ओबीसी वर्ग को एजुकेषन तथा प्रोफेषनल पाठयक्रम में अलग-अलग आरक्षण, हाईकोर्ट ने मांगा जवाब

सिद्धार्थ पाण्डेय

जबलपुर ३ सितम्बर ;अभी तक;  एजुकेषन तथा प्रोफेषनल पाठयक्रम में ओबीसी वर्ग के लिए अलग-अलग आरक्षण निर्धारित किये जाने के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की गयी थी। याचिका की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट जस्टिस ए के मित्तल तथा जस्टिस व्ही के षुक्ला की युगलपीठ ने अनावेदकों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। युगलपीठ ने उक्त याचिका की सुनवाई पूर्व में दायर ओबीसी आरक्षण से संबंधित याचिका के साथ करने के निर्देष जारी किये है।

अपाक्स संगठन के भुवनेष्वर कुमार पटेल की तरफ से दायर की गयी याचिका में कहा गया था कि उच्च षिक्षा विभाग ने 31 जुलाई 2020 को दो आदेष जारी किये थे,जो परस्पर विरोधाभासी है। आदेष के अनुसार एजुकेषन पाठयक्रम में ओबीसी वर्ग को 27 प्रतिषत आरक्षण दिया जाय तथा प्रोफेषनल कोर्स में 14 प्रतिषत आरक्षण दिया जायेगा। ओबीसी आरक्षण को दो पैरामीटर में बांटा गया है,जो अवैधानिक है।

याचिका में कहा गया था कि आरक्षण अधिनियम 1994 मेें संषोधन कर ओबीसी आरक्षण को 14 प्रतिषत से बढाकर 27 प्रतिषत कर दिया है। विधानसभा में 18 जुलाई 2019 को सहमति के साथ उक्त संषोधन पारित किया गया था। जिसके प्रवर्तन में हाईकोर्ट ने किसी प्रकार का स्थगन आदेष पारित नहीं किया है। हाईकोर्ट की युगलपीठ ने पीजी नीट परीक्षा में ओबीसी आरक्षण 27 प्रतिषत किये जाने का स्थगन आदेष जारी किये है। उक्त आदेष के आधार पर ओबीसी वर्ग को 27 प्रतिषत आरक्षण से वंचित नहीं किया जा सकता है।

याचिका में प्रमुख सचिव सामान्य प्रषासन विभाग,उच्च षिक्षा विभाग,ओबीसी-अल्पसंख्यक कल्याण विभाग सहित महाधिवक्ता कार्यालय को अनावेदक बनाया गया है।युगलपीठ ने उक्त आदेष के साथ याचिका पर अगली सुनवाई 23 सितम्बर को निर्धारित की गयी है। याचिकाकर्ता की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता नमन नागरथ तथा अधिवक्ता रामेष्वर सिंह ठाकुर ने पैरवी की।

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