कोरोना महामारी से आमजन में व्याप्त भय दूर करने सौंपा ज्ञापन

आनंद ताम्रकार

बालाघाट ३ मई ;अभी तक;  राजेगांव निवासी जागरूक युवा नरेंद्र कुमार यादव ने मध्य प्रदेश शासन के आयुष मंत्री रामकिशोर कावरे , बालाघाट कलेक्टर दीपक आर्य को एक ज्ञापन सौंपा है। राजेगांव के जागरूक युवा नरेंद्र यादव एवं उनके अन्य साथियों ने मध्य प्रदेश श्रमजीवी पत्रकार संघ के जिला अध्यक्ष इंद्रजीत भोज से भी कोविड-19 वैश्विक महामारी के संदर्भ में विस्तार से चर्चा की और कुछ सुझाव भी दिए हैं। कलेक्टर बालाघाट को नरेंद्र यादव ने बंद लिफाफे में जो ज्ञापन प्रेषित किया है उसमें वर्णन किया गया है कि ष्टह्रङ्कढ्ढष्ठ-१९ क्रमण से दुनिया और देश के भीतर काफी लोग डरे हुए हैं। यही हाल हमारे जिला का भी यह संक्रमण जितना खतरनाक नहीं है उससे ज्यादा भय हमारे बीच व्याप्त हो गया है। जिले की जनता के मन से इस भय को खत्म करना चाहता हू । लोगों को यह विश्वास दिलाना बहुत जरूरी ष्टह्रङ्कढ्ढष्ठ-१९ संक्रमण खतरनाक नहीं है। दुनिया भर में अब तक लगभग ९५’ लोग इस संक्रमण से ठीक हो चुके है।

भय के इस माहौल को खत्म करने के लिए में निम्न शर्तों के आधार पर ष्टह्रङ्कढ्ढष्ठ-१९ पॉजिटिव मरीज के साथ रहकर लंच डिनर करना चाहता हूँ-

१. इसकी वीडियो रिकॉर्डिंग की जाये, हो सके तो इसे सोशल मीडिया के माध्यम से लाइव दिखाया जाये। 2. ष्टह्रङ्कढ्ढष्ठ-१९ मॉजिटिव मरीज के साथ रहने के दौरान या बाद में मेरा ष्टह्रङ्कढ्ढष्ठ-१९ टेस्ट न किया जाये। ३. मुझ कोई भी मेडिसिन न दिया जाये । 4. मुझे हिस्टन्सिंग / मास्क का पालन करने न बोला जाये और इनसे आइसोलेशन में न रखा जाए। ५. ष्टह्रङ्कढ्ढष्ठ-१९ पाजिटिव मरीज के संपर्क में आने के बाद मुझे बिलकुल सामान्य तौर पर जिंदगी जीने दिया जाये।  24 दिनों के कथित ढ्ढठ्ठष्ह्वड्ढड्डह्लद्बशठ्ठ श्चद्गह्म्द्बशस्र के बाद जनता के समक्ष अपने इस अनुभव को साझा करने क प्रदान किया जाये।

इस पत्र को लिखने का उद्देश्य लोगों के डर और असहजता को खत्म कर सामान्य जिंदगी को पटरी पर लाना है। मैं यह इसलिए भी करना चाहता हूँ ताकि ष्टह्रङ्कढ्ढष्ठ-१९ पॉजिटिव मरीज को लोग समाज में सम्मान दें और पूर्व की तरह वे अपनी जिंदगी जी सके ।

अत: आपसे मेरा निवेदन है कीष्टह्रङ्कढ्ढष्ठ-१९ पॉजिटिव मरीज के साथ मुझे रहने का अवसर प्रदान किया जाये
कॉविड 19 वैश्विक महामारी में आमजन में व्याप्त भय व भ्रम को दूर करने हेतु कुछ सुझाव
संपूर्ण भारत देश में कोविड-19 संक्रमण से बहुत ही दुखद स्थिति निर्मित हो गई है। हमारा मध्य प्रदेश व बालाघाट जिला भी इससे अछूता नहीं है।
हम निम्न बिंदुओं पर शासन का ध्यान आकर्षित करना चाहते हैं जिनके आधार पर वर्तमान समय में जो अराजकता की स्थिति समाज व देश में निर्मित हुई है उससे प्रभावशाली ढंग से नियंत्रित किया जा सके एवं जनसामान्य पूर्व की भांति सामान्य जीवन यापन कर सकें साथ ही कोविड-19 के संक्रमण को खत्म किया जा सके।
वर्तमान अराजक स्थिति

1. वर्तमान में जनजीवन सामान्य नहीं है , जिसके गंभीर परिणाम हो रहे हैं। लोगों में शारीरिक, मानसिक व आर्थिक नुकसान दिन प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है। 2. मौसम परिवर्तन व असामान्य जीवन के कारण कई प्रकार के शारीरिक , मानसिक व्याधियां तथा रोग उत्पन्न हो रहे हैं जिससे सामान्य जन में कॉविड 19 का भ्रम उत्पन्न हो रहा है। 3. मास्क की अनिवार्यता , सोशल डिस्टेंसिंग लॉक डाउन की अनिवार्यता से कोविड-19 का संक्रमण कम होता तो नहीं दिख रहा है उल्टे इसके गंभीर दुष्परिणाम सामने आ रहे हैं-
(अ)  मास्क की अनिवार्यता से हाइपोक्सिया का खतरा बढ़ता जा रहा है जिससे व्यक्ति के शरीर में ऑक्सीजन की कमी होती है।
(ब)  मास्क की अनिवार्यता के कारण व्यक्तियों में सामाजिक व मानसिक द्वेष की स्थिति निर्मित हो रही है।
(स)  लॉकडाउन ने संपूर्ण जन जीवन को बबार्दी की ओर धकेल दिया है। जनता में भय, शासन के प्रति असंतोष व मानसिक अवसाद की स्थिति निर्मित हो रही है जो किसी टाइम बम की तरह है।
(द)  लॉकडाउन से संपूर्ण आर्थिक, सामाजिक व सांस्कृतिक जीवन ठप हो चुका है । जन जीवन में जीवन के प्रति भय व रोष बढ़ता जा रहा है। उसका मानसिक स्वास्थ्य गिरता जा रहा है। यह जीवन के प्रति सम्मान वह मृत्यु के प्रति भय को बढ़ा रहा है जोकि अप्राकृतिक हैं ।
4. कोविड-19 प्रोटोकॉल
जन जीवन के लिए अनुशासन की अनिवार्यता होनी चाहिए किंतु महामारी के नाम पर थोपे गए कोविड-19 प्रोटोकॉल से कोई लाभ होता नजर नहीं आ रहा है। हॉस्पिटल में मृतकों का आंकड़ा दिन प्रतिदिन बढ़ता ही जा रहा है और संक्रमण की गति भी।
संभावित सुझाव

1. शासन की ओर से जनजीवन को सामान्य करने की दिशा में पहल करते हुए जन सामान्य के मन से कोविड-19 का डर खत्म करने के लिए सकारात्मक कदम उठाए जाने चाहिए।
(अ) कॉविड संक्रमण की दर बहुत ही कम है। यह एक एक सीजनल फ्लू है जिसकी संक्रमण क्षमता साधारण सर्दी जुकाम की तरह ही है।
(ब)  कोविड-19 का रिकवरी रेट 90 से 95′ तक है अत: इस से डरने की जरूरत नहीं है।

2.  स्वस्थ व्यक्ति वायरस का संक्रमण ना के बराबर करता है अत: मात्र की अनिवार्यता खत्म की जाए क्योंकि मास्क वायरस के संक्रमण को रोकने में समर्थ है इसका वैज्ञानिक सबूत उपलब्ध नहीं है।
3.  अस्पतालों में मरीजों का इलाज लक्षणों के आधार पर हो। प्रोटोकॉल और दिशा निर्देश किसी बीमारी का समाधान नहीं है। क्योंकि सब के शरीर की क्षमता व जरूरतें अलग-अलग होती है।
4.  कोविड-19 टेस्ट केवल गंभीर रूप से बीमार व्यक्तियों का ही किया जाए। स्वस्थ व कम लक्षणों वाले व्यक्तियों का नहीं क्योंकि इसमें फॉल्स पॉजिटिव की संभावना ज्यादा होती है जिससे हर किसी को कोविड-19 पॉजिटिव का भ्रम पैदा होता है।
5. लॉक डाउन का कोई भी वैज्ञानिक आधार नहीं है जिससे यह कहा जा सके कि यह कारगर है। अत: लॉकडाउन खत्म किया जाए जिससे जनजीवन सामान्य पटरी पर वापस आ सके।
6   टीकाकरण- शासन द्वारा निर्देशित है कि यह टीकाकरण स्वैच्छिक है किंतु जमीनी स्तर पर देखा जा रहा है कि शासन के अधिकारियों द्वारा जनता को भिन्न-भिन्न प्रकार से डरा कर वह जबरदस्ती बहला-फुसलाकर टीकाकरण करवाया जा रहा है जो कि नियमों के विरुद्ध है। टीकाकरण के मामलों में शासन द्वारा आम जन को उनके अधिकार व टीकाकरण की संपूर्ण जानकारी नहीं दी जा रही है। इसके दुष्प्रभाव की स्थिति में किसी तरह की कोई मदद या शिकायत निवारण की व्यवस्था नहीं है। इस संबंध में भी शासन द्वारा सकारात्मक कदम उठाए जाने चाहिए।