एक जून से 30 जून तक मलेरिया निरोधक माह

मयंक भार्गव

बैतूल, 31 मई ;अभी तक;  स्वास्थ्य विभाग द्वारा जिले में 01 जून से 30 जून तक मलेरिया निरोधक माह मनाया जायेगा। इस दौरान जनसामान्य को मलेरिया रोग के प्रति जागरूक किया जायेगा। जागरूकता हेतु मलेरिया रथ मलेरिया प्रभावित ग्रामों के भ्रमण पर रहेगा। रथ में ऑडियो क्लिप के माध्यम से लोगों को जागरूक किया जायेगा। इस रथ में मलेरिया की जांच एवं उपचार की भी व्यवस्था रहेगी।

स्वास्थ्य विभाग ने जनसामान्य से अपील की है कि वे अपने घरों के आस-पास पानी जमा न होने दें, यदि घरों के आस-पास पानी जमा है तो उसकी निकासी अवश्य करें, यदि निकासी संभव न हो तो रूके हुये पानी में जला ऑयल या मिट्टी का तेल छिडक़े ताकि इन जगहों पर मलेरिया फैलाने वाले मच्छर न पनप सकें। सोते समय मच्छरदानी लगायें, मच्छर भगाने वाली क्रीम, क्वाइल या लिक्विड का इस्तेमाल करें, मच्छर मारने हेतु इलेक्ट्रिक रैकेट के इस्तेमाल करें तथा नीम की पत्तियों का धुंआ करें। कोई भी बुखार मलेरिया हो सकता है, अत: बुखार आने पर खून की जांच अवश्य करायें तथा मलेरिया पाये जाने पर नि:शुल्क एवं पूर्ण उपचार आशा कार्यकर्ता, एएनएम से या शासकीय स्वास्थ्य संस्थाओं में प्राप्त करें। बुखार आने पर खून की जांच हेतु आशा कार्यकर्ता, एएनएम से या निकटतम् स्वास्थ्य संस्था में सम्पर्क करें।

जिला मलेरिया अधिकारी श्री जितेन्द्र सिंह राजपूत ने बताया कि मलेरिया संक्रमित मादा एनाफिलीज मच्छर के काटने से फैलता है। मलेरिया का मच्छर गडढ़ों में भरे पानी, नदी के किनारों पर रूके पानी, झरनों, तालाबों एवं घरों के आसपास रूके हुये पानी, हेण्डपम्प के आसपास रूके हुये पानी में पनपता है। मलेरिया बुखार के सामान्य लक्षण हैं- ठंड लगकर बुखार आना, पसीना आकर बुखार उतर जाना, सरदर्द होना, उल्टी होना एवं गंभीर स्थिति में बेहोशी आना। यदि समय पर उपचार न लिया जाये तो व्यक्ति की मृत्यु भी हो सकती है। अत: बुखार आने पर खून की जांच अवश्य करायें एवं मलेरिया पानी जाने पर पूर्ण उपचार अवश्य लें।
मलेरिया न हो इसलिये आवश्यक है, मच्छरों से दूरी बनाये रखें।