करोना के खौफ पर नक्सली पड रहे भारी

रजेन्सर तिवारी

जगदलपुर; 24 सितंबर ;अभी तक; छत्तीसगढ़ के सर्वाधिक उग्रवाद प्रभावित बस्तर में फैली कोरोना महामारी के बावजूद नक्सली हिंसा थमने का नाम नहीं ले रही है। नक्सलवादियों के लगातार बढ़ते दबाव के बाद पुलिस भी अपनी रणनीति में परिवर्तन करने पर विचार करने लगी है। ज्ञात हो कि पिछले एक पखवाड़े में दक्षिण पश्चिम बस्तर में नक्सलवादियों द्वारा आधा दर्जन से ज्यादा लोगों की हत्या की जा चुकी है।

पिछले मार्च माह में बस्तर में लागू किए गए लॉकडाउन के बाद कई पुलिस अधिकारियों द्वारा यह दावा किया गया था कि नक्सली अपने सहयोगियों को  छापामार दस्ते से अलग कर रहे हैं ।पुलिस अधिकारियों द्वारा इस दावे के संबंध में आधार के रूप में कोरोना महामारी के बढ़ते प्रकोप को बताया गया था। बस्तर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक सुंदर राज पी. ने स्थानीय मीडिया से चर्चा के दरम्यान यहां तक कह डाला था कि  नक्सली कमांडर कोरोना महामारी से बचने के लिए अपने कैडर से अलग हो रहे हैं। दूसरे शब्दों में महामारी के बढ़ते प्रकोप के कारण नक्सलियों के बीच बिखराव प्रारंभ हो गया है। लेकिन बस्तर के सबसे बड़े पुलिस अधिकारी के इस बयान के बाद कुछ दिनों तक तो नक्सलवादी शांत रहे ,लेकिन इसके बाद फिर हिंसा फैलने लगी। यद्यपि भारी बरसात और करोना महामारी के बावजूद पुलिस ने भी अपना नक्सल विरोधी ऑपरेशन बंद नहीं किया है किंतु यह स्पष्ट हो गया है कि कोरोना महामारी से नक्सलियों के बजाय पुलिस और अर्धसैनिक बलों के जवान ज्यादा प्रभावित हुए हैं।

दंतेवाड़ा जिले में पुलिस अधीक्षक के रूप में सर्वाधिक सफल ऑपरेशन चलाने वाले पुलिस अधिकारी कमलोचन कश्यप इन दिनों बीजापुर के पुलिस अधीक्षक के रूप में कार्य कर रहे हैं। श्री कश्यप का कहना है कि दंतेवाड़ा जिले की बजाए बीजापुर जिले की स्थितियां भिन्न है।  देर सबेर बस्तर में नक्सली हिंसा पर अंकुश लगाने में पुलिस  कामयाब हो जाएगी।  दूसरी तरफ सच्चाई यह है कि बस्तर आज भी नक्सलियों का गढ़ बना हुआ है।  कुछ अन्य पुलिस अधिकारियों ने अपना नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर बताया कि दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी के क्षेत्र में बस्तर के सभी सात जिले आते हैं। तेलंगाना उड़ीसा तथा महाराष्ट्र के भी कुछ हिस्से दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी के अंतर्गत आते हैं। नक्सली नेता रमन्ना के बाद अभी तक घोषित रूप से डीकेएस का कोई कमांडर नियुक्त नहीं किया गया है। बगैर कमांडर के भी इस क्षेत्र में नक्सलियों का उत्पात दिन प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है। तेलंगाना, उड़ीसा तथा महाराष्ट्र के बजाय नक्सली छत्तीसगढ़ के बस्तर पर पहले की तरह फोकस बनाए हुए हैं।

इन अधिकारियों का दावा है कि पश्चिम बंगाल में मारे गए नक्सली नेता किशनजी की पत्नी सुजाता इन दिनों बस्तर में नक्सली हिंसा का पर्याय बन चुकी है । इसी प्रकार नक्सली नेता पापा राव, हिडमा, चैतू उर्फ श्याम जी के द्वारा भी बस्तर में लगातार हिंसा फैलाई जा रही है। पुलिस द्वारा आए दिन एनकाउंटर किए जाते हैं या फिर आत्मसमर्पण कराया जाता है किंतु इन बड़े  नक्सली नेताओं को पुलिस छू तक नहीं पा रही है । इस वजह से कोरोना महामारी के बावजूद नक्सली हिंसा  बस्तर में  जारी है।

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