आचार्य श्री नानालालजी म.सा. के पुण्य स्मृति दिवस पर गुणानुवाद सभा का आयोजन हुआ

महावीर अग्रवाल
 मन्दसौर ५ नवंबर ;अभी तक; जैन धर्म के प्रभावक आचार्यों की परम्परा में स्थानकवासी-साधु मार्गी जैन संघ के आचार्य श्री नानालालजी म.सा. एक प्रख्यात आचार्य रहे। वे समता दर्शन व व्यवहार के ख्याता रहे। इस दर्शन के आधार पर समता समाज रचना का जो स्वप्न उन्होंने देखा उसे साकार करने में सफल हुए। हजारों की संख्या में अछूत समझे जाने वाले बलाई जाति के लोगों को धर्म का वास्तविक स्वरूप समझाकर उन्हें मानवताधारी मानव बताकर धर्मपाल की संज्ञा प्रदान की। अछूतोद्धार का यह सराहनीय कार्य करके उन्होंने जिन शासन की महत्ती प्रभावना की। इसके साथ ही सैकड़ों युवक-युवतियों को आत्म-स्वरूप का बोध करवाकर उन्हें जैन भागवती दीक्षा प्रदान करके आत्म कल्याण के पथ पर प्रगतिशील बनाया। इस तरह एक जैनाचार्य के रूप में छत्तीस वर्षों तक जैन शासन की भव्य प्रभावना करते हुए 26 अक्टूबर 1999 की रात्रि में उदयपुर-राजस्थान में देवलोक की ओर गमन किया। उनके पुण्य स्मृति दिवस के उपलक्ष्य में शास्त्री कॉलोनी स्थित नवकार भवन में आयोजित गुणानुवाद सभा में उनके शिष्य आचार्य श्री विजयराजजी म.सा. ने कहा-गुरू वो होते है जो अपने सभी शिष्यों में गुरूत्व की  योग्यता प्रदान करते है। वे ज्ञान, दर्शन, चरित्र की ऐसी योग्यता प्रदान करते है जिससे न केवल उनका स्वयं का जीवन ही महान बनता है बल्कि वे जहां जाते है वहां अपने गुरू के नाम का डंका बजाते है।
                  आचार्य श्री नानेश वस्तुतः समता विभूति थे, वे हर अनुकूल-प्रतिकूल, प्रिय-अप्रिय परिस्थिति में समता भाव में रमण करते थे। उन्होंने केवल समता का उपदेश ही नहीं दिया वरन् समता का आचरण करके दिखाया। आवश्यकता है उनको गुरू रूप में मानने वाले शिष्यों-भक्तों को कि वे समता का आचरण करके दिखाये, साम्प्रदायिकता कटुता व कट्टरता में रहकर संकीर्णताओं में उलझना सच्ची गुरू भक्ति नहीं होती। सबकी सेवा-सबका सम्मान करना गुरूदेव के आदर्शों को आत्मसात करने जैसा है।
                   इस अवसर पर विद्वान संत नवीनप्रज्ञजी, म.सति सूर्यकांताजी, म.सति चित्राश्रीजी ने आचार्य नानेश के दिव्य-भव्य व्यक्तित्व के बारे में बताया।
धर्मसभा में अजय जैन, लोकेन्द्र जैन, अंजना कोचेट्टा, पुष्पा-रेखा रातड़िया, शेखर कासमा, विमल पामेचा, बाबूलाल जैन, बालाघाट से आये प्रेमचन्द कांकरिया ने आचार्य श्री नानेश को इस सदी का अनुपम महायोगी निरूपित करते हुए अपने श्रद्धासुमन अर्पित किये।
धर्मसभा का संचालन सी.ए. विरेन्द्र जैन ने किया। यह जानकारी संघ के उपाध्यक्ष कांतिलाल रातड़िया ने प्रदान की।

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