कांग्रेस ने खडवा लोस सीट के उपचुनाव के लिये राजनारयण सिंह पर दांव खेला।

मयंक शर्मा
खंडवा,5 अक्टूबर,अभीतक  । खंडवा लोकसभा सीट के उपचुनाव के लिये ं कांग्रेस ने पूर्व विधायक
ठा राजनारायणसिंह(70)  को उम्मीदवार घोषित कर दिया है। कांग्रेस ने 15
साल बाद किसी सामान्य सीट पर सामान्य उम्मीदवार को ही टिकट दिया है।
मांधाता(निमाडखेडी) विस क्षेत्र से तीन बार क्रम्रश 1984, 1998 व 2003 के
विस चुनाव में विजयी रहे है।  राजनारायण के सामने वर्तमान कांग्रेस संगठन
चुनौती है । पिछले 1990 के बाद के चुनावो व इसकी रणनीति व निंरतर मिल रही
पराजय के प्रष्ट उल्टे तो  भाजपा का यह आरोप अधिक सही ठहरता हे कि भाजपा
में चुनाव संगठन लडता है तो कांग्रेस में स्वयं प्रत्याशी व उसके
समर्थक।गुटबाजी व अंर्तख्ंछता के ग्रस्त  संगठन औपचारिता ही निभाता है।तो
भीतरघात के काारण उम्मीदवारी तय होते ही प्रत्याशी की हार का डंका बजने
लगता है।
कांग्रेस उम्मीदवार के पक्ष में सजातीय वोटो की केमेस्टी लाभ दे सकती है
वहीं मुस्लिम व अजा अजजा वोटर सहायक होगे। प्रदेश राजनीति में भारतसिंह ं
अर्जुनसिंह और दिग्विजयसिंह राहुलसिंह के समथ्रक माने जाते है। े
राजनारायणसिंह की पहली बार संसदीय राजनीति में एंट्री हुई है। हालांकि,
2019 के मांधाता उपचुनाव में कांग्रेस ने उनके बेटे उत्तमपालसिंह को ही
टिकट दिया था, लेकिन भाजपा के नारायण पटेल के सामने 22 हजार वोटों से हार
मिली। कांग्रेस से सिर्फ अरुण यादव ने 2009 खंडवा लोकसभा सीट पर ं चुनाव
जीता था।
11वी लोकसभा से भाजपा के नंदकुमारसिं चैहान के केन्द्र राजनीति में्रवेश
हुआ ओर 1996 सहित  पांच सालों में तीन लोस चुनाव 96 98 व 99 के चुनााव
जीतकर उन्होने अपने का निमाड की राजनीति का क्षत्रप घोषित किया। 2004 का
लोस चुनाव भी जीता लेकिन 2009 में वे पार्टी में गुटबाजी के शिकार हुये
और अपने जीवन के चुनावों में अपवाद स्वयप उन्हें होर मिली। लेकन 2014
मेंवापसी कर गये औ 2019 का चुनाव जीतकर 6ठी बार लोकसभा पंहुचे लेकिन
कोराना संक्रमित होने से मार्च 2021 में दुनिया को अलविदा कर गये। उनके
निधन से रिक्त सीट के लिये उपचुनाव हो रहा हे।
ृृ कांग्रेस उम्मीदवार राजनारायणसिंह  विकास के मायने में अपने विस
क्षेत्र तक ही सीमित रहे है।दिग्विजय सरकार में उन्होंने मांधाता के
अलावा खंडवा, बड़वाह विधानसभा क्षेत्र में सामाजिक कार्य किए है। यहीं वजह
है कि उनके नाम (राजनारायणसिंह) के साथ पैतृक गांव (पुरनी) का जोडकर
पहचान बनी।
भाजपा से उम्ीदवार की घेाषणा शेष है। नंदू भैयया के पुत्र  हर्ष तथा
पूर्व मंत्री अच्रना चिटनीस दावेदार है। भाजपा में इनमे से उम्मीदवार चयन
टेडी खीर है क्योंकि पिठला बुरहानपुर सीट से विस चुनाव मे उनकी हार का
कारण नंदू भैरूया का गुट ही कहा जाता है।नदंू भैयया व चिटनीस की ुटबाजी व
अर्तद्वदंता जगजाहिर है।2014 मं नंदू भैयया तो चिटनीस को अपने पक्ष में
लाने में कामयाब रहे लेकिन प्रतिफल देने का मौका आया तो चिटनीस को पराजय
झेलनी पडी।अब नंदू भैयया  नहीं रहे है अत भाजपा की राजनीति में अर्चना
चिटनीस व विजय शाह केन्द्र में है। हर्ष अपने पिता की ासजनैतिक विरासत
सम्हाल पायेगें इसमे संशय अधिक है। इससे अधिक भाजपा को प्रत्याशी चयन
मेें तालमेल बैठाना मुश्किलपड रहा हे और खतरा 2009 का लोकसभा चुनाव
परिणााम की पुनाव1त्ति जोखिम भरी हो सकती है। यही कारण है कि विकल्प में
तीसरे चेहरे की भाजपा को तलाश है।