कलेक्टर बुरहानपुर का अभिनव प्रयास प्रोजेक्ट मुस्कान

7:17 pm or June 1, 2022

मयंक शर्मा

बुरहानपुर  01 जून, ;अभी तक; – प्रोजेक्ट मुस्कान की शुरुआत कलेक्टर श्री प्रवीण सिंह के निर्देशानुसार जिले में एक अभिनव प्रयास के रूप में की जा रही है। प्रोजेक्ट मुस्कान का मुख्य उद्देश्य जिले के चिन्हांकित लगभग 2500 कुपोषित बच्चों को सामान्य श्रेणी में लाना है। यह प्रोजेक्ट सधन मॉनिटरिंग के साथ तीन माह तक चलाया जाएगा जिसमें महिला बाल विकास विभाग तथा स्वास्थ्य विभाग का अमला संयुक्त रूप से कार्य करेगा।
कलेक्ट्रेट कार्यालय सभाकक्ष में कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी श्री प्रवीण सिंह की अध्यक्षता में प्रोजेक्ट मुस्कान के तहत एसएएम व एमएएम बच्चों के स्वास्थ्य में सुधार के संबंध मंे बैठक आयोजित की गई। बैठक में जिला कार्यक्रम अधिकारी महिला एवं बाल विकास विभाग श्री सुमन कुमार पिल्लई, सीएमएचओ डॉ सिसोदिया, परियोजना अधिकारी, सुपरवाईजर सहित महिला बाल विकास एवं स्वास्थ्य विभाग के अन्य अधिकारीगण व कर्मचारीगण उपस्थित रहे।

कलेक्टर श्री सिंह ने बैठक में उपस्थित अधिकारियों व कर्मचारियों को प्रोजेक्ट मुस्कान के तहत कार्य करने हेतु निर्देशित किया। प्रोजेक्ट मुस्कान के अंतर्गत कुपोषण दूर करने के लिए बच्चों के लिए एक विशेष फूड तैयार किया गया है न्यूट्रीमिक्स पाउडर, जो 400 ग्राम का पैकेट है यह प्रत्येक बच्चों को 15 दिवस तक दिया जाएगा इसके साथ ही आवश्यक दवाइयां, पर्याप्त आहार के माध्यम से बच्चों की देखभाल की जायेगी तथा उन्हें सामान्य श्रेणी में लाने हेतु पूर्ण प्रयास किया जायेगा। जिला कार्यक्रम अधिकारी श्री सुमन कुमार पिल्लई ने जानकारी देते हुए बताया कि बच्चों को सामान्य श्रेणी में लाने हेतु निम्नानुसार कार्यवाहियाँ दिनांकवार तैयार की गई हैं।
कलेक्टर श्री सिंह ने समस्त परियोजना अधिकारियों तथा आरबीएसके डॉक्टर्स को निर्देशित किया कि प्रोजेक्ट मुस्कान के तहत दिनांकवार की जाने वाली कार्यवाहियों को समय से करना सुनिश्चित करें तथा यह कार्य प्राथमिकता के साथ किया जाए। बच्चों का स्वास्थ्य सर्वाेपरि हैं। स्वस्थ बच्चे ही हमारे देश की पहचान है वही हमारे देश का भविष्य हैं।
बैठक में निर्देशित किया गया है कि स्वास्थ्य अमला तथा महिला बाल विकास का अमला संयुक्त रूप से शुरुआती 10 दिवसो में फील्ड पर भ्रमण करेंगे तथा बच्चों की स्क्रीनिंग करेंगे साथ ही आवश्यकतानुसार एसएएम बच्चों को एनआरसी केंद्र में भर्ती कर उनकी देखभाल करना सुनिश्चित करेंगे तथा शेष बच्चों को समुदाय में ही रखकर उपचार करेंगे।

समस्त परियोजना अधिकारी तथा चिकित्सक प्रत्येक दिवस की गतिविधि को मॉनिटरिंग करेंगे तथा किसी प्रकार की समस्या आने पर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी तथा जिला कार्यक्रम अधिकारी महिला एवं बाल विकास को अवगत कराना सुनिश्चित करेंगे।