आश्रय स्थल पर जगह नहीं मिली, तो बस स्टाॅप पर गुजारी रात, आयोग ने कमिश्नर एवं कलेक्टर भोपाल से दो सप्ताह में मांगा जवाब

महावीर अग्रवाल
मन्दसौर / भोपाल  २३ दिसंबर ;अभी तक;  भोपाल जिले में* ठंड के तीखे तेवरों के चलते कलेक्टर ने फुटपाथ पर सोने वालों को ठंड से बचाने के लिये सुरक्षित स्थानों व रैन बसेरा में व्यवस्था करने के आदेश दिये हैं। इसके बावजूद कई लोग रैन बसेरा और आश्रय स्थलों की बजाय बस स्टाॅप पर रात गुजारने के लिये मजबूर हैं।
                     बताया गया है कि कई लोगों की आईडी न होने के कारण ऐसा करना पड़ता है। एकाएक रात के तापमान में गिरावट आई है। कड़ाके के सर्दी के कारण सभी परेशान हैं। इनमें खासतौर वे लोग ज्यादा दिक्कत में हैं जो बेसहारा हैं। मुसाफिरों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ठंड से निपटने किये गये इंताजामों की पड़ताल में सामने आया कि रात में फुटपाथ पर सोने वालों को अब भी पर्याप्त व्यवस्था नहीं हो पाई। कई ऐसे लोग मिले जो बीआरटीएस काॅरीडोर में बने दोनों ओर से शटर लगे बस स्टाॅप को सोने के लिये इस्तेमाल कर रहे हैं। बस स्टाॅप के अंदर सोने वाले ने पूछने पर बताया कि दस बजे के बाद लो फ्लोर बसें चलती नहीं हैं। इसके अलावा इमरजेंसी वाहन एक दो ही निकलते हैं। जिसके चलते रात में सूने वह खाली पड़े बस स्टाॅप में उठाने के लिये कोई परेशान नहीं करता है। मिसरोद से लेकर बैरागढ़ तक बने काॅरीडोर के बस स्टाॅप में लोग रात होते ही सोने के लिये जगह घेरना शुरू कर देते हैं। *मामले में संज्ञान लेकर मध्यप्रदेश मानव अधिकार आयोग ने कमिश्नर, भोपाल संभाग एवं कलेक्टर, भोपाल से दो सप्ताह में तथ्यात्मक जवाब मांगा है। आयोग ने इन अधिकारियों से यह भी पूछा है कि
*01. फुटपाथ पर सोने वालों के लिये एवं अन्य ऐसे ही व्यक्तियों के लिये कितने रैन बसेरों की व्यवस्था की गई है ? उनकी कितनी क्षमता है ?
*02. अखबार में प्रकाशित हुये समाचार में दिखाये गये व्यक्तियों को रैन बसेरों में जगह क्यों नहीं मिल पाई ?