एंटी करप्शन ब्यूरो तक पहुंची काचन बांध के घोटालेबाज अफसर व ठेकेदार की शिकायत

2:27 pm or June 1, 2022
एस पी वर्मा
सिंगरौली एक जून ;अभी तक; जिले की महत्वपूर्ण काचन बांध के नहर लाइनिंग कार्य के नाम पर किये गए करोड़ों रुपये के घोटाले की बू दूर तलक तक जा पहुंची है। कुलमिलाकर काचन नहर लाइनिंग घोटाले का मामला एंटी करप्शन ब्यूरो के राडार पर पहुंचने की बातें सामने आ रही हैं। माना जा रहा है कि एंटी करप्शन ब्यूरो द्वारा मामले को संज्ञान में लेकर यदि गंभीरतापूर्वक कार्यवाही की जायेगी तो तय है कि एक ओर जहां फर्जीवाड़े के आरोपों की जांच में दूध का दूध और पानी का पानी स्पष्ट हो जायेगा, तो वहीं भ्रष्टाचार के प्रति सरकार की सख्ती के मद्देनजर घोटालेबाजों के विरूद्ध संगीन आपराधिक मामलों के तहत प्रकरण दर्ज कर सख्त कानूनी कार्यवाही करते हुए न कि सिर्फ रिकवरी की कार्यवाही सामने आ सकती है, बल्कि रिकवरी के साथ साथ भष्टाचारियों का सलाखों के पीछे पहुंचना भी तय माना जा रहा है।
                          उल्लेखनीय है कि मध्यप्रदेश की शिवराज सरकार ने प्रदेश के कोने कोने में अपराधियों, माफियाओं, लुटेरों के विरूद्ध महाअभियान चला रखा है। लिहाजा संभावनाएं इस बात की हैं कि भ्रष्टाचार तथा अपराध के जरिये हासिल बेनामी संपत्तियों को राजसात करने की कार्यवाही की जा सकती है। इसके अलावा अपराधियों, माफियाओं की ऊंची हवेलियां का भी मामा के बुलडोजर की जद में आना तय माना जा रहा है। चूंकि मामला किसानों, आम नागरिकों, बेजुबान पशु पक्षियों के दाना पानी के साथ साथ उनके जीवन के गुजर बशर तथा उनके मौलिक अधिकारों से जुड़ा हुआ है। इसलिये कानून की आंखों में धूल झोककर आर्थिक अपराध को अंजाम देने वाले जल संसाधन विकास सिंगरौली के जिम्मेदार अफसर तथा सफेदपोश बहुरूपिये ठेकेदार काचन नहर के प्रभावित किसानों तथा आम नागरिकों के साथ छलावा करते हुए आधा अधूरा काम करके सुनियोजित साजिश के तहत सरकारी खजाने को लूटने का काम किया है तो भ्रष्टाचारियों को एक एक पाई का हिसाब भी सरकार को देना पड़ेगा। इसके साथ साथ कानून की आंखों में धूल झोंकने वाले अपराधियों को और भी बुरे अंजाम भी भुगतने पड़ सकते हैं।
                      उधर विभागीय सूत्रों के अनुसार काचन बांध के निर्माण के समय जब से नहर का निर्माण किया गया उसके बाद से चार दशकों के दौरान न तो कभी जीवनदायिनी काचन बांध के नहर का लाइनिंग कार्य हुआ और न ही व्यापक स्तर पर नहर का मेंटेनेंस हुआ। करीब चार दशकों के बाद पहली बार उक्त बांध के नहर की दशा सुधारने का संवेदनशील प्रयास करते हुए मध्यप्रदेश सरकार द्वारा 4.57 करोड़ रुपए के बजट की स्वीकृति प्रदान की गई थी। मध्यप्रदेश जल संसाधन विभाग द्वारा 4.57 करोड़ रुपये की लागत से 23 किलोमीटर की लंबाई युक्त नहर के लाइनिंग कार्य (Lining Work) हेतु निविदा कराई गई। उक्त नहर की लाइनिंग के लिए मध्यप्रदेश सरकार द्वारा जारी बजट तथा नहर लाइनिंग के लिए निर्धारित लागत से 14 प्रतिशत कम दर पर टेंडर डालने वाले ठेकेदार को वर्क एवार्ड करने की औपचारिकताओं को पूरा करते हुए काचन बांध की 23 किलोमीटर लंबी नहर के लाइनिंग कार्य (Lining Work) का ठेका तीन वर्षों तक पूर्ण करने के एग्रीमेंट के साथ जनवरी 2019 में आवंटित कर दिया गया।
                       सिंगरौली जल संसाधन विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा मार्च 2022 तक नहर की 16 किलोमीटर लंबाई के लाइनिंग कार्य (70 फीसदी कार्य) पूर्ण होने के साथ 7 किलोमीटर (30 फीसदी) कार्य शेष रह जाने की जानकारी दी गई है। इसके साथ साथ यह भी जानकारी दी गई है कि ठेकेदार को करीब पौने दो करोड़ रुपये का भुगतान भी कर दिया गया है। शेष 30 फीसदी का भुगतान बांकी होने की जानकारी दी गई है। कुलमिलाकर बकाया 30 फीसदी कार्य का भुगतान बजट के अभाव की वजह से नहीं होने की बात विभागीय अधिकारी द्वारा बताई गई है।
                     जानकारों का मानना है कि किसानों, मजदूरों, गरीबों तथा आम नागरिकों के मौलिक अधिकारों को छीनने वाले माफियाओं, अपराधियों के विरुद्ध मध्यप्रदेश की शिवराज सरकार तथा केंद्र की मोदी सरकार का मेगा अभियान न रूका है और न ही आगे रूकने वाला है। परंतु भ्रष्टाचारियों, माफियाओं के मुद्दे पर मत्वपूर्ण सच्चाई यह भी है कि किसी भी सरकारी क्षेत्र में आर्थिक अपराध/भ्रष्टाचार से जुड़े गंभीर विषयों को लेकर आमतौर पर जनता की ओर से ही तथ्यों के आधार पर उचित मंच पर शिकायत ही नहीं दर्ज कराई जाती है। जिसका परिणाम यह होता है कि एक ओर जहां समाज में भ्रष्टाचार रूपी नासूर मे कमी नहीं हो पा रही है, तो वहीं भ्रष्टाचारी, अपराधी अपने काले कारनामों की सजा से वंचित रह जाते हैं।