आरिफ मसूद की अग्रिम जमानत अर्जी खारिज, फ्रांस का झंडा और राष्ट्रपति का पुतला जलाने पर धार्मिक भावनाएं भड़काने का मामला

संतोष मालवीय
भोपाल ७ नवंबर ;अभी तक;   पैगंबर साहब की तौहीन करने पर इकबाल मैदान में प्रदर्शन कर फ्रांस का झंडा और वहां के राष्ट्रपति का पुतला जलाए जाने को लेकर व धार्मिक भावनाएं भड़काने के मामले में मध्य विधान सभा के कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद की अग्रिम जमानत अर्जी को मामला गंभीर प्रवृत्ति का बताते हुए एमपी और एमएलए के मामलों की सुनवाई के लिए गठित विशेष अदालत के विशेष न्यायाधीश प्रवेन्द्र कुमार सिंह ने निरस्त कर दी है।
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                   मामला इस प्रकार से है कि 29 अक्टूबर को आरिफ मसूद ने फ्रांस में पैगंबर साहब की तौहीन करने की घटना के विरोध में इकबाल मैदान में जिला प्रशासन की इजाजत बगैर भीड़ इकट्‌ठा कर धार्मिक भावनाएं भड़काने वाला भाषण देकर लोगों की धार्मिक भावनाओं को भड़काया था। तथा फ्रांस का झंडा और वहां के राष्ट्रपति का पुतला भी जलाया गया था। अपने भाषण में आरिफ मसूद ने कहा था कि केंद्र और राज्य की हिंदूवादी सरकार के मंत्री भी फ्रांस के कृत्य का समर्थन कर रहे हैं। अगर हमारी सरकार ने फ्रांस का विरोध नहीं कियाए तो हम हिंदुस्तान में भी ईंट से ईंट बजा देंगे। जिसके कारण तलैया थाना पुलिस ने आरिफ मसूद और उनके साथियों के खिलाफ अलग -अलग दो आपराधिक मामले दर्ज किए थे।
                   इनमें से एक मामला जमानतीय  होने से आरिफ मसूद और उनके साथियों को पुलिस ने गिरफतार कर थाने से ही जमानत पर रिहा कर दिया। दूसरे मामले में पुलिस ने धामिक भावनाएं भड़काने की गैर जमानती धारा 153 के तहत आरिफ मसूद और उनके साथियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था। अपनी गिरफतारी से बचने के लिए आरिफ मसूद ने अपने वकील के द्वारा जिला अदालत में अग्रिम जमानत का आवेदन शुक्रवार को अदालत में पेश किया था जिसकी सुनवाई शनिवार को होना थी।
                   शनिवार को विशेष अपर सत्र न्यायाधीश की अदालत में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए आरिफ मसूद की अग्रिम जमानत अर्जी पर सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान आरिफ मसूद के वकील ने अपनी बहस में कहा कि पुलिस ने एक प्रदर्शन के मामले में आरिफ मसूद और उनके समर्थकों के खिलाफ एक ही अपराध में दो मामले दर्ज किए हैं। जबकि एक ही अपराध में दो मामले दर्ज नहीं किए जा सकते हैं। मसूद के वकील ने कहा कि पुलिस ने 29 अक्टूबर को आरिफ मसूद और उनके समर्थकों के खिलाफ जमानतीय धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था। वहीं इसी मामले में 4 नवंबर को दूसरी एफआईआर दर्ज करते हुए आरिफ मसूद व उनके सात साथियों के खिलाफ भारतीय दण्ड विधान की धारा 153-ए के तहत गैर जमानतीय धारा के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया गया। सरकारी वकील ने आरिफ मसूद के अपराध को गंभीर बताते हुए उसे जमानत दिए जाने का विरोध किया।
               विशेष लोक अभियोजक पीए सिंह राजपूत ने कहा कि आरोपी द्वारा उन्मादी भाषण दिया गया जिससे दो समुदायों के बीच सौहाद्रपूर्ण वातारण में खतरा उत्पन्न हुआ। उन्होंने यह भी कहा कि आरोपी ने जानबूझकर केंद्र सरकार एवं प्रदेश सरकार की छवि धूमिल करने के लिए प्रदर्शनकारियों के बीच भाषण दिया। विशेष लोक अभियोजक ने अदालत से कहा कि आरोपी का पूर्व में आपराधिक रिकार्ड रहा हैं इसलिए आरोपी की ओर से दायर की गई अग्रिम जमानत अर्जी को निरस्त किया जाए। अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद आरोपी की जमानत अर्जी खारिज कर दी है।

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