण व देश-समाज को दी गई विरासत पर प्रकाश डाला।
                     व्याख्यान माला का सार रहा कि- वह ऐसी शख्सियत थे जिन्होंने अपनी उदारता से न केवल मध्यप्रदेश बल्कि देश में अपनी पहचान बनाई।  राजनीति में संवेदनशीलता उनके कर्म का मूल मंत्र था।  उनके इसी व्यक्तित्व की वजह से आज भी लोग उन्हें इज्जत के साथ मन से याद करते हैं। उन्होंने राजनीतिक जीवन में अपनी कार्यशैली से हमेशा लोगों को यह संदेश दिया कि “जीवन एक संघर्ष है, जिसमें आत्मविश्वास के सहारे रास्ता बनाया जा सकता है”।
                   वह बड़े से बड़े पद पर रहे लेकिन उनके पैर हमेशा जमीन पर रहते थे।  इसलिये वे अपने आपको “कांग्रेस के सिपाही” के रूप में संबोधित करते थे।  राजनीति में उन्होंने हमेशा धैर्य रखा।  गरीब लोगों के लिये काम करना उनकी राजनीतिक यात्रा के प्राथमिकता क्रम में था। झुग्गी-झोपड़ी वासियों को पट्टा, एक बत्ती विद्युत कनेक्शन, तेंदू पत्ता मजदूरों को मालिकाना हक जैसे ऐतिहासिक निर्णय ने उन्हें सर्वहारा वर्ग का हितैषी बना दिया। लेकिन इसका व्यक्तिशः श्रेय उन्होंने नहीं लिया, यही कहा कि आदरणीया इंदिरा जी की मंशानुसार यह योजना व कार्यक्रम शुरू किये गये हैं।  यही कारण है कि बड़े बड़े निर्णयों में स्व॰ इंदिराजी और राजीवजी उनकी सलाह को काफी गंभीरता से सुनते थे।  उनके वक्तव्य भी सदन में बड़ी गंभीरता से सुने जाते थे।
                स्व. कुंअर साहब प्रतिपक्ष को पूरा सम्मान देते थे। अलग विचारधारा होने के बावजूद उनके मन में राजनैतिक कटुता बिलकुल भी नहीं थी।  जनहित के कामों में वे विपक्षी पार्टी के नेताओं से मशविरा करने में कभी गुरेज नहीं करते थे। आज स्व॰ अर्जुनसिंह हमारे बीच नहीं है लेकिन उनके आदर्श हम सभी को हमेशा रास्ता दिखाते रहेंगे।
                   व्याख्यान माला व चित्र प्रदर्शनी का आयोजन राजेन्द्र सिंह भदौरिया द्वारा किया गया था। मंच संचालन सोमेश्वर सिंह ने किया। इस अवसर पर पूर्व मंत्री कमलेश्वर द्विवेदी, राजाराम त्रिपाठी, पूर्व विधायक सुखेन्द्र सिंह “बन्ना”, चिंतामणि तिवारी, सुधीर सिंह तोमर सहित आम जनमानस उपस्थित था।

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