उपार्जन केंद्रों में ब्याप्त भर्रेशाही दलालो तथा व्यापारियों की चांदी किसान भारी परेशान

पन्ना संवाददाता

पन्ना 5 जनवरी ; अभी तक ;  शासन द्वारा किसानों को उपज का सही मूल्य दिलाने के उद्देश्य से खरीदी केंद्र स्थापित कर शासकीय दर से किसानों की उपज को खरीदने का कार्य शुरू किया लेकिन शासन की योजनाओं को पलीता लगाने के लिए कमर कसकर बैठे कर्मचारी अधिकारी किसानों के फसल उपार्जन योजना को ग्रहण लगाने और अपनी जेब भरने में कोई कसर नही छोड़ रहे। निर्धारित गुणवत्ता के मापदंडों को दरकिनार कर किसान हितैषी अनूठी योजना को अनाज माफियाओ के चंगुल में धकेलकर किसानों के साथ अन्याय किया जा रहा है।

अनाज माफियाओ की बल्ले बल्ले वास्तविक किसानो को उपार्जन केंद्रों पर अनाज माफियाओ का राज चल रहा है,अनाज माफिया किसानों को लालच देकर बड़ी मात्रा में किसानों के पंजीयन किराये से लेकर अमानक गुणवत्ता की धान तौलवाते है। अनाज माफियाओ से खरीदी केंद्र प्रभारियों की लंबी सांठ गांठ होने के कारण इनका गुणवत्ताहीन अनाज पहले तौलकर सिलाई कर दिया जाता जबकि भीड़ का बहाना बनाकर किसानों को हफ़्तों रुकने के लिए विवश किया जाता है।

खरीदी केंद्रों की मॉनिटरिंग न होने के कारण खरीदी केंद्रों पर दलालो के माध्यम से किसानों से पैसो की मांग होना आम नजारा है, धान गुणवत्ता पूर्ण हो तो भी पैसो की मांग और यदि अमानक और घटिया से घटिया धान की भी तौल हो ही जाएगी बशर्ते कीमत बड़ी देनी होगी। वैसे तो उपार्जन केंद्रों की मानीटरिंग के लिए नोडल और सेक्टर अधिकारियों सहित राजस्व से लेकर उपार्जन समिति के सभी आला अधिकारी लगाए गए है किंतु उपार्जन केंद्रों का निरिक्षण ,मानीटरिंग और कार्यवाही के दर्शन आज तक नही हो सके।

जिला उपार्जन समिति के अधिकारी यदा कदा तो भृमण कर ही लेते है लेकिन क्षेत्रीय एस डी एम, तहसीलदार, नोडल सेक्टर अधिकारी खरीदी केंद्रों पर कभी दिखते ही नही शायद इसी वजह से अनाज माफिया और केंद्र प्रभारी मनमानी पर उतारू है। भंडारण केंद्रों में कसावट लाने पर ब्यवस्थाओ में हो सकता है सुधार सूत्रों के हवाले से हासिल जानकारी के अनुसार भंडारण केंद्रों से लेकर खरीदी केंद्र तक दलालो का नेटवर्क सक्रिय है जोकि सेटिंग करवाने में माहिर है ।

नाम गुप्त रखने की शर्त पर खरीदी केंद्र प्रभारी ने बताया कि खरीदी केंद्रों से भंडारण केंद्र जाने वाली धान की गाड़ी को पास करने के लिए गूगल पे के माध्यम से एक गाड़ी का 4 से 5 हजार रुपये भुगतान करना पड़ता है तभी गाड़ी पास होती है वरना गाड़ी रिजेक्ट कर दी जाती है अब हम पैसे कहां से दे जिसकी धान गुणवत्तापूर्ण है वह तो पैसे देता नही इसीलिए अमानक धान खरीदनी पड़ती है। जानकारी के अनुसार खरीदी केंद्रों से जाने वाली धान की गाड़ियों में नीचे और अंदर की छलियो में अमानक घटिया धान डाली जाती है और ऊपर तथा पीछे की छलियो में मानक स्तर की धान ताकि भंडारण केंद्र के गेट में धान की जांच के दौरान अच्छी धान दिखे और ट्रक अंदर पहुंचने पर नीचे की छलियो को अमानक बताकर दलालो के माध्यम से गूगल पे करवाया जाता है जैसे ही गूगल पे हो गया तो रद्दी धान अपने आप अच्छी बन जाती है। यदि भंडारण केंद्रों की सतत मानीटरिंग कर कसावट लाई जाए तो संभव ही नही की उपार्जन केंद्रों में कोई मनमानी हो सके। पैदावर कम होने के बाद भी बम्पर उत्पादन कुछ किसान भी अब ब्यापारी बन गए है  ।

अपनी जमीन रकवे का अधिकतम पंजीयन बनवाकर सस्ते रेट में धान खरीदकर अपने पंजीयनो को भरने में उतारू है, जहां तहां बाहरी धानो के पकड़े गए ट्रक यह स्वयं सिद्ध करते है कि उ प्र सहित अन्य राज्यो की धान पन्ना जिले में बेची जा रही है। यदि धान के बोए गए रकवे और अल्प वर्षा के बाद जहां पैदावार कम होने की संभावना थी तो वही दूषरी तरफ खरीदी केंद्रों में हो रही बम्पर तुलाई बम्पर उत्पादन का उदाहरण बन गई। अन्नदाताओं को भी लालच छोड़कर अपनी वास्तविक उत्पादित फसल को ही बेचना चाहिए वरना किसानों के थोड़े से लालच के कारण खरीदी केंद्र अनाज माफियाओ के चंगुल से बच नही सकते।