किसकी शह में चल रहा खनिज का अवैध उत्खनन, अवैध खनन से नदियों पर छाया संकट, सूख रही नदियां

10:24 pm or May 23, 2022

प्रहलाद कछवाहा

मंडला २३ मई ;अभी तक;  जिले से होकर गुजरने वाली नर्मदा नदी, बंजर नदी और उसकी सहायक नदियां मंडला जिले की जीवन रेखा है। इन नदियों में रोजाना रेत का अवैध खनन का खेल लगातार जारी है। नदियों में अवैध रूप से चल रहे रेत उत्खनन कार्य से जहां शासन को लाखों रुपए की रॉयल्टी का नुकसान हो रहा है, वहीं दूसरी और अवैध उत्खननकारी पर्यावरण को भी नुकसान पहुंचा रहे है। इसके साथ ही नदियों के अस्तित्व पर संकट भी गहराता जा रहा है।  कई जगह नदियों में रेत के अवैध उत्खनन इतना अधिक हो रहा है कि इसका असर वहां के लोगों के जनजीवन पर दिखने लगा है। रैनी सीजन में रेत के उत्खनन पर रोक लग जाती है लेकिन मंडला जिले में रैनी सीजन में भी रेत का खेल बेखौफ चलता है। रेत का अवैध उत्खनन कराने वालों के हौसले इतने बुलंद है कि उन्हें किसी का डर नही है, या किसी की सह में यह सब खेल चल रहा है।

                           सूत्रों के अनुसार रेत के इस अवैध कारोबार में जिले के दबंगों, नेताओं और बाहरी लोगों का खेल चल रहा है, जो दिन और रात रेत का अवैध कारोबार चला रहे है। ग्रामीणों का आरोप है कि अगर रेत खनन का विरोध भी किया जाता है तो उन्हें दबंग और नेताओं द्वारा धौंस देकर डराया जाता है बल्कि  नेतागिरी का पावर दिखाया जाता है। ग्रामीणों का कहना है कि अगर शासन प्रशासन से मदद मांग भी ले तो उन्हें किसी का सहारा नहीं मिलता। इससे ग्रामीण भी काफी डरे हुए महसूस करते है। मुख्यालय के समीपस्थ रेत खदानों समेत जिले के अन्य विकासखंडों में भी इस अवैध उत्खनन का खेल देखने मिलता है। जहां राजनीतिक दबाव प्रशासनिक अधिकारियों को हमेशा बनाया जाता है।

प्रशासन अंकुश लगाने में नाकामयाब:

जिला मुख्यालय समेत जिले भर में अवैध खनिज का दोहन लगातार किया जा रहा है। यहां खनिज माफिया रेत, पत्थर की ढुलाई खुलेआम कर रहे है। जिन पर प्रशासन अंकुश लगाने में नाकामयाब साबित हो रहा है। जिले के समीपस्थ कई क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर रेत का अवैध उत्खनन, पत्थरों की अवैध खुदाई की जा रही है। संबंधित विभाग इस पर कार्रवाई नहीं कर रहा है। कई बार अभियान चलाकर बड़े पैमाने पर अवैध रेत और पत्थर के वाहन जब्त किये जाते है, बावजूद इसके अवैध खनिज का दोहन नहीं रूक रहा है। बता दे कि अवैध उत्खनन और परिवहन जिले भर में जम कर चल रहा है। जिसे देखने वाला कोई नही है। देर रात से सुबह तक सुदूर इलाको से अवैध रेत निकासी, परिवहन और पत्थर की खुदाई जम कर की जा रही है। शासकीय कार्यो में भी बिना रायल्टी के धड़ल्ले से खनिज का उपयोग किया जा रहा है।

रेत माफियाओं का फैला जाल:

जिले में स्वीकृत खदानों के अलावा अलग-अलग जगहों से रेत निकाली जा रहा है। अवैध रूप से रेत निकालने वालों में पैसे वाले और नेताओं से संपर्क रखने वाले लोग हैं। कोई रूपयों की दम पर खुलेआम नदी से रेत निकाल रहा है तो कोई नेताओं से पहचान होने के दम पर नदी का सीना छल्लनी कर रहा है। बावजूद इसके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। रेत माफिया बड़े स्तर पर अवैध रेत का कारोबार कर रहे हैं। सूचना होने के बाद खनिज विभाग की टीम इनके खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं कर रहा है।

यहां भी हो रहा अवैध उत्खनन:

रेत का खेल शबाव पर है। वर्तमान समय में भले ही रेत बेसकीमती होने के साथ इसकी मांग भी है, लेकिन रेत की चोरी अपने शवाब पर है।  सूत्रों के अनुसार हिरदेनगर क्षेत्र, चाबी क्षेत्र, बम्हनी क्षेत्र समेत अन्य स्थानों पर स्वीकृत खदानों के अलावा रेत का अवैध उत्खन्न व परिवहन दोनो ही जम कर किया जा रहा है। नदियों के किनारे पर रेत चोरी के लिए नए नए ठिकाने बन गए है। इस इलाके में रेत चोरी किसके शह पर हो रही  है और इन पर कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही है, यह विचार करने वाली बात है।

रात भर दौड़ते है वाहन:

चल रहे अवैध उत्खनन और परिवहन से आसपास के क्षेत्र के लोग परेशान हो रहे है। उत्खननकर्ता की मनमानी के चलते रात्रि में बेधड़क रेत भरकर तेज रफ्तार में वाहनों को निकाल रहे है। जिससे ग्रामीणों को रात्रि में वाहनों की आवाज से परेशानी हो रही है। अवैध उत्खन्न की जानकारी होने के बाद भी यहां कार्रवाई करने में अधिकारी संकोच में है।  विभाग रेत के अवैध उत्खनन को रोकने में असहाय और असमर्थ साबित हो रहा है। वाहनों की  इस धमाचौकड़ी से हादसें का भी अंदेशा बना रहता है। बावजूद  इसके विभाग द्वारा कार्रवाई नहीं की जा रही है।

वाहनों से दुर्घटना का भय :

स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि ट्रेक्टर में बंजर नदी से रेत निकालकर ओव्हर लोड भरकर गांव के अंदर से बेलगाम रफ्तार से वाहन दौड़ाए जाते हैं। विगत दिवस एक ऐसा ही तेज रफ्तार रेत से भरा ट्रेक्टर हिरदेनगर में महावीर के पास अचानक पलट गया। ग्रामीणों का कहना है कि इन बेलगाम रेत से भरे ट्रेक्टरों से हमेशा दुर्घटनाओं का भय बना रहता है।

सूख गई बंजर नदी :

स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि आज से कुछ साल पहले जब बंजर नदी से रेत निकासी कम होती थी तो साल भर यहां पानी नदी में बना रहता था लेकिन जैसे-जैसे इस नदी में रेत माफियाओं के वाहन उतरते चले गए वैसे-वैसे बंजर नदी अपने नाम के अनुसार अब बंजर होते चली जा रही है। आज की स्थिति में बंजर नदी में नाम मात्र का पानी बचा है जिसके लिए सीधे तौर पर रेत माफिया और उन पर अंकुश न लगा पाने वाले जिम्मेदार अधिकारी हैं।
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