उनको कह रहे है पैदल भी चला करो और खुद बोलेरो में चल और कर रहे यातायात को जटिल

महावीर अग्रवाल
मन्दसौर १४ नवंबर ;अभी तक; मन्दसौर शहर की यातायात व्यवस्था वर्ष प्रतिवर्ष जटिल होती जा रही है। पुलिस का यातायात अमले में भी बढोतरी हो ही रही होगी लेकिन इसकी स्थिति बड़ा हुआ तो क्या हुआ जैसे पेड़ खजूर , पंछी को छाया नही फल लगे अति दूर वाली कहावत को चरितार्थ कर रहे है आश्चर्य क्यो। सब कुछ जान रहे है।देख रहे है और कुछ भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ रहे हो तो विभाग का जांच का विषय हो सकता है।
                  प्रतिवर्ष तीज – त्योहारों पर नगर की यातायात व्यवस्था समस्या बनती जा रही है। जटिल होती यातायात व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए पुलिस का यातायात अमला शायद अपने वरिष्ठ अधिकारियों के मार्ग दर्शन में कुछ निर्णय लेकर जनता को बताता आ रहा है।आप अभी इस दीपावली त्योहार के दौरान एक सप्ताह से नगर के मुख्य बाजार में उमड़ रही भीड़ को देख रहे होंगे। कहने व बताने को नियम बनाए। नगर के मख्य बाजार में कोई चार पहिया वाहन आ गया। अब यह गलती से आया या यातायात पुलिस की मेहरबानी से आया कोन जाने । अब यह दृश्य देखो उस चार पहिया वाहन के ड्राइवर व उसमें बैठे लोगो को पीछे बोलेरो लेकर चल रहे यातायात पुलिस कर्मियों ने हिदायत देते हुए कहा कि कुछ पैदल चलना भी सीखो।
               उस चार पहिया वाहन चालक और उसमें आराम से बैठे लोग व चार पहिया वाहन होने का भारी भीड़ में प्रदर्शन कर रहे लोगो से तो आम लोग परेशान हो ही रहे है लेकिन क्या यातायात पुलिस की बोलेरो से यातायात जटिल हो रहा है इसकी तरफ ध्यान नही है। क्या इन्हें भी पैदल चल कर यातायात को सुगम बनाने के कदम नही उठाने चाहिए।
                 यह तो यातायात की एक समस्या सामने है लेकिन प्रतिदिन उन मार्गो पर भारी वाहन आ जा रहे है जिन पर काफी समय तक जाम के हालात बन जाते है। ये भारी वाहन किसकी अनुमति से नगर में व्यस्त समय मे घुस रहे है। कई दुकानदारों की दुकानों की स्थिति देखने से ऐसा लगता है शायद सड़क का मसलिकाना हक ही दुकानदार को दे दिया हो। आखिर क्या इसी प्रकार यातायात की समस्या को सुगम किया जाता रहेगा । कुछ जगह यातायात पुलिस कर्मी खड़े जरूर है परंतु वे खड़े -खड़े शायद लग रहे जाम को देखने के लिए । यदि नगर की यातायात व्यवस्था इसी प्रकार बनाए रखना है तो फिर भारी लवाजमे की जरूरत ही क्या है। जब कभी यातायात व्यवस्था को लेकर बैठक होती होगी उसमें क्या विचार विमर्श होता होगा यह वे ही जाने।

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