अवैध निर्माण कार्य और सरकारी जमीन पर कब्जा करने वालें भू माफियाओं पर कार्यवाही करने की बजाये अधिकारियों द्वारा उन्हें खुला सरंक्षण

7:41 pm or November 7, 2020
अवैध निर्माण कार्य और सरकारी जमीन पर कब्जा करने वालें भू माफियाओं पर कार्यवाही करने की बजाये अधिकारियों द्वारा उन्हें खुला सरंक्षण

आनंद ताम्रकार

बालाघाट ७ नवंबर ;अभी तक;  मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह जी के द्वारा भू माफियाओं और सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा कर निर्माण कार्य करने वालों के विरूद्ध अभियान छेडे जाने पर प्रदेश अनेक स्थानों पर कार्यवाही की जा रही है जिला मुख्यालय में भी अतिक्रमण हटाने की कार्यवाही जारी है लेकिन वारासिवनी तहसील और नगरीय क्षेत्र में अवैध निर्माण कार्य और सरकारी जमीन पर कब्जा करने वालें भू माफियाओं पर कार्यवाही करने की बजाये अधिकारियों द्वारा उन्हें खुला सरंक्षण दिया जा रहा है। इसकी आड में अतिक्रमणकारियों और भू माफियाओं से मोटी रकम वसूली जा रही है।

इन्हीं विसंगतियों के चलते नगरीय एवं समीपवर्तीय ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी नजूल भूमि पर कब्जा करने का सिलसिला बदस्तुर चल रहा है।
नगर पालिका प्रशासन एवं राजस्व विभाग के पटवारी और आर आई सरकारी दस्तावेजों में भू माफियाओं के मनमाफिक फेरबदलकर सरकारी जमीनें उनके हवाले की जा रही है। इस संबंध में ज़िलाधीश बालाघाट को लिखित षिकायत देने के बावजूद कोई कार्यवाही ना किया जाना भी जनचर्चा का विषय बना हुआ है।

वारासिवनी नजूल सीट क्रमांक 16बी, प्लाट नंबर 16, क्षेत्र 136वर्गमीटर म.प्र. शासन नजूल इंतेजाम नगर पालिका वारासिवनी जो की लालबर्रा रोड पर पशु चिकित्सालय से लगी हुई है नक्शे के अनुसार इस भूमि पर आवासीय प्लाट सहित आवागमन हेतु मार्ग एवं सार्वजनिक कुंआ है इस भूमि पर संतोष सहजवानी नामक भू माफिया ने राजस्व महकमे की मदद से सरकारी दस्तावेजों में हेरफेर करवाकर अवैध कब्जा कर लिया और उसमें रातों रात दीवारे बना दी।

इसकी शिकायत नगर पालिका के मुख्य नगर पालिका अधिकारी को किये जाने पर उन्होनें कर्मचारी भेजकर काम बंद करवाने का मौखिक आदेश दिया और कहा की रातों रात काम करवा लो इसके एवज में निर्माणकर्ता से लम्बी रकम भी ले ली गई। इस तरह नगर में 50 से ज्यादा अवैध निर्माण कर बिना अनुमति के बहुमंजिली दुकानें बना ली गई जिन्हें एक साल की अस्थाई लीज पर आबटित की गई है।

पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष स्व.श्री कस्तुरचंद जी वर्मा के कार्यकाल में आबटित की गई परिषद के स्वामित्व की दुकानों को भी लाखों रूपये में खरीदा बेचा जा रहा हैै। इस बात की जानकारी सीएमओ और प्रशासक को लिखित रूप में देने के बावजूद अब तक कोई कार्यवाही नही की गई।
एक तरफ नगर पालिका की माली हालत खराब होने का हल्ला मचाया जा रहा है तो दुसरी तरफ नगर पालिका प्रशासन के बाबू और अधिकारियों द्वारा अवैध निर्माणकर्ताओं द्वारा और भू माफियाओं से लम्बी  रकम वसूलकर अपनी माली हालत सुधारने में लगे है।
आखिरकार सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जा करने तथा नगर पालिका एवं प्रशासन से बिना अनुमति के निर्माण कार्य करने का यह सिलसिला कब थमेगा। प्रशासन की नजरे केवल गरीब लाचार लोगों के झोपडों पर बुलडोजर चलवाने तक ही सिमित रह गई है और रसूखदारों को खुला संरक्षण दिया जा रहा है।

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