उपायुक्त मीना डाबर ृृ जो रायसेन में पहले पदस्थ रही हे ओर संबंधितैर आडिट अधिकारी नारायण सिंह हाड़ा के खिलाफ विभागीय कार्रवाई करने का प्रस्ताव शासन को भेजा

मयंक शर्मा
खंडवा १९ नवंबर ;अभी तक;  सहकारिता विभाग की उपायुक्त मीना डाबर ृृ जो रायसेन में पहले
पदस्थ रही हे ओर संबंधितैर आडिट अधिकारी नारायण सिंह हाड़ा के खिलाफ
विभागीय कार्रवाई करने का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। मामले में
रायसेन पुलिस ने तीन अन्य लोगों के खिलाफ 1.54 करोड़ रुपए घोटाला का केस
दर्ज किया है।  वर्तमान में मीना डाबर खंडवा में सहकारिता उपायुक्त के पद
पर है।
थाना उदयपुरा जिला रायसेन में 26 अक्टूबर 2021 को केस दर्ज है।  किसान
खुमानसिंह धाकड़ की जमीन सहकारी संस्था के नाम पर बताकर सड़क विकास निगम से
1 करोड़ 53 लाख 64 हजार 766 रुपए की मुआवजा राशि प्राप्त कर ली। इसके बाद
1.41 करोड़ रुपए निकाल कर भ्रष्टाचार किया।डाबर के खिलाफ मप्र सिविल सेवा
आचरण नियम 1965 की कंडिका के तहत वैधानिक कार्रवाई भी होगी।
मामले की जांच रपट मे गडबडी उजागर हुई है। आयुक्त सहकारिता नरेश पाल ने
जांच कराई थी इसमें गड़बड़ी प्रमाणित पाई गई। प्रारंभिक जांच में इस
अनियमितता के लिए तत्कालीन उपायुक्त मीना डाबर, संस्था के प्रशासक नारायण
सिंह हाड़ा और प्रबंधक रामबाबू शर्मा को दोषी पाया गया है। विभागीय स्तर
पर जांच भी प्रारंभ हो गई है। अब इन्हें निलंबित करने का प्रस्ताव शासन
को भेजा गया है।
वर्तमान में खंडवा में कार्यरत डाबर ने पूरे मामले में उपायुक्त मीना
डाबर अपने को अछूता बताते हुये कहा  उनके  खिलाफ कोई एफआईआर नहीं हुई है।
मीना डाबर के  रायसेन में उपायुक्त पद पर रहते हुए  रायसेन जिले की विपणन
सहकारी समिति, उदयपुरा की आधा हेक्टेयर से अधिक भूमि का राष्ट्रीय
राजमार्ग परियोजना के लिए अधिग्रहण से मिली राशि में अनियमितता की। 17
लाख रुपये में खरीदी भूमि को एक करोड़ रुपये से अधिक में खरीदना बताकर
राशि मिलकर बांट ली।
इसी कारण मामले में ततकालीन प्रशासक और प्रबंधक के खिलाफ एफआइआर दर्ज
कराई गई है। वहीं, तत्कालीन उपायुक्त मीना डाबर और आडिट अधिकारी नारायण
सिंह हाड़ा के खिलाफ विभागीय कार्रवाई करने का प्रस्ताव शासन को भेजा गया
है। सहकारिता विभाग के अधिकारियों ने बताया कि राष्ट्रीय राजमार्ग
क्रमांक 12 के लिए विपणन सहकारी संस्था, उदयपुरा की आधा हेक्टेयर से अधिक
भूमि का अधिग्रहण किया गया था।
इसके लिए एक करोड़ 53 लाख रुपये संस्था को मिले। इस राशि से 17 लाख रुपये
में दूसरी जगह भूमि खरीदी गई और इसे एक करोड़ रुपये से अधिक का बताया गया।
साथ ही 70 वर्ष कर्मचारी के वेतन के नाम पर 18 लाख रुपये व्यय होना
बताया।