आसक्ति ही दुखों  का कारण है-आचार्य श्री पियुषभद्रसूरिश्वरजी म.सा.

5:53 pm or July 28, 2022
महावीर अग्रवाल 
मन्दसौर २८ जुलाई ;अभी तक;  मनुष्य को आसक्ति  से दूर रहना चाहिये। आसक्ति ही दुःख का कारण है। भौतिक पदार्थों, घर परिवार के प्रति आसक्ति आपके आत्मकल्याण में बाधक है। मनुष्य को यदि जीवन में दुर्गति से बचना है तो आसक्ति से बचे।
उक्त उद्गार परम पूज्य आचार्य श्री पियुषभद्रसूरिश्वरजी म.सा. ने नईआबादी स्थित आराधना भवन मंदिर हाल में आयोजित धर्मसभा में कहे। आपने कहा कि कोई भी भंवरा जब कमल की पंखुड़ी की सुगंध में आसक्त  रहता है तो वह उसी में फंसकर रह जाता है। पुष्प की मुलायम  पंखुड़ी व खुशुबु भंवरा  को कैद कर लेती है या कोई भी पशु उस कमल को खाता है तो उसके साथ भंवरा भी मृत्यु को प्राप्त हो जाता है। इसलिये जीवन में भंवरे से सिख ले और आसक्ति में न फंसे।
               भगवान की देशना (प्रवचन) निष्फल नहीं जाते- आचार्य श्री ने कहा कि प्रभु महावीर ने हमें जो संदेश अपनी देशना के माध्यम से दिया है वह प्रेरणादायी है। प्रभु महावीर के वचनों को सुनकर कई लोगों ने संयम जीवन ग्रहण किया और आज भी लोग महावीर की वाणी से प्रभावित होकर संयम जीवन की ओर प्रवृत्त हो रहे है।
                वनस्पति काया के जीवों की हिंसा से बचे- आचार्य श्री ने कहा कि कई बार हम अपने मूंह के स्वाद की खातिर पान चबाते है, लेकिन हमेशा स्मरण रखना चाहिये कि पान के पत्ते में असंख्य जीव होते है हमारे द्वारा पान चबाने से जो जीव हिंसा हो रही है उसका पाप भी हमें ही लगता है, इसलिये जीवन में अनावश्यक रूप से की जा रही ऐसी हिंसा से बचो।
              पापों की अनुमोदना मत करो- आचार्य श्री ने कहा कि कई बार हम वनस्पति काया के जीवों की हिंसा कर उस पाप की अनुमोदना अपने मुंह से करते है हमें केवल अपना शरीर चलाने के लिये ही आहार लेना चाहिये। स्वाद की खातिर वनस्पति काया के जीवों की हिंसा नहीं करना चाहिये।
              अमर्यादित फोटो फेसबुक पर मत डालो- आचार्य श्री ने कहा कि पति-पत्नी कहीं भी घुमने जाते है तो अपने फोटो फेसबुक पर डाल देते है। अमर्यादित फोटो डालने से कोई लाभ नहीं है। मर्यादित वेशभूषा व एंगल में खिंचे गये फोटो जब फेसबुक पर अपलोड किये जाते है तो उन्हें देखने वालों के मन में विकार ही उत्पन्न होते है। दूसरों के फोटो देखकर कोई भी व्यक्ति आसक्त हो सकता है तथा घर परिवार की टूट का खतरा इससे बढ़ जाता है। इसलिये जीवन में इससे बचे।
             आत्मकल्याण की भावना रखो- आचार्य श्री ने कहा कि हमें अपने जीवन में आत्म कल्याण की भावना से धर्म साधना, तप तपस्या करनी चाहिये। मनुष्य को जो भी कर्म करना चाहिये। आत्मकल्याण की भावना से करना चाहिये। धर्मसभा में बड़ी संख्या में धर्मालुजन उपस्थित थे। धर्म सभा का संचालन दिलीप रांका ने किया।