आईआईआईटी के लिए कैसे प्रदान की गयी संरक्षित भूमि, रिकॉर्ड पेष करने सरकार को मिली मोहलत

7:19 pm or September 21, 2022
सिद्धार्थ पांडेय
 जबलपुर २१ सितम्बर ;अभी तक;  खंदारी जलाशय की संरक्षित भूमि आईआईआईटी निर्माण के लिए प्रदान किये जाने के संबंध में हाईकोर्ट ने रिकॉर्ड तलब किया था। याचिका पर बुधवार को हुई सुनवाई के दौरान सरकार ने रिकॉर्ड पेष करने समय प्रदान करने का आग्रह किया। हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रवि विजय कुमार मलिमठ तथा जस्टिस विषाल मिश्रा ने युगलपीठ ने सरकार के आग्रह को स्वीकार करते हुए एक सप्ताह का समय प्रदान किया है।
                           गौरतलब है कि वर्ष 1997 में गढ़ा गौड़वाना संरक्षण समिति व अन्य की तरफ से दायर याचिका में कहा गया था कि जबलपुर के 37 तालबों से सात विलुप्त हो गये है। दस जल तालाब व्यक्तिगत है तथा 20 तालाब के संरक्षण की जिम्मेदारी सरकार की है। सरकार द्वारा सिर्फ  14 जलस्त्रोत के लिए राशि का आवंटन किया गया था। हाईकोर्ट ने साल सितम्बर 2014 में एस्पो को तालाब संरक्षण के लिए निर्देशित किया था। योजना के कार्यवाहन के लिए एस्पो को 6 माह का समय दिया गया था।
                     वहीं याचिकाकर्ता  कर्नल ए के रामनाथन की ओर से दायर की गयी याचिका में कहा गया था कि खंदारी जलाशय से शहर में पानी की जल सप्लाई की जाती है। खंदारी जलाशय कई दशकों से शहर के लोगों की प्यास बुझा रहा है। भारत राजपत्र 1908, खंडारी झील का जलग्रहण क्षेत्र 13.597 वर्ग किमी, जो 3.360 एकड़ के लगभग है। हवाई अड्डा विस्तार सहित परियोजनाओं के लिए खंदारी जलाशय की 40.88 प्रतिशत जमीन आवंटित की गयी है और 59.12 क्षेत्र ही बचा है। इसके अलावा अन्य योजनाओं के तहत नगर निगम जमीन का आवंटन किया गया है,जो प्रारंभ नहीं हुई है। युगलपीठ ने अपने आदेश में कहा है कि इन योजनाओं के लिए दूसरी जगह जमीन प्रदान की जाये के निर्देष जारी किये थे।
                 युगलपीठ ने एस्पो व नीरी को अनावेदक बनाये जाने के आवेदन को स्वीकार करते हुए उन्हें नोटिस जारी कर जवाब मांगा था।युगलपीठ ने डुमना विस्तारीकरण के लिए आवंटित जमीन में ही निर्माण जारी रखने के अलावा अन्य निर्माण कार्य पर रोक लगा दी थी। नीरी की तरफ से पेष की गयी रिपोर्ट में बताया गया था कि डुमना क्षेत्र में प्रस्तावित स्पोर्ट्स सिटी निर्माण का जो दूसरा प्रस्ताव प्रस्तुत किया है,उसे खंदारी जलाषय के वॉटर कैचमेंट का एरिया आ रहा है। सुनवाई के दौरान आईआईआईटी निर्माण के लिए संरक्षित भूमि आवंटित किये जाने को गंभीरता से लेते हुए भूमि संबंधित रिकॉर्ड पेष करने आदेष जारी किये थे।