कान्हा प्रबंधन ही कर रहा सरही गेट की उपेक्षा, पर्यटकों ने लगाए अधिक पैसे लेकर गुमराह करने के आरोप

11:11 am or January 3, 2022

नारायणगंज से प्रहलाद कछवाहा

मंडला  ०३  जनवरी.;अभी तक;   कान्हा राष्ट्रीय उद्यान विश्व भर में मशहूर है। देश विदेश से यहां पर्यटक जंगल का लुत्फ उठाने के लिए आते हैं। कान्हा का जंगल और आसपास लगे ग्रामों में आदिवासी की मोहक परंपराएं पर्यटकों का मन मोह लेती हैं। कान्हा राष्ट्रीय उद्यान में सफारी करने के लिए तीन प्रवेश द्वार बनाएं गए हैं। खटिया, मुक्की और सरही।  सरही को छोड़कर बाकी के दोनों प्रवेश द्वार में बड़े – बड़े गु्रप के होटल और रिजॉर्ट्स स्थित हैं लेकिन सरही एंट्री गेट उपेक्षा का शिकार हो रहा है।

बताया गया कि एक तरफ कान्हा प्रबंधन बड़े बड़े दावे करता है कि स्थानीय लोगों को रोजग़ार के लिए काम दिया जा रहा है, उन्हें आर्थिक मजबूती प्रदान हो इसके लिए पार्क प्रबंधन काम कर रहा है लेकिन धरातल में देखें तो पता चलता है कि कान्हा प्रबंधन ही रोजग़ार के अवसरों को  ख़त्म करने का प्रयास कर रहा है, क्योंकि कान्हा का सरही प्रवेश द्वार इसका साक्षात उदाहरण प्रस्तुत करता है।  सरही प्रवेश द्वारा से जितनी गाडिय़ों को सफारी के लिए अनुमति दी गई है उतनी गाडिय़ां यहां से प्रवेश नहीं करती हैं।

स्थानीय नागरिकों को नहीं मिल रहा रोजग़ार :

सुबह, शाम और नाइट सफारी के लिए अनुमति प्राप्त गाडिय़ों की एंट्री पूर्ण रूप से यहां से नहीं होने के कारण पर्यटक भी परेशान होते हैं और अन्य प्रवेश द्वार से इस गेट  और ज़ोन की गाडिय़ों को प्रवेश दिया जा रहा है। जिससे स्थानीय स्तर पर रोजग़ार खत्म होता जा रहा है।
पर्यटक ने की रेंजर की शिकायत :

पर्यटकों और स्थानीय नागरिकों ने आरोप लगाया है कि प्रवेश द्वार पर गेट प्रभारी और अन्य स्टाफ द्वारा भी भ्रमित करने का प्रयास किया जाता है और गेट टिकिट को लेकर भी गुमराह किया जाता है जिससे पर्यटकों के मन में इस प्रवेश द्वार से सफारी करने का रुझान कम होता जा रहा है। एक पर्यटक जो लगातार कान्हा भ्रमण में आते हैं उन्होंने मेल द्वारा वरिष्ठ अधिकारियों को सरही ज़ोन के रेंजर की शिकायत भी की है।

सोवेनियर शॉप में बिना बिल बिक रहा लाखों का सामान :

कान्हा के सरही एंट्री गेट में एक सोवनियर शॉप बनाई गई है जहां पर कान्हा से जुड़ा साहित्य, क्लोथ्स, कैप और अन्य सामग्रियों का विक्रय किया जाता है पर किसी भी ग्राहक को कोई भी बिल नहीं दिया जाता है । अब इससे यह स्पष्ट होता है कि कितनी बड़ी सांठ – गांठ से वित्तीय अनियमित्ता का खेल कान्हा प्रबंधन के नाक के नीचे सरही गेट में चल रहा है।

नव वर्ष में भी खाली रहे होम स्टे:

एक तरफ अन्य गेट में मेले जैसा माहौल बना हुआ और वहीं दूसरी तरफ सरही गेट में कान्हा प्रबंधन की लापरवाही के चलते वीराना छाया हुआ है। न ही यहां कोई भीड़ भाड़ है और न ही न्यू ईयर जैसा माहौल।  सारे स्थानीय लोग सिर्फ आश लगाएं बैठे हैं, सारे वाहन चालाक गाइड, होम स्टे संचालक आर्थिक रूप से परेशान है लेकिन पार्क प्रबंधन को कोई भी फर्क नहीं पड़ रहा है।

गुमराह कर अधिक पैसे लेने का लगाया आरोप  :

सफारी के नाम पर अधिक फीस लेने का आरोप भी कुछ पर्यटकों ने लगाया है।  कान्हा प्रबंधन को पारदर्शी रूप से काम करने की आवश्यकता है। जगह – जगह प्रबंधन के द्वारा रेट लिस्ट और पर्यटकों हेतु महत्वपूर्ण जानकारी के लिए फ्लेक्स – बैनर आदि लगाने चाहिए ताकि पर्यटकों के साथ हो रही इन घटनाओं में कमी आए लेकिन दर्जनों बार खबरों के प्रकाशन और प्रशासन को जानकारी होने के बाद भी कोई सख्त कदम नहीं उठाए जा रहे हैं।

नहीं मिल रही अनुमति :

कान्हा प्रबंधन द्वारा सफारी हेतु गाड़ी की अनुमति देने के लिए कुछ शर्ते लागू की गई है कि पहले    प्रवेश द्वार से लगे वन ग्राम के नागरिकों को प्राथमिकता दी जाएगी पर स्थिति ये है कि वन ग्राम, राजस्व ग्राम, तहसील और जि़ला छोड़ अन्य जिलों के लोगों की जिप्सियां को भी यहां सफारी हेतु अनुमति दे दी गई है । वहीं स्थानीय लोग आज तक दर- बदर भटक रहे हैं।

सरही द्वार उपेक्षा का है शिकार :

कान्हा प्रबंधन द्वारा सबसे ज्यादा उपेक्षित सरही गेट और उससे लगे ग्रामों को किया जा रहा है । न ही यहां रिजॉर्ट्स की परमिशन है, होम स्टे के सारे नियम भी सरही में ही लागू कर दिए जाते हैं, गाडिय़ों की एंट्री नहीं की जा रही, वीआईपी लोगों को यहां अलग तरह से फॉरेस्ट विभाग सेवा प्रदान करता है बाकी आम आदमी सिर्फ भटकता रह जाता है। गेट में स्थानीय रोजग़ार को किसी तरह का कोई बढ़ावा नहीं दिया जा रहा है। स्थानीय ड्राइवर, गाइड और अन्य लोग आर्थिक तंगी का सामना कर रहे हैं । दो से तीन साल पहले सफारी हेतु गाडिय़ों की संख्या बढ़ाई गई थी लेकिन जिन लोगों को अनुमति मिली है उसे भी वर्तमान में रोक दिया गया है और सबसे ज्यादा आश्चर्यचकित करने वाली बात यह है कि अभी भी को अनुमतियां मिली थी उसमे भी अन्य जगह के लोगों को ज्यादा प्राथमिकता दी गई है इसीलिए पार्क प्रबंधन पर संदेह की उंगलियां उठना कोई बड़ी बात नहीं है । कान्हा प्रबंधन द्वारा सरही गेट मे हो रही अनियमितताओं को लेकर ग्राम के  ही एक व्यक्ति ने अन्य लोगों के साथ मिलकर अंशन में बैठने संबंधी पत्र भी कान्हा प्रबंधन को भेजा है। अब देखना है कि कान्हा प्रबंधन कैसे उक्त समस्याओं का निदान करता है।