उपार्जित मूल्य की राशि किसान को देने में सहकारी बैंक मनमानी पर उतारू

2:50 pm or June 11, 2022

सीधी  से विजय सिंह

सीधी, 11 जून ;अभी तक;   सीएम हेल्पलाइन में शिकायत से क्षुब्ध सहकारी बैंक प्रबंधक ने महिला कृषक का गेहूं का उपार्जन मूल्य का भुगतान रोक दिया है। मामला अपने बेजा कारनामों के लिये जिले में कुख्यात सेवा सहकारी समिति मर्यादित भरतपुर का है। यह तो उदाहरण मात्र है। समिति प्रबंधकों की मनमानी के कारण जिले के सैकड़ों किसान उपार्जन मूल्य के लिये भटक रहे हैं।

       महिला कृषक श्रीमती गिरिजा देवी सिंह ने उपार्जन केन्द्र सेवा सहकारी संस्था भरतपुर में दिनांक 21 मई 22 को 87 क्विंटल 5 सौ 80 ग्राम की बिक्री की। सहकारी संस्था द्वारा अनाज खरीदी की विधिवत पावती प्रदान की गई थी। पावती में स्पष्ट लेख था कि 7 दिवस के भीतर उपार्जन मूल्य 1 लाख 52 हजार 1 सौ 32 रुपये का भुगतान कर दिया जावेगा। एक माह से अधिक समय गुजरने के बाद भी जब कृषक गिरिजा देवी के पोर्टल में पंजीकृत मध्याअंचल ग्रामीण बैंक भरतपुर के खाते में उपार्जित अनाज की राशि नहीं आई तो उन्होंने खोज खबर ली। समिति प्रबंधक द्वारा शासन से समर्थन मूल्य न आने का बहाना  बनाया।

       अंततः महिला कृषक के पुत्र ने सीएम हेल्पलाईन में शिकायत दर्ज कर दीं। हेल्पलाईन में दिनांक 1 जून 22 को शिकायत क्रमांक 17819248 में सेवा सहकारी समिति की सच्चाई ही लिखवाई है। सीएम हेल्पलाईन में शिकायत के बाद से सहकारी बैंक का प्रबंधन अत्यंत नाराज है।

       इसी दरमियान श्रीमती गिरिजा देवी सिंह के पति श्री धिरेश कुमार सिंह का 3 जून को निधन हो गया। अब उन्हें पति के कर्मकांड के लिये भी रुपयों की जरूरत है। किन्तु सहकारी बैंक समर्थन मूल्य पर उपार्जित गेहूं का भुगतान करने में लगातार आनाकानी कर रहा है।