कांग्रेस से पूव्र विधायक ठा राजनारायणसिंह व भाजपा से जिला पंचायत के पूर्व अध्यक्ष ज्ञाानेश्वर पाटिल के मैदान में उतरने से मुकाबला कंांटे का।

मयंक शर्मा

खंडवा ७ अक्टूबर ;अभी तक;  खंडवा  संसदीय उपचुनाव में भाजपा की तरफ से जिला  पंचायत के पूर्व
अध्यक्ष ज्ञानेश्वर पाटिल को उम्मीदवार घोषित किया है।  बुध्वार देर
रात घोषणा के बाद उम्मीदवार की दौड से सशक्त दावेदार अर्चना चिटनीस
हर्षवंर्धन चैहान बाहर हो गये है। यह आंशका भी निरथ्रक रही कि प्रत्याशी
संसदीय क्षेत्र के बाहर होगा। भाजपा पूर्व सीएम कैलाश जाशी के पुत्र व
मप्र केबीनेट मेंत्री दीपक जोशी पर दांव खेल सकती थी लेकिन उन पर ध्यान
ही नहीं दिया गया । देवास जिले का बागली विस क्षेत्र खंडवा सीट का हिस्सा
है। चार जिलों में पसरा खंडवा संसदीय क्षेत्र में खरगौन जिला का बडवाह
भीकनगांव बुरहानपुर जिले का नेपानगर ओर बुरहानपुर एवं खडवा जिले की 4
में से 3 विस क्षेत्र मांधाता पंधाना व खंडवा भी शामिल है। मप्र केबीनेट
मंत्री  विजय शाह का निर्वाचन क्षेत्र हरसूद पडौसी संसदीय क्षेत्र बैतूल
में शाामिल है और विजय शाह हरसूद की विरासत अपने पुत्र के हवाले कर स्वयं
बैतूल संसदीय क्षेत्र स चुनाव लडकर केन्द्र की राजनीति का दिवस्वपन
संजोये हुये है।अत उन्होने खंडवा संसदीय सीट से अपना दावा पीछे रखकर अपना
राजनैतिक भविष्य को सुरक्षित रख्ना बेहतर समझा हैं।खंडवा लोकसभा सीट
अनारक्षित है लेकिन बेतूल सीट अजजा के लिये आरक्षित है।ृृ
                प्रदेश में एक लोकसभा और तीन विधानसभा उपचुनाव के लिए 8 अक्टूबर तक
नामांकन दाखिल किए जाएंगे। कांगेस भाजपा ने चारों सीटों पर अपने अपने
उम्मीदवार घोषित कर दिए हैं। बीजेपी के प्रत्याशियों के नाम बुधवार आधी
रात को फाइनल किए। इनकी औपचारिक घोषणा गुरुवार नवरात्र के आंरभ दिवस होगी
और इसी दिन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चैहान और प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा
दोपहर 1 बजे खंडवा में ज्ञानेश्वर पाटिल के नामाकंन दाखिल के दौरान मौजूद
रहेंगे।
सूत्रों ने बताया कि खंडवा लोकसभा सीट पर दो प्रमुख नामों पर भी सहमति
नहीं बन पाई। ऐसे में पैनल में ज्ञानेश्वर पाटिल राजपाल सिंह तोमर
भाजपा जिलाध्यक्ष सेवादास पटेल का नाम दिया गया था। हालांकि प्रदेश संगठन
इस सीट पर ओबीसी ;अन्य पिछड़ा वर्गद्ध के उम्मीदवार को मैदान में उतारना
चाहती है। ऐसे में ज्ञानेश्वर पाटिल का नाम पर मोहर लगाई गयी।
सन 1979 में तत्कालीीन संासद परमानंद गोविन्दजी वाला की दिल्ली मे सडक
दुर्घटना में मौत के बाद हुये संसदीय उपचुनाव के 46 साल बाद अब सांसद
नंदकुमारसिंह चैहान के निधन के बाद रिक्त सीट के लिये यह उपचुनाव हो रहा
है।
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खंडवा सीट पर अब तक हुये चुनाव उक नजर मेे
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वर्ष विजयी उम्मीदवार पार्टी
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1952 बाबूलाल तिवारी!खंडवा। कांग्रेेस
1957 बाबूलाल तिवारी !खंडवा। कांग्रेस
1961 महेशदत्त मिश्र !जबलपुर! कांग्रेस
1967 पं गगंगाचरण दीक्षित!बुरहानुप। कांग्रेस
1971 पं गगंगाचरण दीक्षित!बुरहानुप। कांग्रेस
1977 परमानंद गोविन्दजीवाला!बुरहानपुर। जपा
1979 कुशाभाउ ठाकरे ध्भोपालध् जपाध्उपचुनावध्
1980 ठा शिवकुमारसिंह ध्बुरहानपुरध् कांग्रेसध्एकाएक इस्तीफाध्
1984 पं कालीचरण सकरगायेंध्खंडवाध् कांग्रेस
1989    अमृतलाल तारवाला ध्बुरहानपुरध् भाजपा
1991 ठा महेन्द्रसिंह ध्बुरहानपुरध् कांग्रेस
1996 नंद कुमारसिंह चोहानध्बुरहानपुरध् भाजपा
1998 नंद कुमारसिंह चोहानध्बुरहानपुरध् भाजपा
2004 नंद कुमारसिंह चोहानध्बुरहानपुरध् भाजपा
2009 अरूण यादव ध्खरगौनध् कांग्रेस
2014 नंद कुमारसिंह चोहानध्बुरहानपुरध् भाजपा
2019 नंद कुमारसिंह चोहानध्बुरहानपुरध् भाजपा
2021 ध्उपचुनाव  30 अक्टूबर को
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खंडवा संसदीय क्षेत्र में 2019 तक 17 चुनाव में कांग्रेस ने अब 9बार ओर
भाजपाध्जनंसघ जपाध्ने 8 बार विजयी दर्ज की है।
पिछले सात दशको मे कांग्रेस ने अपने ही गढ में कई उतार चढाव देखे है ओर
1996 के बादके सतत 25 सालों मेें संसदीय क्षेत्र का भगवाकरण का श्रेय व
निमाड की राजनीति के क्षत्रप नंदू भेैयया को है। उनके निधन के बाद
कुशाभाउ ठाकरे ने उन शब्दों का स्मरण हो जाता है जब उनके प्रवास पर नंदू
भेयया के गृह नगर शाहपुर में आहूत संगठन बैंठक न होने से श्री ठाकरे को
बेरंग लोटना पडा था कि यह क्या नंदू नहीं तो भाजपा नहीं। यह स्वीकार नहीं
हैं।
अब न ठाकरे है और न नंदू भैयया रहे है लेकिन एक बार कांग्रेस हो या भाजपा
हायकमान को नानी दादी याद करा गया कि खंडवा में चुनाव व उम्मीदवारी तय
करना टेडी खाीर हैं। इस बार उपचुनाव में अरूण यादव के ऐनवक्त चुनाव लडने
से इंकार करने पर राजनारायण को टिकट देना पडा तो भाजपा को नंदू भैयया का
विक्लप तलाशने मेें कांग्रेस से कही अधिक पसीना बहाना पडा हे।बावजूद
कांग्रेस भाजपा परणिाम आने तक भीतरघात से आंशकित होगी। भाजपा प्रदेश
सगंठन ने चार नामों का पैनल दिल्ली भेजा था। दावेदारों की लिस्ट में
सांसद नंदकुमारसिंह के बेटे हर्षवर्धनसिंह का नाम पहले नंबर पर था लेकिन
मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चैहान बयान दे चुके थे कि भाजपा परिवार या वंशवाद
की पोषक नहीं है। वहीं हर्ष वंर्धन की कारगुजारिया भाजपा के चेहरा चाल
चरित्र के आगे ठीक नहीं पाई। अब सहानुभति की लहर को उसे पीछे छोड देना
पडा हैं। पार्टी में पूर्व मंत्री अर्चना चिटनीस और दिवंगत सांसद
नंदकुमार सिंह चैहान के बीच गुटबाजी जगजाहिर रही है। यही वजह है कि
पार्टी ने इस बार टिकट वितरण में गहन चिंतन किया। शुरुआत से तो सांसद
पुत्र हर्षवर्धन सिंह चैहान का ही नाम चल रहा थाए लेकिन दो लोगों की लड़ाई
में तीसरा बाजी न मार जाए इसे देखते हुए पार्टी ने एक.एक कार्यकर्ताए
नेता से फीडबैक लिया। ज्ञानेश्वर पाटिल को टिकट देने के पीछे उनकी
निर्विवाद छवि तो है ेलकिन गुटबाजी के किलेबंदी से दूर नहीं है।
अभीध्इन पंक्तियों के लिखने तकध् नाम की घोषणा होना बाकी है। वहींए इस
मामले में भाजपा नेता ज्ञानेश्वर पाटिल ने कहा कि पार्टी  जो भी दायित्व
देगी वह तत्पर रहेगे।