कोरोना आपदा में बेरोजगार ग्रामीणों के लिए संजीवनी बनी मनरेगा

मयंक भार्गव

बैतूल १९ अक्टूबर ;अभी तक;  वैश्विक महामारी कोरोना आपदा के दौर में देश भर में सब कुछ ठप्प हो जाने से गरीब, ग्रामीण एवं मजदूर वर्ग के सामने रोजी रोटी का संकट गहरा गया था। काम धंधा ठप्प होने से देश के विभिन्न राज्यों से लगभग एक लाख प्रवासी लोग बैतूल जिले में आए थे। आपदा एवं विपरीत परिस्थितियों के दौर में बेरोजगारी का दंश झेल रहे जिले के लाखों ग्रामीणों के लिए महात्मा गांधी ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना संजीवनी साबित हुई। जिला पंचायत बैतूल के मुख्य कार्यपालन अधिकारी एमएल त्यागी द्वारा ग्रामीणों को रोजगार उपलब्ध कराने के लिए बनाई गई रणनीति के तहत गांव-गांव में बड़ी तादाद में मनरेगा के तहत निर्माण कार्य शुरू करवाये गये। परिणाम स्वरूप अपै्रल से सितंबर तक 6 माह के दौरान बैतूल जिले में दो लाख 11 हजार 800 ग्रामीणों को न केवल रोजगार मिला बल्कि मजदूरी की 88 करोड़ 31 लाख रूपए की राशि उनके बैंक खातों में जमा की गई।
6 माह में 50 लाख मेनडेस पर

मनरेगा के जिला परियोजना अधिकारी बैतूल अजय सक्सेना ने बताया कि बैतूल जिला पंचायत सीईओ एमएल त्यागी के मार्गदर्शन में कोरोना आपदा के दौर में जिले के बेरोजगार ग्रामीण को मनरेगा से अधिक से अधिक रोजगार की उपलब्धता सुनिश्चित की गई है। उन्होंने बताया कि अपै्रल 2020 से सितंबर माह तक बैतूल जिले की 556 ग्राम पंचायतों में एक लाख 24 हजार 561 जॉब कार्डधारी परिवारों को मनरेगा के तहत रोजगार उपलब्ध कराया है। जिससे उक्त जाब कार्डधारी परिवारों के दो लाख 11 हजार 800 ग्रामीणों को कोरोना आपदा के दौर में अपने ग्राम में ही सुलभ रोजगार मिला एवं उनके बैंक खातों में मजदूरी का भुगतान भी हुआ।

मनरेगा के जिला परियोजना अधिकारी श्री सक्सेना के मुताबिक बीते 6 माह के दौरान मनरेगा के तहत बैतूल जिले में 55 लाख 8 हजार मेनडेज पूरे हुए है। जबकि बीते एक वर्ष के दौरान 49 लाख मेनडेस हुए थे।
113 करोड़ रूपए का हुआ भुगतान

मनरेगा के जिला परियोजना अधिकारी श्री सक्सेना के मुताबिक बीते 6 माह के दौरान मनरेगा के तहत 14400 निर्माण कार्य पूर्ण हो चुके है तथा 19 हजार 724 निर्माण कार्य प्रगतिरत है। उन्होंने बताया कि मनरेगा के तहत अपै्रल से सितंबर माह तक 113 करोड़ 69 लाख रूपए का भुगतान किया गया है। जिसमें 88 करोड़ 31 लाख रूपए मजदूरी एवं 25 करोड़ रूपए निर्माण सामग्री का भुगतान शामिल है। जिला परियोजना अधिकारी के मुताबिक मजदूरी का भुगतान नियमित हो रहा है जबकि निर्माण सामग्री का 8 करोड़ रूपए का भुगतान बकाया है। उन्होंने बताया कि जिले की सभी 556 ग्राम पंचायतों में वर्तमान में औसतन 32 हजार 93 श्रमिक मनरेगा के निर्माण कार्यो में संलग्न है।
मनरेगा ने जिले की एकॉनोमी को स्ट्रांग किया
वैश्विक महामारी कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए दो माह तक लागू रहे देशव्यापी लॉकडाउन से अर्थव्यवस्था का ढांचा चरमरा गया था। लॉकडाउन के चलते छोटे-बड़े कारखाने, निजी शासकीय निर्माण कार्य सहित बाजार बंद होने से बड़ी आबादी के सामने रोजी-रोटी का संकट आ गया था। लॉकडाउन के दौर में रोजगार की उपलब्धता नहीं होने से जिले के ग्रामीण इलाकों के लोगों के साथ प्रवासियों के लिए दो जून की रोटी जुटाना मुश्किल हो गया था। परंतु कोरोना आपदा से उपजी विपरित परिस्थितियों के दौर में सरकार की अति महत्वकांक्षी महात्मा गांधी ग्रामीण रोजगार गारंटी से लाखों ग्रामीणों को मिले रोजगार एवं मजदूरी व निर्माण सामग्री के लिए हुए 113 करोड़ रूपए के भुगतान से जहां ग्रामीणों की आर्थिक स्थिति में सुधार आया वहीं जिले की अर्थव्यवस्था में भी मजबूती आयी। मनरेगा से भुगतान ही राशि के बड़े हिस्से से जिले के बाजार भी गुलजार हुए।
ग्रामीणों को अधिक से अधिक रोजगार उपलब्ध कराया- सीईओ
जिला पंचायत बैतूल के मुख्य कार्यपालन अधिकारी एमएल त्यागी ने बताया कि कोरोना संक्रमण आपदा के दौर में बेरोजगारी ग्रामीण को अधिक से अधिक रोजगार उपलब्ध कराने के लिए शासन द्वारा दिये गये निर्देशों के पालन में विस्तृत कार्ययोजना बनाकर मनरेगा के कार्यो में ग्रामीणों को भरपूर रोजगार उपलब्ध कराया गया। उन्होंने बताया कि कोरोना वायरस संक्रमण से बचाव के लिए प्रत्येक श्रमिक को दो-दो मॉस्क उपलब्ध कराये गये थे। साथ ही निर्माण कार्यस्थलों पर संक्रमण से बचाव के सुरक्षा मानकों का सख्ती से पालन करना सुनिश्चित किया था। जिला पंचायत सीईओ के मुताबिक लॉक डाउन के दौरान बैतूल जिले के ग्रामीणों एवं प्रवासियों को मनरेगा से अधिक से अधिक रोजगार उपलब्ध कराया गया है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में खरीफ फसलों की कटाई एवं रबी फसलों की बुवाई की तैयारी के कारण मनरेगा के कार्यो में मजदूरों की संख्या में थोड़ी कमी आयी है। परंतु खेती बाड़ी का कार्य खत्म होने के बाद मजदूरों की संख्या में इजाफा होगा।

Related Articles

Post your comments

Your email address will not be published. Required fields are marked *