ओबीसी वर्ग को 27 प्रतिषत आरक्षण देने पर रोक बरकरार

सिद्धार्थ पांडेय

जबलपुर २ नवंबर ;अभी तक; ओबीसी वर्ग को 27 फीसदी आरक्षण दिये जाने के संबंध में दायर लगभग दो दर्जन याचिकाओं की सुनवाई हाईकोर्ट के कार्यवाहर चीफ जस्टिस संजय यादव व जस्टिस व्ही के षुक्ला की युगलपीठ द्वारा की गई। सुनवाई के दौरान सरकार ने युगलपीठ के समक्ष एसटी,एससी तथा ओबीसी वर्ग के कर्मचारियों का डाटा पेष करते हुए उक्त निर्णय को विधिसम्मत करार दिया। युगलपीठ ने डाटा की प्रति सभी पक्षकारों को प्रदान करने के निर्देष देते हुए अगली सुनवाई 9 दिसम्बर को निर्धारित की गयी है। युगलपीठ ने प्रदेष में ओबीसी आरक्षण 14 प्रतिषत पर यथास्थिति के आदेष बरकरार रखे है।

उल्लेखनीय है कि प्रदेश सरकार द्वारा ओबीसी आरक्षण 14 प्रतिशत से बढाकर 27 प्रतिशत किये जाने के संबंध में अशिता दुबे सहित  लगभग 2 दर्जन याचिकाएं हाईकोर्ट में दायर की गयी थी। याचिकाकर्ता अशिता दुबे की याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने चिकित्सा शिक्षा क्षेत्र में ओबीसी वर्ग को 14 प्रतिशत आरक्षण दिए जाने के अंतरिम आदेश हाईकोर्ट ने 19 मार्च 2019 को जारी किये थे। युगलपीठ ने पीएससी द्वारा विभिन्न पदों की परीक्षाओं की चयन सूची में भी ओबीसी वर्ग को 14 फीसदी आरक्षण दिए जाने का अंतरिम आदेश पारित किये थे।

याचिका की सुनवाई के दौरान  सरकार की तरफ से पेष किये गये जवाब में कहा गया था कि प्रदेश में  51 प्रतिषत आबादी  ओबीसी वर्ग की है। ओबीसी, एसटी, एससी वर्ग की आबादी कुल 87 प्रतिषत है। याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि सर्वोच्च न्यायालय की 9 सदस्यीय पीठ  ने  इंदिरा साहनी मामले में स्पष्ट आदेश दिए हैं कि आरक्षण 50 प्रतिषत से अधिक नहीं होना चाहिए। दायर याचिकाओं में ईडब्ल्यूएस आरक्षण तथा न्यायिक सेवा में 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण,महिला आरक्षण दिए जाने की मांग की गयी थी। याचिका में कहा गया था कि ईडब्ल्यूएस आरक्षण लागू करने से प्रदेश में  60 प्रतिषत आरक्षण प्रभावी हो जाएगा।

याचिका पर सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान सरकार द्वारा उक्त डाटा पेष कया गया। युगलपीठ ने रिज्वाइंडर पेष करने सभी पक्षकारों को डाटा की प्रति प्रदान करने के निर्देष दिये है। न्यायिक क्षेत्र में 27 प्रतिषत ओबीसी आरक्षण की मांग संबंधित दायर याचिका ग्वालियर बैंच से मुख्यपीठ स्थानातंरित की गयी थी। युगलपीठ ने उक्त याचिका पर नोटिस जारी करते हुए न्यायिक क्षेत्र में ओबीसी आरक्षण संबंधित याचिकाओं की सुनवाई पृथक से करने के निर्देष दिये है। सुनवाई के दौरान सरकार की तरफ से महाधिवक्ता पुष्पेंद्र कौरव तथा याचिकाकर्ताओं की तरफ से  अधिवक्ता आदित्य संघी अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ने पैरवी की।

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