उपचुनाव बाद एक पखवाड़े में हो जाएगा तेलिया तालाब का सीमांकन, निर्माण कार्यों पर रोक लेकिन प्लाटों के विक्रय पर रोक नही

(महावीर अग्रवाल )
मंदसौर 31 अक्टूबर ;अभी तक; नगर के प्राचीन एव अतिमहत्वपूर्ण लगभग आधी आबादी के जलस्रोतों को रिचार्ज करने वाले तेलिया तालाब के अंधकार में गोते लगाते भविष्य को लेकर जो चिंतन हो रहा था उस पर विराम लगने से इनकार नही किया जा सकता। वर्ष पर वर्ष बीतते जा रहे थे और इसका जल है जो चिंता में सिकुड़ता जा रहा था या इसे सीमित किया जा रहा था यह सब कुछ नगर की जनता में गहन चर्चा में था लेकिन इसी बीच नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल दिल्ली के आए एक फैसले ने मानो इस तालाब में अमृत की बूंदे डाल दी हो ऐसी प्रसन्नता हर एक कि जुबा पर रही । अब यह और प्रसन्नता की खबर है कि जल्द ही इसका सीमांकन भी राजस्व विभाग की एक टीम उपचुनाव के बाद करेगी जो एक पखवाड़े में अपना कार्य पूरा कर लेगी। इस क्षेत्र में करोड़ो -अरबो रु के प्लाट काट कर विक्रय कर रहे कालोनाइजरों और भूमाफियाओं में सीमांकन तक हड़कम्प रहता हो तो कोई आश्चर्य नही होगा। अब समय आ गया है कि शासन – प्रशासन यह भी बता दे कि नगर में कितनी जिनिंग फैक्ट्रियां थी और उन्हें कितनी जमीन लीज पर दी गई थी । इन जमीनों की वर्तमान में स्थिति क्या है।
                       कोई 54 मिलियन घनफिट जलग्रहण क्षमता के तेलिया तालाब की वर्तमान क्या स्थिति यह विशेषज्ञों को बताना चाहिए। यह तेलिया तालाब जब पर्याप्त वर्षा के बाद भी नही भरने लगा तो जहां से वर्षा का जल बहकर इसमें आता है वहां से कौनसी रुकावटे इसे रोक रोक रही है इसकी चिंता पूर्व विधायक श्री ओम प्रकाश पुरोहित ने प्रशासन से पहल कर हटवाए थे तब कहि जा कर थोड़ा बहुत पानी इस तक पहुचने लगा था किंतु जो इसका जलग्रहण क्षेत्र है उसकी और तो किसी ने देखने का साहस नही किया या देखने की जरूरत नही समझी। जो भी हो लेकिन अब दूध का दूध और पानी का पानी हो जाना चाहिए जिससे इसके भविष्य को लेकर चिंताओं के दौर नही हो।
                राज्य शासन ने ताबड़तोड़ में नया कलेक्टर भवन भी ऐसी जगह स्वीकृत कर बनवाया और 2018 के विधानसभा चुनाव के पूर्व आनन -फ़ानन में यहां कलेक्टर कार्यालय सहित कुछ शासकीय दफ्तरों को शिफ्ट भी कर दिया संभवतया ताकि कभी कोई परिस्थिति हो तब यह रुके नही। इस कलेक्टर कार्यालय के बनने के बाद इस क्षेत्र की कालोनियों के भावों को तो मानो पंख लग गये जिसका की भूमाफियाओ में अनुमान की चर्चा थी। यह बात हमेशा के लिए ताकि सनद है कि इस नए कलेक्टर कार्यालय के स्थान चयन को लेकर जिले भर के नागरिक खुश नही है पर हां चंद वे लोग तो होंगे जिनकी कालोनियां यहां विकसित हो रही थी।
                   21 सितम्बर 2020 को याचिकाकर्ता डॉ दिनेश जोशी की एक याचिका पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल दिल्ली का मंदसौर के तेलिया तालाब को लेकर आए फैसले को लेकर इसके क्षेत्र में हो रहे निर्माण कार्यों पर रोक लगाने के लिए फिर एक आवेदन दिनांक 14 अक्टूबर 2020 को दिनेश जोशी व आलोक शर्मा को देना पड़ा ।यानी कि फैसले के 21 दिन बाद फिर याद दिलाने के लिए दिये एक  आवेदन में इन्होंने लिखा कि मन्दसौर शहर स्थित तेलिया तालाब को बचाने के लिए एक लैंडमार्क निर्णय घोषित किया है जिसके अंतर्गत तेलिया तालाब के एमडल्ब्युएल व एफटीएल क्षेत्र में निर्माण कार्य की अनुमति पर रोक लगाई गई है और सारे निर्माण बंद करने का निर्देश दिया गया है। पत्र में इन्होंने यह भी लिखा कि हमारे पास जो जानकारी है उसके अनुसार यश नगर के सभी भाग ,केशव कुंज,शांति निकेतन,सिध्द श्री विहार एव अन्य क्षेत्रों में डी मार्ट व अन्य निर्माण चल रहे है जो कि माननीय ट्रिब्यूनल के आदेश का स्पष्ट उल्लघंन होकर सीधे सीधे न्यायालय की अवमानना होकर अवैध व अनैतिक है। पत्र में लिखा कि जनहित में जबतक तालाब की सीमाओं का निर्धारण नही हो जाता तब तक कोनसा क्षेत्र डूब में और कोनसा क्षेत्र डूब क्षेत्र से बाहर है । यहबिना सीमांकन के सुनिश्वित किया जाना संभव नही है। और जहां तक हमारी जानकारी है जमीनी स्तर पर भी काफी कुछ गड़बड़ियां है ऐसी स्थिति में जब तक विधिवत सीमांकन नही हो जाता तबतक इन समस्त क्षेत्रो में हो रहे निर्माण कार्यो पर रोक लगाना आवश्यक है।नही तो माननीय न्यायालय के आदेश की अवहेलना होगी।
                       इसी दौरान सरकारी जमीनों और नगर के महत्वपूर्ण गन्दे नालों पर अतिक्रमण कर कालोनियों का रूप लेने पर समय – समय पर चिंता व्यक्त करने और शासन – प्रशासन का ध्यान आकर्षित करने वाले नगर के जागरूक नागरिक एव पूर्व मंत्री श्री नरेन्द्र नाहटा ने 22 अक्टूबर 2020 को एक पत्र लिखकर कहा कि में उस पार्षद का आभारी हूं अपनी राजनीति से ऊपर उठकर शहर के हित मे ट्रिब्यूनल में अपील की ।मेरा डर है कि क्या वे अधिकारी जो या तो स्वयं इसमें शामिल थे या राजनीतिक दबाव में काम कर रहे थे अब निष्पक्षता और ईमानदारी से काम कर पाएगे। हम शहर के लोग उत्सुकता से देख रहे है। उन्होंने यह भी लिखा कि कृपया कुछ कीजिए कि सुप्रीम कोर्ट में तेली समाज के साथ सरकार खड़ी रहे।पत्र में महत्वपूर्ण बात यह भी लिखी की इसके पहले की सुप्रीम कोर्ट ट्रिब्यूनल की तरह फैसला करे प्रशासन फैसला कर ले । शहर आपका सदैव आभारी रहेगा।
                     श्री नाहटा ने इसके साथ ही लक्ष्मण मंदिर का मुद्दा भी उठाया और कहा कि जिनके विरुद्ध गभीर शिकायते ,राजनीतिक दबाव के चलते प्रशासन ने ठंडे बस्ते में डाल रखी है। उन्होंने मेडिकल कालेज की जमीन का मुद्दा उठाते हुए लिखा कि जिनके दबाव में मेडिकल कालेज की जमीन तीन टुकड़ो में बायपास पर आबंटित हुई । मेने आपसे मिलकर निवेदन किया था कि भविष्य के विस्तार को देखते हुए कम से कम 50 एकड़ भूमि आबंटित की जाए । क्या कारण है कि क्षेत्र के हीत पीछे छूट गए। पत्र में लिखा किइसलिए डर लग रहा है कि ग्रीन ट्रिब्यूनल के फैसले का भी यही हश्र नही हो । युवा पार्षद और जागरूक पत्रकारों का भी उल्लेख किया और कहा कि उम्मीद करता हू की अब शहर के साथ न्याय होगा।
                     तेलिया तालाब के सीमांकन को लेकर अगर हर कोई चिंतित है तो आश्चर्य नही होगा। इस बात का भी अनुमान है कि सीमांकन के समय लोग साथ रहकर देखे तो आश्चर्य नही होगा। उसका एक कारण यह है कि तेलिया तालाब का नक्शा कुछ लोगो के पास हो तो आश्चर्य नही क्यों कि एक महत्वपूर्ण व्यक्ति ने मुझे भी वह नक्शा उपलब्ध करवाया है जो सही है या नही वह नपती के बाद ही पता चलेगा लेकिन हां कुछ लोग नपती के समय इस नक्शे को साथ लेकर भी चल सकते है।
कलेक्टर श्री मनोज पुष्प ने तो एनजीटी के फैसले के बाद सम्बंधित विभागों के अधिकारियों की एक बैठक बुलाकर उन्हें निर्देश दे दिए है।
                    तहसीलदार श्री नारायण नांदेड़ ने बताया कि उपचुनाव के बाद तेलिया तालाब की नपती सीमांकन के लिये 3 राजस्व निरीक्षक और 7-8 पटवारियों ,नगर पालिका व जलसंसाधन विभाग की एक टीम बनाई जाकर 15 दिन में यह कार्य पूरा कर लिया जाएगा। इसके साथ ही यह भी कहा कि हम एनजीटी के निर्देश का पालन कर रहे है।
                  उधर नगर पालिका के कार्यपालन यंत्री श्री अरविंद गंगराड़े का कहना हैकि तेलिया तालाब के डूब क्षेत्र में निर्माण की अनुमति नही देरहे है।
                जिला पंजीयक आशा निगम का कहना  की तेलिया तालाब वाले मामले में कलेक्टर का ऐसा कोई पत्र नही आया कि इस क्षेत्र के प्लाटों के पंजीयन पर रोक लगाना हो
                वरिष्ठ पंजीयक श्री मुकेश बघेल का कहना है कि इस क्षेत्र के दस्तावेजों के पंजीयन पर रोक सम्बन्धी कलेक्टर का ऐसा कोई पत्र नही आया।
                नगर पालिका में स्वास्थ्य समिति की चेयरमैन विद्या पुखराज दशोरा ने कहा कि तेलिया तालाब की सीमाओं में जो आ रहा है वहा निर्माण की अनुमति नही दी जा रही है। अब सीमांकन का आदेश आया है।
                      मंदसौर में सरकारी जमीन हो या हजारों वर्षों के गन्दे नालों पर अतिक्रमण के मामले कुछ तो अजब गजब से कम नही है। ऐसा ही एक मामला कलेक्टर बंगले के सामने की 0.041 हेक्टर सर्वे नम्बर 1071/2 की बेशकीमती जमीन के मामले को लेकर चल रही जांच के बारे में तहसीलदार श्री नारायण नादेड़ ने बताया कि यह आवेदक की वो जमीन नही है जो वह चाह रहा है। इसकी जांच का प्रतिवेदन एडीएम को भेज दिया है।

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