आचार्य डॉ. देवेन्द्रजी शास्त्री के मुखारबिन्द से प्रभु श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं को श्रवण कर भावविभोर हुए धर्मालुजन

महावीर अग्रवाल
मन्दसौर ३० दिसंबर ;अभी तक;  नयापुरा रोड़ स्थित श्री माहेश्वरी धर्मशाला में दिनांक 26 दिसम्बर से प्रतिदिन दोपहर 12.30 से 4.30 बजे तक श्रीमद् भागवत कथा का विराट आयोजन चल रहा है। व्यासपीठ पर विराजित होकर भागवताचार्य, ज्योतिषाचार्य डॉ. देवेन्द्र शास्त्री धारियाखेड़ी धर्मालुजनों को श्रीमद् भागवत का रसपान करा रहे है। श्रीमद् भागवत कथा का आयोजन श्री महेशचन्द्र शर्मा, श्री अशोक शर्मा परिवार के द्वारा श्री नारायण भक्ति संघ मंदसौर के सहयोग से किया जा रहा है। इस भागवत कथा में प्रतिदिन हजारों धर्मालुजन पधारकर श्रीमद् भागवत कथा का रसपान कर रहे  है। धर्मालुजनों की अपार संख्या का अनुमान इससे लगाया जा सकता है कि 9 हजार वर्गफीट में कथा के आयोजन के लिये बनाया गया डोम (कथा पाण्डाल) भी छोटा पड़ गया है और डोम के साथ अलग से व्यवस्थायें भी आयोजन समिति को करनी पड़ी है। मंदसौर नगर के जनकूपुरा, शहर क्षेत्र, नरसिंहपुरा, रामटेकरी, नईआबादी, कालाखेत, जीवागंज सहित पूरे नगर के धर्मालुजन कथा श्रवण करने कथा पाण्डाल में पहुंच रहे है।
                     श्रीमद् भागवत कथा के पंचम दिवस गुरूवार को श्रीमद् भागवत कथा का श्रवण कराते हुए पंडित डॉ. देेवेन्द्रजी शास्त्री ने भगवान श्री कृष्ण की बाल लीलाओं को श्रवण कराया। आपने भगवान श्री कृष्ण के जन्म के बाद वृन्दावन में माता यशोदा व नंद के यहां मनाये गये जन्मोत्सव  एवं श्री कृष्ण के बाल स्वरूप का वृतान्त श्रवण कराया। आपने कहा कि भगवान श्री कृष्ण का जन्म भेले ही मथुरा के कारागृह में हुआ लेकिन पालन पोषण वृन्दावन में माता यशोदा व नंद के यहां हुआ जन्म से ही नटखट श्री कृष्ण् को माखन अत्यधिक प्रिय था वे अपनी टोली बनाकर माखन चुराने के लिये हर संभव प्रयास करते थे। श्री कृष्ण की बाल लीलाओं एवं भक्ति से ओतप्रोत भजनों को सुनकर धर्मालुजन कथा पाण्डाल में ही भाव विभोर हो गये और नृत्य करने लगे।
पूतना का किया वध- कथा के पंचम दिवस श्री शास्त्री ने भगवान श्री कृष्ण के द्वारा किये गये पूतना वध की कथा भी श्रवण करायी। मथुरा नरेश कंस को जब गोकुल के नंद के यहां जन्मे तेजस्वी बालक कृष्ण को सूचना मिली तो उसने पूतना को भेजा। पूतना ने अपने वक्ष स्थल से जहरीला दूध कृष्ण को पिलाया लेकिन कृष्ण की मृत्यु की बजाय पूतना की मृत्यु हो गई। भगवान कृष्ण ने पुतना के वक्ष स्थल से दूध पीकर उसका उद्धार किया।
                 कालिया नाग का आतंक मिटाया- आचार्य श्री ने भगवान श्री कृष्ण के द्वारा यमुना नदी मे कालिया  नाग नामक विशाल सर्प को पराजित करने की कथा भी श्रवण करायी। यमुना नदी में कालिया  नाग अपने पूरे सर्प परिवार सहित रहते हुए गोकुल निवासियों को भयभीत कर रहा था ऐसे में श्री कृष्ण ने अपनी अल्पायु में ही कालिया नाग को पराजित करके उसे गोकुल के आसपास के क्षेत्रों को छोड़ने पर मजबूर कर दिया। कालिया नाग को पराजित करने की कथा बालकों को प्रेरणा देती है कि हममें किसी से भी डरना नहीं चाहिये।