आदिवासी जननायक बिरषा मुंडा की जयांती पर जिले में कार्यक्रम आयोजित किए गए

6:27 pm or November 15, 2020
आदिवासी जननायक बिरषा मुंडा की जयांती पर जिले में कार्यक्रम आयोजित किए गए
सौरभ तिवारी
होशंगाबाद १५ नवंबर ;अभी तक; आदिवासी जननायक बिरषा मुंडा की जयांती पर जिले में कार्यक्रम आयोजित किए गए। कार्यक्रम का शुभारम्भ बिरसा मुंडा के फोटो पर माल्यार्पण कर किया गया।
                इस दौरान मौजूद  अतिथियों ने क्रांतिकारी नेता बिरसा मुंडा के जीवन चरित्र पर प्रकाश डालते कहा कि अंतिम समय बिरसा मुंडा ने  डा.एन्डर सन से कहा मेरा पूरा शरीर कपडे मैं लपेट देना पर पैरों को खुले रखना ताकि समाज को पता चले कि अभी बहुत चलना वाकी है। अतिथियों ने नई पीढी़ को बताया कि  बिरसा मुंडा का जन्म  में रांची जिले के उलीहातु नामक स्थान में 15 नवम्बर 1875 को हुआ. बिरसा ‘मुंडा’ समाज से थे, जो कि भारत की सबसे बड़ी जनजाति है। उन्होंने बताया कि 1897 से 1900 के बीच मुंडाओं और अंग्रेज सिपाहियों के बीच युद्ध होते रहे और बिरसा और उसके चाहने वाले लोगों ने अंग्रेजों की नाक में दम कर रखा था। अगस्त 1897 में बिरसा और उसके चार सौ सिपाहियों ने तीर कमानों से लैस होकर खूँटी थाने पर धावा बोला। 1898 में तांगा नदी के किनारे मुंडाओं की भिड़ंत अंग्रेज सेनाओं से हुई जिसमें पहले तो अंग्रेजी सेना हार गयी लेकिन बाद में इसके बदले उस इलाके के बहुत से आदिवासी नेताओं की गिरफ़्तारियाँ हुईं। अन्त में स्वयं बिरसा भी 3 फरवरी 1900 को चक्रधरपुर में गिरफ़्तार कर लिये गये।
                 कार्यक्रम के मुख्यअतिथि होशंगाबाद जिला पंचायत सीईओ मनोज सरियाम,  होशंगाबाद एसडीएम  सुश्री भारती मेरावी आदिवासी विकास परिषद जिलाध्यक्ष अरूण प्रधान,  अखिल भारतीय विकास परिषद जगदीश नर्रे,  न.पा.उपाध्यक्ष अशोक कुशराम,  एसपीएम अजाक्स सचिव एस पी मेहरा,  अभिषेक उईके,  धनराज कुशराम,  दिनेश धुर्वे,  रेवाराम आहके प्रथम उईके, अधिवक्ता विक्रम परते आदि प्रमुखरूप से उपस्थित थे।

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