कोरोना काल से पहले निर्धारित टयूषन फीस लेंगे, हाईकोर्ट में पेष किया हलफनामा

सिद्धार्थ पाण्डेय

जबलपुर १० सितम्बर ;अभी तक;  हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस ए के मित्तल तथा जस्टिस व्ही के षुक्ला की युगलपीठ के समक्ष एसोसिषन आॅफ प्राईवेट स्कूल तथा एसोसिएशन ऑफ अनएडेड सीबीएसई स्कूल की तरफ से हलनामा पेष किया गया। हलफनामा में कहा गया है कि न्यायालय द्वारा पारित आदेष का परिपालन करते हुए कोरोना काल से पहले निर्धारित टयूषन फीस विद्वार्थि लेंगे। युगलपीठ ने पूर्व में पारित आदेष को यथावत रखते हुए याचिका पर अगली सुनवाई 23 सितम्बर को निर्धारित की गयी है।

गौरतलब है कि नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्षक मंच के डाॅ पी जी नाजपांडे तथा रजत भार्गव सहित आॅन लाईन क्लाॅस तथा स्कूल फीस के संबंध में 9 याचिकाएं दायर की गयी थी। जिसमें कहा गया था कि कोरोना काल में स्कूल द्वारा स्मार्ट तथा आॅनलाईन क्लास का संचालन किय जा रहा है। आॅन लाईन क्लाॅस स्कूली बच्चों के लिए आॅखो के लिए खतरनाक है। आॅन लाईन क्लाॅस में पढने के लिए बच्चे मोबाइल का उपयोग करते है,जो लगभग 6 इंच का होता है। डब्ल्यूएचओ तथा नेत्र स्पेषलिस्टों का कहना है कि बच्चों की आंखो के लिए इलेक्टाॅनिक डिवाइस खतरनाक है। निजी स्कूलों द्वारा आॅललाईन तथा स्मार्ट क्लास के नाम पर मनमानी फीस वसूल रहे है। इसके अलावा याचिका में यह भी कहा गया था कि प्रदेष सरकार ने एक आदेष जारी किया था कि स्कूल कोराना काल में सिर्फ टयूषन फीस ले सकते है। इस आदेष के समर्थन में मुख्यपीठ जबलपुर की एकलपीठ ने आदेष जारी किये थे। इंदौर खंडपीठ में दायर एकलपीठ ने निजी स्कूल के एसोसिएषन की तरफ से दायर याचिका की सुनवाई करते हुए स्थगन आदेष जारी किये है। दोनों आदेष विरोधाभासी होने के कारण संषय की स्थिति बनी हुई है। याचिका में मांग की गयी है कि इंदौर खंडपीठ द्वारा जारी स्थगन आदेष को निरस्त किया जाये। इंदौर खंडपीठ ने भी विरोधाभासी आदेष के संबंध में दिषा-निर्देष के लिए मुख्यपीठ के समक्ष सुनवाई के लिए मामले को प्रस्तुत करने के निर्देष दिये थे।

याचिका की सुनवाई के दौरान सरकार की तरफ से कहा गया था कि कोरोना काल में स्कूल प्रबंधन द्वारा सिर्फ टयूषन फीस लिये जाने के संबंध में आदेष जारी कर दिये गये है। सीबीएससी की तरफ से पेष किये गये जवाब में कहा गया था कि स्कूल राज्य सरकार के निर्देषों का पालन करने बाध्य है। याचिकाकर्ता की तरफ से युगलपीठ को बताया गया था कि स्कूल संचालकों ने टयूषन फीस में बढोत्तरी कर दी है। जिसके बाद युगलपीठ ने अपने आदेष में कहा था कि आदेष में कहा है कि निजी स्कूल कोरोना काल से पूर्व निर्धारित टयूषन फीस ही अभिभावकों से ले सकते है। आदेष के परिपालन के संबंध में युगलपीठ ने हलफनामा पेष करने के आदेष जारी किये थे। सरकार की तरफ से युगलपीठ को बताया गया आदेष के परिपालन के संबंध में आदेष जारी कर दिये गये है। याचिका की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता अजय गुप्ता तथा अधिवक्ता दिनेष उपाध्याय ने पैरवी की।

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