एसएमएस- वाट्सएप से 68 हजार किसानों को दी कृषि विधेयक की जानकारी

महावीर अग्रवाल

बैतूल १७ अक्टूबर ;अभी तक; किसानों के लिए लाभकारी एवं उनके हितों का संरक्षक माना जाने वाले कृषि विधेयक को लेकर कृषि विज्ञान केन्द्र बैतूलबाजार द्वारा 12 से 17 अक्टूबर तक कृषि विधेयक जागरूकता सप्ताह का आयोजन किया जा रहा है। कृषि विज्ञान केन्द्र बैतूलबाजार के प्रमुख डॉ. व्हीके वर्मा के मार्गदर्शन में केव्हीके के कृषि वैज्ञानिकों द्वारा जागरूकता अभियान के तहत किसान मोबाइल संदेश के माध्यम से 67 हजार 582 पंजीकृत किसानों को अपना कृषि उत्पाद अपनी पसंद के स्थान पर बेचने, खरीददारों की संख्या बढ़ाने और अच्छे दाम मिलने से संबंधित जानकारी दी गई। साथ ही विभिन्न वाट्सएप गु्रपों के माध्यम से 1000 किसानों को वन नेशन- वन मार्केट की अवधारणा से भी अवगत कराया गया।

कृषि विज्ञान केन्द्र बैतूलबाजार के प्रमुख एवं वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक डॉ. व्हीके वर्मा की अगुआई में केन्द्र के कृषि वैज्ञानिकों डॉ. संजीव वर्मा, आरडी बारपेटे, श्रीमति रिया ठाकुर एवं इंजीनियर कुमार सोनी द्वारा केव्हीके के अंगीकृत ग्रामों में पहुंचकर जनप्रतिनिधियों, पंचायत प्रतिनिधियों एवं किसानों को कृषि विधेयक की प्रतियां देकर उन्हें विधेयक से होने वाले लाभों के प्रति जागरूक कर रहे है।

कृषि वैज्ञानिकों द्वारा कृषि उपज मंडियों में पहुंचकर किसानों, व्यापारियों, मंडी के अधिकारियों, कर्मचारियों को कृषि विधेयक के प्रावधानों से अवगत कराया गया। कृषि वैज्ञानिकों ने कृषि उपज मंडी से जुड़े लोगों को बताया कि  न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदी जारी रहेगी एवं उपज बेचने के तीन दिनों के भीतर व्यवस्था रहेगी। कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों, व्यापारियों सहित खेती बाड़ी से जुड़े लोगों को बताया कि बेहतर मूल्य पर किसान अपना कृषि उत्पाद अपनी पसंद के स्थान पर बेच सकते है, जिससे खरीददारों की संख्या में बढ़ोत्तरी होगी। कृषि वैज्ञानिकों ने बताया कि आवश्यक वस्तु अधिनियम की सूची से खाद्यान्न, तिलहन एवं दलहन फसलों के साथ प्याज एवं आलू जैसी प्रमुख फसलों को गायब कर दिया है।

कृषि विधेयक जागरूकता अभियान के तहत कृषि वैज्ञानिकों ने कृषि आदान विक्रेताओं, कृषि एवं कृषि से संबंधित विभागों के अधिकारियों सहित मैदानी अमले को भी विधेयक की प्रतियां उपलब्ध कराई गई। जिससे ग्राम पंचायत एवं ग्राम तक कृषि विधेयक की जानकारी ग्रामीण एवं आदिवासी अंचलों के किसानों, मजदूरों एवं व्यापारियों तक पहुंच सके।

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