आत्म युद्ध कर कषायों को जीते – आचार्य महाश्रमण*  *रतलाम प्रवास का द्वितीय दिवस*

7:02 pm or June 23, 2021
आत्म युद्ध कर कषायों को जीते - आचार्य महाश्रमण*  *रतलाम प्रवास का द्वितीय दिवस*
अरुण त्रिपाठी
रतलाम, 23 जून ;अभी तक;  शांतिदूत आचार्य श्री महाश्रमण जी के रतलाम प्रवास के द्वितीय दिन, अमृत गार्डन का परिसर में सुबह से शाम तक दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की निरंतर आवाजाही रही| इससे ऐसा लगा है मानो कोई आध्यात्मिक मेला लगा हो। शहर के अनेक सामाजिक राजनितिक, प्रशासनिक आदि क्षेत्रों के गणमान्यजनों ने शांतिदूत के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया।
परम पूज्य आचार्य श्री महाश्रमण जी ने मंगल प्रवचन में प्रेरणा देते हुए कहा- संसार में युद्ध लड़े जाते हैं। युद्ध हिंसा पूर्ण है तो अध्यात्म से जुड़ा हुआ भी हो सकता है। दूसरे से लड़ने वाला तो मूढ़ होता है परंतु स्वयं से लड़ने वाला बुद्ध बन सकता है। जीवन में भीतर का युद्ध, आत्मयुद्ध भी जरूरी है। स्वयं के भीतर जो अशुभ योग है, कषाय है व्यक्ति उन से लड़े। कषाय कर्म बंधन का कारण बनते हैं। कषायों को शुभ योग से सम्यक ज्ञान, दर्शन, चारित्र से जीतने का प्रयास करना चाहिए।
आचार्य श्री ने आगे कहा कि हमारे में कषाय मंदता की साधना होनी चाहिए। आक्रोश, अहंकार, लोभ आदि के भाव हमारे भीतर में नहीं होने चाहिए। किसी के भी प्रति मन में बुरा करने की भावना न हो। कर्मों के बंधन से हमारी आत्मा कैसे बचें इस पर ध्यान देना चाहिए। जीवन में पदार्थों का इस्तेमाल करना पड़ता है पर वह उपयोग ही रहे उपभोग ना बने। जीवन में कषाय अल्पीकरण की जितनी साधना होगी, आत्मा उतनी ही मोक्ष की दिशा में आगे बढ़ सकती है।
इस अवसर पर ‘शासन श्री’ साध्वी श्री करुणाश्री जी की स्मृति सभा भी समायोजित हुई। आचार्यश्री ने उनकी आत्मा के प्रति मंगलकामना व्यक्त की।
मुख्यमुनि महावीर कुमार जी, मुख्य नियोजिका साध्वी विश्रुतविभा जी, साध्वीवर्या संबुद्धयशा जी ने विचार व्यक्त किए। मुनि उदित कुमार, मुनि दिनेश कुमार, मुनि कुमारश्रमण, मुनि रजनीश कुमार, मुनि कोमल, मुनि योगेश, मुनि कीर्ति, मुनि विश्रुत, मुनि जितेंद्र, मुनि सत्य, मुनि सिद्धप्रज्ञ, साध्वी श्री प्रबलयशा जी ने भीअपने विचार रखे।
 *आचार्यवर के स्वागत में श्रद्धामय प्रस्तुतियां*
अभिवंदना के क्रम में तेरापंथ युवक परिषद् अध्यक्ष हेमन्त दख , तेरापंथ महिला मंडल अध्यक्षा ज्योति पीपाड़ा, अमृत गार्डन के  ललित दख , श्रीमती अंगुरबाला मांडोत, मोना, पायल बरबेटा, शिक्षा कोठारी ने स्वागत में प्रस्तुति दी। तेरापंथ किशोर मंडल एवं कन्या मंडल ने नुक्कड़ नाटक का मंचन किया।
*श्री जेसराजजी सेखानी को समाज भूषण अलंकरण प्रदान करने की घोषणा*
परम पूज्य आचार्यश्री महाश्रमणजी के मंगल सान्निध्य में आज जैन श्वेतांबर तेरापंथी महासभा ने श्री जेसराजजी सेखानी (बीदासर) को जैन श्वेतांबर तेरापंथ समाज के सर्वोच्च अलंकरण ‘समाज भूषण’ से अलंकृत करने की घोषणा की। यह अलंकरण उन्हें परम पूज्य आचार्यप्रवर के पावन सान्निध्य में सन 2022 के बीदासर मर्यादा महोत्सव के अवसर पर प्रदान किया जाएगा।
*चातुर्मास की विनती से गूंजा अमृत गार्डन*
रतलाम तेरापंथ सभा ने वर्ष 2024 के लिए गुरुदेव से रतलाम को चातुर्मास प्रदान करने की अपनी मांग को पुरजोर भावों के साथ प्रस्तुत किया। सभा की पुरजोर विनंती को सुनने के बाद आचार्य प्रवर ने रतलाम की सकारात्मक प्रस्तुति और मनोयोग को पूरी तरह परखा।आचार्य प्रवर ने रतलाम संघ के निवेदन का पूरा संज्ञान लिया और भावभरी प्रस्तुतियों की सराहना की
विनंती के लिए आयोजित कार्यक्रम में गुरुभक्ति के साथ रतलाम तेरापंथ सभा के बालको से लेकर वरिष्ठजनों तक ने अपनी बात प्रभावी और तार्किक रूप से प्रस्तुत की। बालिकाओं से लेकर महिला मंडल ने भी चातुर्मास की मांग के पक्ष में लघु नाटिका का मंचन किया एवं भक्ति से परिपूर्ण गीतिकाएँ प्रस्तुत की। स्थानीय सभा के अध्यक्ष अशोक दख ने समस्त समाजजनों की और से पक्ष रखा। सीए गौरव गांधी ने तेरापंथ धर्मसंघ के इतिहास के साथ मय आंकड़ो के रतलाम का पक्ष रखा। पत्रकार राजेश मूणत ने रतलाम के सर्वसमाजों का प्रतिनिधित्व करते हुए  विनंती पत्रों की फाईल गुरुदेव के सम्मुख रखी। गुरुदेव ने रतलाम के पक्ष को सापेक्ष भाव से लिया और फरमाया की आगे के चातुर्मासिक कार्यक्रम की घोषणा के समय रतलाम के पक्ष को ध्यान में रखा जाएगा।
नगर विधायक चैतन्य काश्यप एवं पूर्व ग्रहमंत्री हिम्मत कोठारी ने भी रतलाम सभा की चातुर्मासिक मांग का समर्थन किया। विधायक श्री  काश्यप ने रतलाम संघ की मांग को नगर के सभी जाति धर्म एवं समाज के लिए हितकारी बताया |उन्होंने कहा कि यदि वर्ष 2024 का चातुर्मास प्रदान किया जाता है तो यह धर्मधरा रतलाम की गौरवमयी परंपरा को और भी ऐतिहासिक स्वरूप प्रदान करेगा। पूर्व गृह मंत्री श्री कोठारी कांधे में फ्रेक्चर होने के बावजूद आचार्य प्रवर की सेवा में उपस्थित हुए। श्री कोठारी एवं श्री काश्यप ने पत्र देकर रतलाम की मांग को बल प्रदान किया।