कोविड-१९ — सरकारें जनप्रतिनिधि और जनता – पूर्व विधायक डॉ जाजू

महावीर अग्रवाल
 मंदसौर १७ सितम्बर ;अभी तक;  डाक्टर सम्पत स्वरूप जाजू पूर्व विधायक नीमच ने एक बयान में कहा कि पीएम , सीएम और नीमच ज़िला डीएम द्वारा एक ही दिन विभिन्न तरीक़े से विभिन्न शब्दों से जनता से अपील की गईं कोविड -१९ की जंग को लड़ने के लिये . जिसका पालन कर कोविड-१९ के प्रभाव को कम कर सकते हैं .पीएम ,सीएम और डीएम की अपील समसामयिक हैं लेकिन वे ये भी दर्शा रही हैं कि कोविड -१९ की जंग को लड़ने में सरकार की रणनिति में बहुत बड़ी कमियाँ थी जो नियम सही और बचाव के लिये सरकार की गाइड लाइन में थे उनको छः माह में भी ज़मीन पर  क्रियान्वयन करवाने में असफल रहे चाहे वे व्यक्तिगत जागरूकता संबंधी हो  या पीड़ित के इलाज  संबंधी हो . क्रियान्वयन नही हो पाने का कारण तथाकथित सिस्टम हैं जिसे देश आज़ादी के बाद से भुगत रहा हैं
                उन्होंने कहा कि कहावत हैं कि *दान की शुरुआत अपने घर से ही शुरू होती हैं . *एक और सर्वसत्य बात हैं कि *हम सुधरेंगे तो युग बदलेगा *  दुर्भाग्य हैं कि उपरोक्त दोनो बातों को क्रियान्वयन करने में ढिलाई रही और प्रशासन और नेता अपने घर पर ही नियंत्रण नही कर सके और ना ही उन नियमो का पालन अनुसरण करने वालों से करवा पाये जिसका परिणाम अब देखने को मिल रहा हैं ..
                डॉ जाजू ने कहा कि दुर्भाग्य हैं कि पूर्व में कोरोना के लिये किये गये लाँक-डाउन का पूरी तरह लाभ नही उठा पाये जिसके परिणाम आज हमें सर्वत्र देखने को मिल रहे हैं । पूर्व में किये गये लाँक-डाउन का बहुत ही कम फ़ायदा मिला . यह सबको मालूम हैं कि कोरोना का कोई भी पुख़्ता इलाज नही हैं , कोरोना से संक्रमित नही हो उसके लिये बचाव  के तरीको को अपने दैनिक जीवन की दिनचर्या में कठोरता से स्वयं को पालन करना हैं और दूसरों को प्रेरित कर नियमो का पालन करवाना हैं लाँक डाउन के समय का उपयोग  नियमो का पालन कैसे करना हैं के लिये जागरूकता पैदा करना थी और हैं साथ में ऐसे लोगों को चिन्हित कर उनका विशेष ध्यान रखना ज़रूरी हैं जो पूर्व में ही किसी गम्भीर रोग से पीड़ित हैं या वे लोग जिनकी उम्र साठ वर्ष से अधिक हैं ( साठ वर्ष से अधिक उम्र के लोगों कि इमिनियुटी ( रोगप्रीति रोधक क्षमता ) की कमी रहती हैं जिसके कारण उनके संक्रमित होने के चांस ज़्यादा होते हैं .
     लाँक- डाउन के समय का उपयोग  कोरोना वाइरस की गम्भीरता को रोकने के लिये अलग से पीड़ित लोगों के इलाज की सुदृढ़ व्यवस्था जिसमें सुविधायुक्त वार्ड , आक्सीजन की भरपूर व्यवस्था , वेंटिलेटर की व्यवस्था और ट्रेंड स्टाफ़ की व्यवस्था करना थी .
नीमच ज़िले का दुर्भाग्य रहा कि जिस तरह लाँकडाउन के समय का उपयोग करना चाहिये था वह उपयोग नही कर पाये ।कोरोना वाइरस के तीन – चार हाट स्पाट होते हैं जहाँ से उसका फैलाव होता हैं- कृषिमंडी  – सब्ज़ीमंडी , किराना की दुकान और सरकारी अर्धसरकारी कार्यालय , बाहर से आवागमन के साधनो का उपयोग  इत्यादि . जब तक इन हॉटस्पाट पर नियम क़ानून का कड़ाई से पालन नही करवायेंगे कोरोना पर नियंत्रण पाना मुश्किल हैं ..
कोरोना पर नियंत्रण का मूल मंत्र केवल एक ही हैं ..
* स्वयं नियम का पलान करे और अन्य लोगों से नियम के पालन करने का अनुरोध करे .
केवल चार मुख्य  नियम का आवश्यक रूप से  पालन करे ।
१-फ़ेस- मास्क का उपयोग
२-शारीरिक- दूरी के नियम का पालन
३- स्वछता का ध्यान रखते हुए सेनिटाइज़ेशन का उपयोग
४-साबुन से हाथ को धोना ..
इसके अलावा शासन की गाइड लाइन और नियमित व्यायाम योग एवम् भोजन पर ध्यान रखे ।
किसी भी जंग को जितने के लिये दृढ़ इच्छा शक्ति, दूर दृष्टि  के साथ इन चार  का होना ज़रूरी होता हैं
१-सुदृढ़ रणनीति
२-अनुशासन
३-कर्तव्य को निभाना
४-सही समय का उपयोग
कोविड -१९ की जंग में उपरोक्त सभी का अभाव रहा .
ना तों सही रणनीति थी ना ही अनुशासन , ना ही कर्तव्य को निभाने का जज़्ज़ब्बा और ना ही समय के उपयोग का तरीक़ा , जिसके कारण आम जन भ्रमित हो गया और जो सामंजस्य शासन जनप्रतिनिधि और जनता के बीच कोविड -१९ की जंग से लड़ने के लिये होना चाहिये वह नही बन पाया ..जिसके परिणाम अब देखने को मिल रहे हैं । अभी भी समय हैं हम सब मिलकर अनुशासन में रहते अपने कर्तव्यों का निर्वहन करे खुद की सुरक्षा खुद करे ना तो सरकार पर और ना ही अन्य किसी पर निर्भर रहे । व्यक्तिगत सुरक्षा के नियमो का कड़ाई से पालन करना ही श्रेष्ठ रणनीति हैं कोविड-१९ की जंग में ।सावधानी हटी दुर्घटना घटी ।
उन्होंने कहा कि कोविड-१९ की जंग में उपरोक्त  सूक्तियों का अभाव देखने को मिला हैं और अधिकतर लोग  लोग उनको  अभी भी गम्भीरता से नही ले रहे हैं ..
जनवरी २०२० के अंत में कोरोना वाइरस ने भारत में दस्तक दी थी तभी से सबको मालूम था कि इसका ना तो कोई पुख़्ता इलाज है और ना ही कोई वैक्सीन बना हैं .
केवल और केवल * व्यक्तिगत सुरक्षा सामग्री के उपयोग के साथ शारीरिक-दूरी ही एक मात्र उपाय है . जिसको हर व्यक्ति जानते हुए भी अनजान बन कर अपनी दिनचर्या को पूरी कर रहा हैं ..
यह निर्विवाद सत्य हैं कि लाँकडाउन कोविड-१९ का इलाज नही हैं लाँकडाउन का उपयोग केवल लोगों को कोविड-१९ के बारे में जागरूक करने एवम्   स्वास्थ सेवाओं के सुदृढ़ करने के साथ आर्थिक , सामाजिक एवम् व्यावसायिक जीवन में किस तरह से परिवर्तन कर कोविड-१९ की जंग को जीता जा सकता हैं के लिये तैय्यार करना था ।
डॉ जाजू ने कहा कि दुर्भाग्य हैं कि हम सभी ने अपना कर्तव्य निभाने में कमी रखी .जिनको जो कार्य करना था उन्होंने उन कार्यों को गम्भीरता से नही लिया और कोविड-१९ की जंग से लड़ने की रणनिति  ज़मीनी स्तर पर क्रियान्वयन नही हो पाई जिसका ख़ामियाज़ा आज हम सब देख रहे हैं । *जब जगे तभी सवेरा मंत्र.* को अपनाते हुए अभी भी हम अनुशासन में रहते हुए अपना अपना कर्तव्य निभायें व्यक्तिगत सुरक्षा उपायों को अपनी दिनचर्या का अनिवार्य अंग बना कर स्वयं भी जिये और अन्य लोगों को भी प्रेरित करे ।
कोविड-१९ के हॉटस्पॉट सभी को विदित हैं उन जगह विशेषरूप से नियम क़ानून का पालन कर कोरोना वाइरस क जीतने में सहभागी बने ।

 

 

 

 

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