कांग्रेस की आपसी कलह के चलते अरुण यादव ने चुनाव लड़ने से मना कर दिया

मयंक शर्मा

खंडवा,5  अक्टूबर,अभीतक  । खंडवा संसदीय उपचुनाव में कांग्रेस की आपसी कलह के चलते पूर्व
सांसद और पीसीसी चीफ रहे अरुण यादव ने चुनाव लड़ने से मना कर दिया।
हालांकि उन्होंने यह कहके इंकार किया की वह पारिवारिक कारणों के चलते
चुनाव नहीं लड़ना चाहते।
मंगलवार को कांग्रेस ने खंडवा लोकसभा के लिए अपने उम्मदवार की घोषणा की
तो सभी हक्केबक्के रह गए। कांग्रेस ने खंडवा लोकसभा के लिए ठाकुर राज
नारायण सिंह  को उम्मीदवार बनाया है। राज नारायण सिंह पूर्व संासद अरुण
यादव के धुर विरोधी माने जाते हैं।
ठाकुर राज नारायण सिंह  तीन बार विधायक रह चुके हैं। उन्हें राजनीती का
अच्छा अनुभव भी हैं। वे कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह के बेहद
करीबी हैं। इस टिकट की दौड़ में सभी को पछाड़ कर उन्होंने लम्बे समय बाद
फिर से 70 साल की उम्र में उन्होने कां्रेस राजनीति का क्षत्रप होने का
अपना दम दिखाया हैं।
कमलनाथ सरकार गिरने के बाद मांधाता कांग्रेस से विधायक रहे नारायण पटेल
ने अचानक कांग्रेस से इस्तीफा देकर भाजपा का दमन थम लिया था। उस समय हुए
विधानसभा उपचुनाव में कमलनाथ ने ठाकुर राज नारायण सिंह के पुत्र उत्तमपल
सिंह  को टिकट देकर मांधाता से कांग्रेस का उम्मीदवार बनाया था हालांकि
उत्तमपाल यह चुनाव नारायण पटेल से हार गए। अब एकबार फिर कांग्रेस ने
लोकसभा उपचुनाव में पिता पर दाव खेला हैं। लोकसभा चुनाव में हमेशा से
ठाकुर लॉबी का वर्चस्व रहा हैं। माना जारहा हैं कांग्रेस ठाकुर और दरबारो
को साध कर उपचुनाव जीतने का पूरा प्रयास करेंगी।राज नारायण सिंह पहले भी
कांग्रेस नेता अरुण यादव के खिलाफ खुलकर बोले थे ।खंडवा में आयोजित
राजपूत समाज के सम्मेलन में ठाकुर राजनारायण सिंह और कांग्रेस नेता
अवधेशसिंह सिसोदिया ने कांग्रेसनेता अरुण यादव पर कई आरोप लगाए थे ।
दोनों ही नेताओं ने तत्कालीन लोकसभा चुनाव में भाजपा प्रत्याशी स्वर्गीय
नंदकुमारसिंह चैहान की जीत का श्रेय समाज की एकजुटता को देते हुए पुरानी
गलती सुधारने की बात भी कही थी ।
पूर्व विधायक रहे ठाकुर राजनारायण सिंह को विधानसभा चुनाव में टिकट नहीं
मिलने से उन्होंने खुलकर कांग्रेस की मुखालिफत की थी लेकिन कांग्रेस के
गुर्जर नेता नारायण पटेल वियी रहे लेकिल भाजपा के सत्तासीन होे ही नारायण
पटेल पलटी मारकर भाजपा का दामन थाम गये। ठाकुर राजनारायण सिंह कांग्रेस
के वरिष्ठ नेता है जो तीन  बार मान्धाता (पूर्व में निमाड़खेड़ी ) विधानसभा
क्षेत्र से प्रतिनिधित्व कर चुके है।
उन्हें लोस उपचुाव का टिकट मिलने पर पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अरुण यादव ने
भी बधाई एवं शुभकामनाये दी है । चुनाव मिलजुलकर लड़ने के लिए आश्वस्त भी
किया है।
जारी है भाजपा में घमासान…
इधर भाजपा ने अभी अपना प्रत्याशी घोषित नहीं किया है।  पूर्व सांसद
नंदकुमार सिंह चैहान के पुत्र हर्षवर्धन सिंह चैहान ,पूर्व मंत्री
श्रीमती अर्चना चिटनीस और पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष ज्ञानेश्वर पाटिल का
भी नाम पेनल मे है।मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चैहान की पहली पसंद हर्षवर्धन
चैहान ही थे ,सहानुभूति के चलते उन्हें उनकी जीत का भरोसा भी था लेकिन
टिकट मंथन में हर्षवर्धन का पिछले स्याह इतिहास के कुछ पन्ने सामने आने
के बाद शिवराज भी ठिठक गए है। इस स्थिति में उन्होंने नंदकुमार सिंह
चैहान के ही विश्वासपात्र ज्ञानेश्वर पाटिल पर भी सहमति जताई है। पूर्व
मंत्री अर्चना चिटनीस भी संघ और पार्टी हाईकमान में गहरी पकड़ रखती है
इसलिए उन्हें नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता।
भाजपा की पेनल में तीनों दावेदार बुरहानपुर जिले  के है वही कांग्रेस ने
कांग्रेस से खंडवा जिले के ठा राजनारायणसिंह काउम्मीदवार बनाया है। अतः
चुनाव में खण्डवा बनाम बुरहानपुर का मुद्दा हावी होने का खतरा है।खण्डवा
संसदीय क्षेत्र का लम्बे समय तक प्रतिनिधित्व बुरहानपुर के नेताओ ने किया
जिससे खण्डवा उपेक्षित ही रहा। बुरहानपुर से परमांनदजी गोविंजीवाला
,ठाकुर शिवकुमार सिंह ,ठाकुर महेंद्र सिंह ,अमृतलाल तारवाला और नंदकुमार
सिंह चैहान खण्डवा सीट के सांसद रहे जबकि पूरे संसदीय इतिहास में खण्डवा
से बाबूलाल तिवारी के बाद यह मौका सिर्फ कालीचरण सकरगाए को ही मिला। इस
बीच खरगोन के नेताओं के हाथ भी  क्षेत्र की बागडोर चली गई ।लेकिन खण्डवा
हाशिये पर ही रहा। अब राजनारायण सिंह के रूप में लम्बे अरसे बाद खण्डवा
से प्रत्याशी कांग्रेस ने दिया है।
अच्ेछ दिन, 15 लाख का प्रति परिवार देने का प्रलोभन  शिगूफा साबित के
अलावा बढ़ती महंगाई भी भाजपा की जीत में रोढ़े है जिसे पार करने के लिए उसे
ज्यादा पसीना बहाना पड़ेगा।  गौरतलब है कि कांग्रेस के पास यहाँ खोने को
कुछ नहीं है लेकिन भाजपा यहाँ अपनी सीट खो देती है तो उसके लिए यह भारी
मुश्किलें पैदा कर सकती है। यही कारण है कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह के
खण्डवा संसदीय क्षेत्र में पिछले दिनों हुए सघन दौरों ने यह साफ संकेत
दिए है कि यह सीट स्वयं उनके लिए प्रतिष्ठा का ही ही नहीं राजनैतिक
भविष्य का भी प्रश्न होगा।