इंसानियत का निर्माण ही विश्व के सभी धर्मों का मुख्य लक्ष्य है पर आज इंसानियत का ही जनाजा निकल रहा है- राष्ट्रसंत कमलमुनि जी कमलेश

7:11 pm or July 20, 2022

महावीर अग्रवाल

मंदसौर २० जुलाई ;अभी तक;  अनीति बेईमानी, मिलावट और अराजकता धार्मिकता के नाम पर कलंक है, और दुहाई देने वाले के मुंह पर करारा तमाचा है। नैतिकता के बिना विश्व के किसी धर्म में व्यक्ति का प्रवेश नहीं हो सकता और वो धार्मिक कहला नहीं सकता है। इंसानियत का निर्माण ही विश्व के सभी धर्मों का मुख्य लक्ष्य है पर आज इंसानियत का ही जनाजा निकल रहा है। इसलिए पूरे विश्व को आध्यात्मिकता का संदेश देने वाले हिंदुस्तान में सभी धर्म के व्यक्ति में नैतिकता का विकास हो, सभी धर्म गुरु सिर्फ़ इसी को प्राथमिकता देकर काम करना चाहिए।ये विचार राष्ट्र संत कमलमुनि जी कमलेश ने जैन दिवाकर प्रवचन हाल में व्यक्त किए।
मुनिश्री ने कहा कि जितनी आध्यात्मिकता की दुहाई दी जा रही है उतना ही नैतिकता का दिवाला नजर आ रहा है। नैतिकता के बिना आध्यात्मिकता का ढोल पीटना मुर्दे  का शृंगार करने के समान है। इतने धर्म और संत मौजूद होने के बावजूद भ्रष्टाचार, हिंसा आतंकवाद, बलात्कार तथा व्यसन की भरमार है।

                        धर्मसभा के दौरान जन अभियान परिषद योजना आर्थिक सांख्यिकी विभाग की  जिला समन्वय कोर्डिनेटर तृप्ति बैरागी, महामंत्री प्रकाश सिसोदिया ने राष्ट्र संत कमलमुनि के सानिध्य में मीटिंग आयोजित की। इसमें चारों महीने पर्यावरण स्वच्छता अभियान नशा मुक्ति राष्ट्रीय एकता सर्वधर्म सद्भाव 11 से 17 अगस्त तक आजादी के अमृत महोत्सव तिरंगा अभियान की रूपरेखा तैयार की गई।  तपस्वी घनश्याम मुनि जी के 11 उपवास की तपस्या चल रही है। कौशल मुनि जी ने मंगलाचरण किया।