आचार्य महाश्रमणजी के सानिध्य में अहिंसा यात्रा रतलाम से नामली प्रस्थित

अरुण त्रिपाठी
रतलाम ,25 जून ;अभी तक;   आचार्यश्री  महाश्रमण और उनकी धवल सेना ने शुक्रवार सुबह अहिंसा यात्रा के साथ रतलाम से अगले पड़ाव नामली की और प्रस्थान किया।मालवा की अतिथि देवो भवः की भावना के साथ रतलाम नगर के सभी जाति – धर्म और समाज के लोगो ने तीन दिवसीय यात्रा प्रवास के दौरान आचार्य प्रवर की अभिवंदना की।
यात्रा के अप्रतिम स्वागत से महाश्रमणजी और उनकी धवल सेना पर नगर के सामाजिक सद्भाव और भाईचारे की अमिट छाप कायम हो गई ।
अहिंसा यात्रा प्रणेता परमपूज्य आचार्य श्री महाश्रमण जी का तीन दिवसीय प्रवास प्राप्त कर रतलामवासी कृतार्थता का अनुभव कर रहे है। विहार में क्षेत्र के सांसद श्री गुमान सिंह डामोर ने पहुंचकर आचार्यप्रवर की यात्रा के प्रति मंगलकामना व्यक्त की। मार्ग में गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज एवं इप्का लेबोरेट्रिज के समक्ष    आचार्यश्री ने श्रद्धालुओं को पावन आशीर्वाद दिया। लगभग 14.5 किमी. का प्रलम्ब विहार कर ज्योतिचरण गुरुदेव नामली ग्राम के गवर्नमेंट हायर सेकेंडरी स्कूल में पहुंचे|
रतलाम तेरापंथ सभा के अध्यक्ष अशोक दख ने बताया कि आचार्य प्रवर ने अपने सम्बोधन में रतलाम की शैक्षणिक प्रबुद्धता की भूरी – भूरी प्रशंसा की। इसके बाद शुक्रवार को प्रातः 6:30 बजे आचार्य महाश्रमणजी ने अपनी धवल सेना के साथ रतलाम से नामली की यात्रा प्रारम्भ की। रतलाम तेरापंथ समाज के श्रावक – श्राविकाओं के साथ युवक परिषद एवं किशोर मंडल ने अतिथि भवन पहुँचकर आचार्य भगवन को भावभीनी विदाई दी।
बीते तीन दिनों में रतलाम नगर की विभिन्न सामाजिक संस्थाओं एवम व्यावसायिक संगठनों ने आचार्यश्री से भेंट कर वर्ष 2024 का चातुर्मास रतलाम में करने की विनती की। इन संस्थाओं में नगर की श्री सनातन धर्मसभा एवं महारुद्र यज्ञ समिति, अंजुमन इस्लाहुल मुस्लेमीन, द ग्रेन एंड सीड्स मर्चेंट एसोसिएशन, जनशक्ति, दाऊदी बोहरा समाज,श्री रिषभदेवजी केशरीमलजी जैन श्वे.पेढ़ी ट्रस्ट बोर्ड, श्री माहेश्वरी समाज, श्री खण्डेलवाल सेवा समिति, श्री गोपालजी का बड़ा मंदिर न्यास, श्री महावीर स्वामी जैन फाउंडेशन, दारूल क़ज़ा व इफ़ता, श्री दिगम्बर जैन चन्द्रप्रभु जिनालय, श्री सकल सिखवाल ब्राम्हण समाज रतलाम, जैन सोश्यल ग्रुप इंटरनेशनल फेडरेशन मध्यप्रदेश रीजन, श्री वैश्य महासम्मेलन, रतलाम प्रेस क्लब, प्रभु प्रेमी संघ, श्री सुधर्मं जैन श्रावक संघ, संत श्री रविदास समाज संघ, श्री सर्राफा एसोसिएशन, पंचान सरावगी साठ घर की गोठ, राठौड़ तेली समाज, श्री देवसूर तपागच्छ चारथुई जैन श्री संघ, मंडी व्यापारी युवा संघ, महावीर जैन युवा संघ, श्री जैन श्वेताम्बर खतरगच्छ श्री संघ, श्री आदिनाथ दिगम्बर जैन चैत्यालय, भारतीय सिंधु सभा, जय आदिवासी युवा शक्ति, द न्यू सुपर क्लाथ मर्चेंट एसोसिएशन, जवाहर व्यायामशाला परिवार, संयुक्त व्यापारी संघ, श्री सौधर्म वृहद तपागच्छ श्री राजेन्द्र सूरि – त्रिस्तुतिक श्री संघ सहित अन्य संस्थाओं के पदाधिकारीगण शामिल रहे।
रतलाम तेरापंथ सभा ने नगर के सभी धर्मालुजनों,संस्थाओं,जिला एवं पुलिस प्रशासन, नगर पालिक निगम एवं मिडिया समूह का धन्यवाद ज्ञापित किया है। सभा अध्यक्ष श्री दख ने कहा कि तेरापंथ धर्मसंघ रतलाम के लिए अपने आचार्यश्री का नगर आगमन एक ऐतिहासिक अवसर था। इस अवसर पर  नगरवासियों ने बहुत बड़े मन से सहयोग एवं आचार्य श्री का अभिवंदन किया,जो पूरे समाज पर उपकार है।
*जीवन में बने सदात्मा- आचार्य महाश्रमण*
मंगल प्रवचन में गुरुदेव ने कहा- आत्मा से जुड़े चार शब्द है- परमात्मा, महात्मा, सदात्मा और दुरात्मा। इनमें सबसे उच्च कोटि परमात्मा की होती है। जो मोक्ष प्राप्त कर चुकी परम आत्माएं हैं, सिद्ध है, केवलज्ञानी है वह परमात्मा होते है। महात्मा यानी महान आत्मा। साधु महात्मा होते हैं। संसार में कुछ ही होते हैं जो साधुत्व को स्वीकार कहते हैं, महाव्रतों को स्वीकार करते हैं। महात्मा वह होता है जिसकी कथनी-करनी में एकता होती है। जैसा कहे वैसा ही आचरण में हो।
गुरुदेव ने आगे कहा कि महात्मा तो सब नहीं बन सकते परंतु सदात्मा बनने का प्रयास करना चाहिए। व्यक्ति सज्जन बन कर रहे, दुरात्मा न बने। सज्जन व्यक्ति अपने ज्ञान का, धन का व बल का उपयोग सदकार्यों में करता है, परोपकार में करता है। दुर्जन व्यक्ति अपने धन आदि के अहंकार में आकर ज्ञान और बल का उपयोग बुरे कार्यों में करता है। व्यक्ति के पास कोई कुछ मांगने आ गया तो सदात्मा कभी किसी को खाली नहीं जाने देता। सज्जन का धन दान, परोपकार में लगता है। व्यक्ति सदात्मा बनने का प्रयास करें। हिंसा, बुरे कार्यों में लिप्त होकर दुरात्मा न बनें।