अहंकार नहीं करे, पापकर्म करने से बचे- आचार्य डॉ. देवेन्द्रजी शास्त्री

महावीर अग्रवाल 
मन्दसौर  ३१ दिसंबर ;अभी तक;  माहेश्वरी धर्मशाला मंदसौर में श्रीमद् भागवत कथा का विराट आयोजन श्री महेशचन्द्र शर्मा व श्री अशोक शर्मा परिवार के द्वारा श्री नारायण भक्ति संघ मंदसौर के सहयोग से किया जा रहा है। इस भागवत कथा में भागवताचार्य एवं ज्योतिषाचार्य डॉ. देवेन्द्र शास्त्री धारियाखेड़ी धर्मालुजनों को श्रीमद् भागवत का रसपान करा रहे है। कल शुक्रवार को श्रीमद् भागवत कथा के षष्टम दिवस डॉ. शास्त्रीजी ने भगवान श्री कृष्ण के द्वारा किये गये कंस वध एवं उसके आगे की कथा विस्तार से श्रवण कराई। डॉ. शास्त्री ने कहा कि जो भी व्यक्ति अहंकार में आकर पापकर्म करता है उसे उसके दुष्परिणाम भुगतने ही पड़ते है। कन्स ने अपने पिता को कारागृह में बंदी बनाकर रखा। अपनी बहन देवकी व बहनोई की सात संतानों की हत्या की। मथुरा की जनता पर तरह तरह के अत्याचार किये। जब कंस के पापों का घड़ा भर गया तो प्रभु कृष्ण ने अपने मामा जो कि अत्याचारी शासक था उसका वध किया। कंस ने सवयं अपनी मृत्यु को मथुरा में आमंत्रित किया। नंदजी का संदेश भेजकर कंस ने कृष्ण व बलराम को मथुरा बुलाया और दोनों के वध की योजना बनायी लेकिन श्री कृष्ण ने मथुरा की व्यायामशाला में कंस के पहलवानों को पराजित कर वहीं कंस का वध कर दिया। कंस के वध से मथुरा की प्रजा को दुष्ट शासक से मुक्ति मिली। श्री कृष्ण ने माता देवकी व पिता वासुदेव एवं बंदी बनाकर रखे गये अपने नाना उग्रसेनजी को मथुरा के कारागार से मुक्त कराया। कन्स वध की पुरी कथा प्रेरणा देती है कि अहंकार में आकर पापकर्म नहीं करे। स्त्रियों, बच्चों  एवं ब्राह्मणों को दुःख तकलीफ देने से बचे यदि ऐसा पापकर्म करेंगे तो जीवन में दण्ड भोगना ही पड़ेगा।
                 इन्द्र का अहंकार तोड़ा- डॉ. शास्त्री ने कहा कि भगवान श्री कृष्ण ने इन्द्र को झूठे अहंकार काके नष्ट करने के लिये वृंदावन वासियों से गिरिराज पर्वत की पूजा करायी। इन्द्र ने रुष्ट होकर सात दिवस तक निरंतर वर्षा की। श्री कृष्ण ने पूरे ग्रामवासियों एवं गोवंश की रक्षा के लिये गिरिराज पर्वत को अपनी उंगली पर धारण कर लिया। प्रभु श्री कृष्ण ने यह लीला कर इन्द्र के अहंकार को तोड़ दिया।
                   बरसाना की होली का प्रसंग कथा पाण्डाल मे किया गया जीवंत- डॉ. शास्त्री ने जैसे ही प्रभु श्री कृष्ण एवं राधारानी के द्वारा बरसाना में खेली गयी होली एवं रासलीला का श्रवण कराया। कृष्ण एवं राधा के रूप में प्रीतेश व नम्रता चावला ने वेश धारण कर जैसे ही प्रवेश किया राधेकृष्ण के जयकारे गुंज उठे। चावला दम्पत्ति ने राधा कृष्ण के रूप में जैसी होली बरसाना में खेली गई थी वैसी होली पंडाल में भी खेली। धर्मालुजनों ने दोनों पर पुष्पवर्षा की और जयकारे लगाकर अपनी प्रसन्नता व्यक्त की। मंदसौर में पहली बार बरसाना की होली का प्रसंग इतने वृहन स्वरूप में पहली बार धर्मालुजनों ने देखा।
जीवन में मुस्कराना सीखिये, परोपकार के कार्य से जुड़िये-भागवत कथा में रामचरित मानस के विद्वान आचार्य श्री  रामानुजजी महाराज का भी आगमन हुआ। आपने कथा में अपने विचार प्रकट करते हुए कहा कि जीवन में सदैव प्रसन्नचित्त रहने का प्रयास करे। जो व्यक्ति प्रसन्नता में रहता है प्रभु के प्रति अपने को समर्पित रखता है वह दूसरों का अहित करने का सोच नहीं पाता है बुरे विचारों से जब दूर रहता है तो बुरा काम भी नहीं करता है। आपने कहा कि जीवन में परोपकार के कार्यों से जुड़े यदि कोई व्यक्ति थका हुआ है तो दो कदम उसके साथ चले, उसके साथ बैठे। आपने कहा कि प्रभु श्री कृष्ण का पुरा जीवन विवधताओं से भरा है। गोकुल में वह नटखट बालक है, कंस का वध करने के बाद वे मथुरा में एक विजेता बन गये। महाभारत के युद्ध में वे मार्गदर्शक है। गोपियों के संग वे सबको प्रेम का संदेश देने वाले व्यक्ति के रूप में है उनके जीवन को यही विविधता हमें प्रेरणा देती है।