कृष्ण मास में श्री प्रेमप्रकाश आश्रम में सत्संग की वर्षा

7:11 pm or August 4, 2022

महावीर अग्रवाल 

मन्दसौर ४ अगस्त ;अभी तक;  पावन पवित्र श्रावण मास में भगवान श्री पशुपतिनाथ महादेव की धार्मिक नगरी में भगवान के मन्दिर के साथ नगर में हर समाज में धार्मिक गतिविधियों से सम्पूर्ण नगरके नगरवासी मंत्रमुग्ध हो रहे है, उस कड़ी में सिन्धी हिन्दू समाज की प्रमुख धर्मपीठ सतगुरू टेऊँरामजी महाराज द्वारा स्थापित श्री प्रेमप्रकाश धर्मपीठ जिसकी शाखा मंदसौर श्री प्रेमप्रकाश आश्रम में श्री पंचम पिठाधिश्वर गादीपति सतगुरू भगतप्रकाशजी महाराज की आज्ञा व कृपा से दो वर्ष के कोरोना काल से मानव जाति को निजात के उपरान्त इस वर्ष श्रावण मास में सन्तों महात्माओं को लगातार आना जारी से उसी श्रावणमास की सत्संग की कड़ी में 3 अगस्त साई टेऊँराम का मासिक जन्मोत्सव एवं धर्मपीठ के द्वितीय पिठाधिश्वर सतगुरू स्वामी सर्वानन्दजी महाराज के 45वें वर्षीउत्सव पर पंच दिवसीय स्थापित श्रीमद् भगवत गीता एवं श्री प्रेमप्रकाश ग्रंथ के पाठों का भोग पाकर वर्सि महोत्सव का समापन वैशाली नगर अजमेर के संचालक सन्त श्री राजूराम प्रेमप्रकाशी सूरत गुजरात के संत श्री दीपक कुमार प्रेमप्रकाशी ने सम्पन्न किया।
इस आशय की जानकारी मण्डली के अध्यक्ष श्री शिवानी ने देते हुए बताया कि इस पावन अवसर पर सत्संग हाल में बैठी धर्मप्रेमी श्रद्धालु संगत पर अमृतमयी वर्षा में संत श्री राजूराम ने कहा कि श्रीमद भगवत गीता के अंतिम श्लोक का उच्चारण करने से प्राणी मात्र की कठिन से कठिन समस्या का निराकरण संभव है। आपने श्री प्रेमप्रकाश ग्रंथ के अंतिम अध्याय के 60 शांति के दोहों का संगीत भरा उच्चारण कर संगत का मनमोह लिया।

आपने कहा कि समस्या तो हर मनुष्य के जीवन में आती है किन्तु सतगुरू नाम का स्मरण एवं सेवा से आपकी समस्या छोटी होकर हल हो सकती है। प्राणी को चिन्ता छोड़कर चिन्तन करना चाहिये। उससे  ही आपको निदान प्राप्त होगा।
प्राणी को एकाग्रचित्त होकर परम परमात्मा का शुक्र करना चाहिये। आपने भजन के माध्यम से कहा कि ‘‘अमृत वेला जाग, जाग गुरूमुख प्यारा’’ अर्थात हर मनुष्य को अमृत वेला जागने वाला मनुष्य भाग्यवान होता है तू अमृत वेला जागकर अपने सतगुरू व भगवान से जुड़कर तो देख वो तुझे मालामाल कर देगा। संत महात्मा का संग करेगा तो तुम्हें भगवान से जोड़ देगा, परिवार में प्रेम से रहकर प्रेम का प्रकाश करना चाहिए।

आपको प्रतिदिन गुरू दरबार एवं मंदिर में जाकर दर्शन, पूजा के साथ-साथ नाम स्मरण करना चाहिए क्योंकि वहां पर सकारात्मक वातावरण से आपके जीवन का कल्याण एवं प्रेम शांति के भाव जाग्रत होंगे।

अंत में सुख समृद्धि एवं अंचल में पर्याप्त वर्षा का पल्लव पाकर प्रसाद वितरित किया गया। आभार प्रदर्शन श्रीमती सपना-डॉ. सुरेश पमनानी ने प्रकट किया।