एक तो महंगा ईलाज ऊपर से लॉक डाउन में मंहगाई ने मध्यम वर्गीय परिवारों को झकझोर दिया

    ( महावीर अग्रवाल )
मंदसौर २७ मई ;अभी तक;  तूफान के थमने के बाद ही उसके आकलन से ही पता चलता है कि वह कितनी तबाही मचा गया।  यही हाल कोरोना वायरस की महामारी का और इस दौरान बढ़ी महंगाई का है । महंगाई ने भी मध्यमवर्गीय परिवारों को झकझोर कर रख दिया है। मार्च 2020 से लगातार इस वायरस की चपेट में आकर कई अपनी जान गवा बैठे हैं तो कई इलाज से ठीक होकर घरों को गए हैं लेकिन जिन परिवारों के व्यक्ति इसकी चपेट में आकर यह दुनिया छोड़कर चले गए और जो इलाज से ठीक होकर अपने घरों में पहुंचे हैं उनका इस बीमारी के इलाज पर कितना धन खर्च हुआ और अब उन परिवारों की आर्थिक स्थिति कैसी है या इस महामारी की समाप्ति के बाद सरकार द्वारा कराए जाने वाले सर्वे से ही पता चल सकेगा । बहर हाल जो इसके इलाज के लिए दवाइयां ,इंजेक्शन ,ऑक्सीजन पर खर्च की चर्चा है वह तो वाकई में आश्चर्य से कम नहीं है । कितने मध्यम वर्गीय परिवार इसके इलाज पर खर्च की गई राशि से वह गरीबी रेखा के नीचे चले गए हैं या नहीं यह सरकार के सर्वे से पता चल सकेगा लेकिन हां एक एमडी डॉक्टर जो इसकी चपेट में आकर इलाज करवाकर लौटे तो उन्होंने जो खर्च हुई राशि बताइ उससे तो लगता है वाकई में आश्चर्य से कम नहीं है।
                   अस्पतालों को तो कभी यह भरोसा भी नहीं रहा होगा कि 135 करोड़ के देश में इतने लोग कभी किसी वायरस की चपेट में आकर बीमार पड़ जाएंगे कि उनके अस्पताल में उपलब्ध बैड तो ठीक, बरामद और उपलब्ध एंबुलेंस तक में जगह नहीं होगी । अब जनसंख्या की यह चुनौती देश के सामने है।  अब समय आ गया है कि सरकार को यह तो बताना ही होगा कि कितने करोड़ की जनसंख्या का भविष्य उज्जवल है।
                  2020 में कोरोना वायरस बीमारी के इलाज की वैक्सीन विश्व में भारत ने पहले खोज कर और लगे हाथ वाहवाही बटोरने के लिए विश्व के कई देशों को भेजना भी शुरू कर दी जबकि वे सारे देश मिलकर भी भारत की आबादी की बराबरी नहीं कर सकते।  दवाई भेजी वहां तक तो ठीक है लेकिन भारत की जनसंख्या की आवश्यकता को क्यों ध्यान में नहीं रखा गया । अब जब 2021 में कोरोनावायरस की दूसरी लहर का आना  शुरू हुआ तो वैक्सीन को लेकर आवाजें उठी लेकिन वह आवाजें कर भी क्या सकती।  अभी तक मात्र कोई 21 करोड़ से अधिक देशवासियों को ही वैक्सीन लगी है।   जब भारत में वायरस से पीड़ितों की संख्या बढ़ने लगी तो भारत में ही नहीं विश्व में भी चिंता उठी और विश्व के कोई 90 देशों ने जिनकी सभी की आबादी मिला ली जाए तब भी भारत की 135 करोड़ की जनसंख्या के बराबर नहीं होती है ने भारत में वायरस से निपटने के लिए दवाइयां, चिकित्सा सामग्री ,ऑक्सीजन के टैंकर भेजना पर प्रारंभ कर दिए। भारत के लिए  यह गर्व की बात है । मित्र देशों ने भी भारत की मदद कर भारत के साथ उनके रिश्तों को और मजबूत किया है । दूसरी ओर विश्व गुरु भारत की पहली पहल की चमक तो कम हुई होगी ।अब आत्मा से ही एक आवाज उठ रही है कि है कोई माईका लाल जो यह बता सके की यह बीमारी खत्म कब तक होगी।
               भारत की एक बहुत बड़ी कमजोरी यह भी है कि इस देश में मौका पाते ही जमा खोर ,कृत्रिम अभाव व मूल्य वृद्धि वाले जमकर लूट मचाने जैसे हालात पैदा कर देते हैं यही नहीं नकली दवाइयों तक के काम में ऐसे तत्व लग जाते हैं मानो उन्हें अभी लूटने का वक्त मिला है। देश में एक और कोरोना वायरस के प्रहार से जनता परेशान है । सरकार दवाइयां, चिकित्सा पर्याप्त रूप से जनता को उपलब्ध नहीं करवा पा रही है तो दूसरी ओर महंगाई जनता को थोपी जा रही है ।सरकारें और उनकी शासकीय मशीनरी हाथ पर हाथ धरे बैठी है। मान लो कुछ लोगों को अकूत संपत्ति कमाने का अवसर मिला हो । दवाइयां तो ठीक ऑक्सीजन और दवाइयां महंगे दामों पर यहां तो हद हो गई।  करें भी तो क्या ।क्योंकि यह सब कुछ इस देश में ही संभव है ।कौन पकड़े और कौन रोके इस सदी में क्या यह भी एक कलंक नहीं होगा।
               विदेशों से ऑक्सीजन , दवाइयां आने का क्रम शुरू हुआ जिनकी आबादी भारत की तुलना में बहुत ही कम है। यह दवाइयां भी अब मरीजों तक ठीक से पहुंच जाएं यह भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए वरना कहीं यह भी कभी पड़ी पड़ी धूल चाटने की सुर्खियां ना बन जाए।
               सरकार को इस वायरस से जनमानस की सुरक्षा के लिए लॉक डाउन जैसे सुरक्षा के कदम उठाए गए यह तो उचित है यही लेकिन सरकार ने लाक डाउन के साथ ही  यह क्यों नहीं सोचा कि लाक डाउन में महंगाई अपना जाल न फैला दें और उसके लिए सरकारी मशीनरी को पूरी तरह से मुस्तैद करना था लेकिन ऐसा नहीं हुआ और लोगों को मंहगे दामों पर आवश्यक सामान लेने को मजबूर होना पड़ रहा है।  यह इकट्ठा हो रहा काला धन सरकार के लिए भविष्य में कितनी बड़ी चुनौती बनेगा या नहीं यह सरकार जाने।  सरकार को तेल, दाल, चावल आदि में मूल्य वृद्धि के खिलाफ कदम उठाकर जनता को राहत देना चाहिए।