समर्थन मूल्य पर खरीदी गई धान को बेचकर राईस मिलर्स मुनाफा कमा रहे

आनंद ताम्रकार
बालाघाट २४ अगस्त ;अभी तक;  जिले में समर्थन मूल्य पर शासन द्वारा खरीदी गई धान से चांवल बनाये जाने हेतु राईस मिलर्स से अनुबंध किया जाता है। उन्हें मार्कफेड द्वारा कस्टम मिंलिग के लिये धान प्रदाय की जाती है। प्रदाय की गई धान से चांवल बनाये जाने की बजाये राईस मिलर्स उसे पडोसी राज्य के गोदिया जिले में बेच देते है तथा उसके एवज में अमानक स्तर का चांवल नागरिक आपूर्ति निगम को प्रदाय कर रहे है।
                   इन्हीं विसंगतियों के चलते विगत 30 जुलाई 2020 को प्रकाष में आया जिसमें मां एग्रो इंडस्टीज आमगांव को रजेगांव डिपो से प्रदाय की गई धान से भरा ट्रक गोदिया पहुंच गया। जहां रामनगर थाने की पुलिस द्वारा दस्तावेजों की जांच एवं पूछताछ किये जाने पर पाया गया की उक्त धान मध्यप्रदेश राज्य के बालाघाट जिले से लाया गया है। महाराष्ट पुलिस ने बालाघाट पुलिस को अवगत कराया जिस पर संज्ञान लेकर एसडीएम किरनापुर ने कार्यवाही कर धान से भरे ट्रक को थाने में लाकर सूर्पूद नामें में रखते हुये प्रकरण की जांच शुरू कर दी जांच में ज्ञात हुआ की ग्राम रजेगांव के डिपो से ट्रक क्रमंाक सीजी04 एमके3025 में धान के 750 बोरे भरकर मां एग्रो इडस्टीज भिजवाया गया था लेकिन उक्त ट्रक आमगांव पहुंचने की बजाय गोदिया पहुचा दिया गया।
                 इस मामले में मार्कफेड लांजी के मिर्जा यूनूस बेग लांजी की शिकायत पर किरनापुर पुलिस ने मां एग्रो इडस्टीज के प्रोप्राइटर राजेश अग्रवाल लांजी निवासी एवं ट्रक डायवर साबिर खान के विरूद्ध अनुबंध की शर्तों का उल्लघंन कर न्यास भंग करते हुये 750 बोरे धान की हेराफेरी करने के मामले में धारा 406,407,34 केतहत अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना में लिया गया।
                 यह उल्लेखनीय है की तत्कालीन जिला प्रबंधक मार्कफेड बालाघाट एवं अनुबंधित अनेक राईस मिलर्स की संाठगांठ के चलते कस्टम मिलिंग के लिये प्राप्त धान को सैकडों ट्रक महाराष्ट ले जाकर बेच दिया गया तथा उसके एवज में अमानक स्तर का चंावल प्रदाय किया गया।
                 नियमानुसार राईस मिलर्स को प्रदाय की गई धान की मात्रा उसके परिसर में स्टाक में रहना चाहिये या धान के एवज में निश्चित अनुपात में चावल की मात्रा होना आवश्यक है लेकिन प्रशासन की ओर से इस सबंध में किसी भी प्रकार की जांच ना होने से समर्थन मूल्य पर खरीदी गई धान को इस तरह बेचकर राईस मिलर्स मुनाफा कमा रहे है।

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