कलेक्टर ने छात्र छात्राओं से कहा, हमें लाइफ में सफल होने के लिए एक नई एबीसी प्लान बनाना चाहिए

भिंड से डॉक्टर रवि शर्मा

भिंड २८ मई ;अभी तक; कोरोना संक्रमण काल में बच्चों के लिए शुरू किए गए ऑनलाइन बाल विमर्श कार्यक्रम में दूसरे रोज कलक्टर डॉ सतीश कुमार ऐसे अधिकांश छात्र-छात्राओं ने सवाल किया कि हमें आईएएस बनने के लिए क्या करना चाहिए कैसे पढ़ाई करें और कितने समय पढ़ाई करें । इसका जवाब देते हुए कलेक्टर ने कहा हमें लाइफ में सफल होने के लिए एक नहीं बल्कि नाम एक प्लान भी उसी निर्धारित करना चाहिए इसके बाद तैयारी के लिए समय का निर्धारण किया जा सकता है ।

सवाल-जवाब के क्रम में छात्रा वैष्णवी ने सवाल किया कि लीगल काम यदि आरक्षण की वजह से रुके तो क्या करना चाहिए इसके उत्तर में कलेक्टर ने कहा हमें किसी भी प्रकार के कार्य के लिए रिश्वत नहीं देना चाहिए और यदि कहीं ऐसा दिखाई देता है तो आप मुझसे शिकायत पर कलेक्टर ने कार्टून फिल्म का उदाहरण देकर बताया कि जीवन में सफल होने का सूत्र कुछ यानी आपके अंदर ही है कलेक्टर ने कहा खुद और मातृभूमि पर जरूर कर करें बच्चों से कलेक्टर ने कहा कि हम सबको खुद के साथ ही अपनी मातृभूमि पर गर्व करना सीखना चाहिए ।

भिंड जिले के संदर्भ में उन्होंने कहा कि यह वीरों की भूमि है यहां के लोगों में सेना में भर्ती होने की ललक रहती है उन्होंने कहा चंबल घाटी के विकास की अपार संभावनाएं हैं जहां का चंबल अभ्यारण और चंबल नदी में पाई जाने वाली डॉल्फिन घड़ियाल विश्व भर के लोगों को पर्यटन के लिए आमंत्रित करते हैं यही नहीं यहां का गौरी सरोवर अटेर का किला आलमपुर की छतरियां पौधों का30 जाटों का किला देश विदेश के लोगों को यहां की अनुपम छटा दिखाती है हमारी बेहद खूबसूरत है दुनिया में जो अनुभव वही तो जिंदगी है ।

कलेक्टर भिंड सतीश कुमार ने कहां कोरोना के संदर्भ में कलेक्टर ने कहा कि हमने ऐसी महामारी देखी और न सोशल डिस्टेंसिंग आइसोलेशन जैसे शब्द सुने सुना है 100 साल पहले स्पेनिश फ्लू नामक महामारी फैली थी जिसमें विश्व के 5:30 करोड़ लोग प्रभावित हुए थे उन्होंने कहा कि कोरोना हम इससे लड़ेंगे और इसे जीतकर दुनिया के आगे बढ़ेंगे हमें आगे बढ़ने से दर्दyahoo.com हो या नींद नहीं रोक सकती और सफल होने वालों को अपमान करके कोई रोक नहीं सकता है इस दुनिया का जो अनुभव है वही तो जिंदगी है कार्यक्रम की अध्यक्षता सुनील अग्रवाल ने की कार्यक्रम के संयोजक मनीष ओझा ने रुपए का स्पष्ट थी