आयुष्मान योजना में फर्जीवाड़ा करने वाले वैष्णवी अस्पताल का लायसेंस निरस्त

3:26 pm or November 10, 2022

मयंक भार्गव

बैतूल १० नवंबर ;अभी तक;  जिला मुख्यालय की समीपस्थ ग्राम पंचायत बडोरा में संचालित वैष्णवी अस्पताल प्रबंधन द्वारा आयुष्मान भारत योजना में बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा किए जाने की पुष्टि होने पर जिला प्रशासन ने इस अस्पताल का लाइसेंस निरस्त कर दिया है। अब इस अस्पताल में कोई भी नया मरीज भर्ती नहीं हो सकेगा। वहीं जो मरीज भर्ती है उन्हें डिस्चार्ज कर अस्पताल बंद करने की सूचना स्वास्थ्य विभाग को देनी होगी। वैष्णवी अस्पताल का लाइसेंस निरस्त करने की कार्यवाही होने से निजी नर्सिंग होमों के संचालकों में हड़कम्प मच गया है।

आयुष्मान में फर्जीवाड़े की हुई थी शिकायत

वैष्णवी अस्पताल में आयुष्मान भारत योजना के तहत फर्जीवाड़ा करने की शिकायत कलेक्टर अमनबीर सिंह बैंस को प्राप्त हुई थी। इस शिकायत पर कलेक्टर ने संयुक्त टीम बनाकर अस्पताल का निरीक्षण करने के निर्देश दिए थे। संयुक्त टीम में बैतूल एसडीएम कैलाश परते, सीएमएचओ डॉ. एके तिवारी, तहसीलदार प्रभात मिश्रा एवं आयुष्मान योजना के जिला समन्वयक सुदीप माईती शामिल थे। टीम ने 19 अक्टूबर को वैष्णवी अस्पताल का आकस्मिक निरीक्षण किया जिसमें प्राप्त शिकायतें प्रथम दृष्टया सही पाई गई थी। इसी को लेकर सीएमएचओ बैतूल ने जांच के दौरान कमियां पाई थी उसी को लेकर वैष्णवी अस्पताल का लाइसेंस निरस्त कर दिया है।

आयुष्मान योजना में मिला था फर्जीवाड़ा

सीएमएचओ डॉ. एके तिवारी ने बताया कि कलेक्टर के निर्देश पर बनाई गई संयुक्त टीम ने जब निरीक्षण किया तो यहां पर आयुष्मान योजना में भी फर्जीवाड़ा उजागर हुआ था। उन्होंने बताया कि अस्पताल द्वारा पोर्टल पर 19 आयुष्मान योजना के तहत मरीज भर्ती होना बताया गया था जबकि भौतिक सत्यापन के दौरान महज 7 मरीज मिले थे। इसमें भी 4 मरीज आईसीयू में एवं 3 मरीज जनरल वार्ड में भर्ती मिले थे।  निरीक्षण टीम के अचानक पहुंचने के दौरान ही अस्पताल प्रबंधन द्वारा मरीजों को डिस्चार्ज किया जा रहा था जो कि अस्पताल में मौजूद थे ही नहीं। यह गड़बड़ी भी टीम द्वारा पकड़ी गई थी।

परिजनों से लिए थे 22 हजार रु.

सीएमएचओ डॉ. एके तिवारी ने बताया कि निरीक्षण के दौरान मरीजों से चर्चा करने पर मरीज बुधराव देशमुख के परिजन कमलेश देशमुख ने 22 हजार रुपए अस्पताल में जमा करना बताया जिसके बिल भी उसके पास मौजूद थे। जबकि पोर्टल पर इस मरीज का आयुष्मान से उपचार करना दर्शाया गया था। अस्पताल में कोई भी एमबीबीएस डॉक्टर भी उपलब्ध नहीं था। केवल बीएचएमएस डॉक्टर राजेश कुमार जगदेव आईसीयू में उपचार कर रहे थे। उन्होंने बताया कि अस्पताल प्रबंधन को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। इसका जवाब प्रस्तुत किया गया लेकिन जवाब के परीक्षण में उल्लेखित बिंदु असंतोषजनक पाया जो अधिनियम 1973 तथा नियम 1997 का उल्लंघन पाया गया। इसके तहत अस्पताल का लाइसेंस निरस्त कर दिया गया है।

लाइसेंस किया निरस्त

सीएमएचओ डॉ. एके तिवारी ने बताया कि निरीक्षण तमाम अनियमितता  मिलने 4 एमबीबीएस डॉक्टर होना बताना और मौके पर एक भी नहीं होना। अस्पताल में रेट लिस्ट भी डिस्प्ले नहीं होना। आयुष्मान में गड़बड़ी सहित अन्य अनियमितताओं को लेकर तत्काल प्रभाव से वैष्णवी अस्पताल में नए मरीजों को भर्ती एवं उपचार नहीं करने, नर्सिंग होम की समस्त गतिविधियां बंद करने के निर्देश दिए हैं। केवल पहले से भर्ती मरीजों को प्रोटोकाल अनुसार डिस्चार्ज होने तक उपचार करने की स्वीकृति दी है। इसके साथ ही अस्पताल की समस्त गतिविधियां बंद कर कार्यालय को सूचित करने के निर्देश दिए गए हैं।