क्षमता से ज्यादा बन्दी यह पूरे प्रदेश की जेलों की समस्या है

1:59 pm or August 2, 2022
महावीर अग्रवाल
मन्दसौर २ अगस्त ;अभी तक; शहरों के फैलाव से अब ज्यादातर जेल बीच शहर में होती जा रही हैं जिससे जेलों की सुरक्षा का मसला उत्पन्न होता है। जेलों को शहर से सुदूर क्षेत्र में ही होना चाहिए । प्रयास किया जा रहा है की जिन जिलों में जेल बहुत ज्यादा घनी बस्ती में आ गई है उन्हें अन्यत्र दूर शिफ्ट किया जाएगा। मंदसौर जिला जेल पर भी यही विचार चल रहा है। प्रदेश में कोई 6 हजार कैदियों को प्रतिवर्ष पेरोल पर छोड़ा जा रहा है ।
               प्रदेश के डी.जी. जेल अरविंद कुमार ने आज यहां पत्रकारों से चर्चा करते हुए उक्त बात कही और साथ ही यह भी कहा कि उनकी यह पहली पत्रकारवार्ता है।उन्होंने कहा कि वर्तमान में मध्य प्रदेश में 125 जेल हैं। इनमें से 11 केंद्रीय जेल हैं और 52 जिला जेल और शेष अन्य उप जेल हैं।उन्होंने कहा कि क्षमता से अधिक कैदियों का होना आमतौर पर यह पूरे प्रदेश की जेलों का मसला है। प्रदेश में जितने भी जेल हैं उनमें लगभग 29500 कैदियों को रखने की क्षमता है लेकिन वर्तमान में तकरीबन  48500 बंदी विभिन्न जेलों में बंद हैं। मंदसौर जिला जेल में 262 कैदियों को रखने की क्षमता है लेकिन इसके विपरीत यहां 612 कैदी हैं जेल में है । स्थिति बहुत खराब है। कमोबेश रतलाम और खंडवा की जेलों के भी यही हालात हैं।
                  उन्होंने जानकारी देते हुए बताया कि बंदियों की संख्या हर साल 4 से 5% बढ़ रही है , उम्मीद है सरकार बजट का प्रावधान कर इस समस्या का समाधान करेगी। हाउसिंग बोर्ड के माध्यम से बड़े बड़े जेल भवन बनाने की योजना प्रचलित है।
उन्होंने एक प्रश्न के उत्तर में कहा कि कोरोना काल में जिन कैदियों को पैरोल पर  छोड़ा गया था उनमें से सभी वापस जेलों में आ गए हैं। डीजी जेल  अरविंद कुमार ने कहा कि मेरा व्यक्तिगत दृष्टिकोण कैदियों को पैरोल पर ज्यादा से ज्यादा छोड़ने का इसलिए रहता है ताकि वह अपने परिवार से भी जुड़े रहें और जेल में रहकर उनके अंदर परिवार से मिलने की उत्सुकता बनी रहे ।यदि हम कैदियों को पैरोल पर नहीं भेजें ,परिवार  के साथ समय बिताने का अवसर नहीं दें तो उनकी मानसिकता पर विपरीत प्रभाव पड़ता है और उनके अंदर के आपराधिक तत्व को भी हम खत्म नहीं कर सकते परिवार से जुड़े रहने से उनके अंदर का अपराध भाव भी कम होता है और वह जल्द ही समाज की मुख्यधारा से जुड़ना चाहते हैं।यह मेरा व्यक्तिगत अनुभव रहा है । प्रतिवर्ष कोई 6 हजार कैदियों को पेरोल पर छोड़ा जा रहा है ।
                    प्रदेश के डीजी जेल ने खुले मन से इस बात को स्वीकार किया की जेलों के अंदर कई जगहों पर भ्रष्टाचार होता है ।हमने ज्यादा से ज्यादा कर्मचारियों पर कार्यवाही की है ।मालवा की जेलों में फिर भी आंतरिक अनुशासन अच्छा है। इंदौर और छिंदवाड़ा में बड़े जेल भवन का निर्माण चल रहा है किन्तु निर्माण गति धीमी है ।उम्मीद है जल्द ही भवन निर्माण पूरे हो जाएंगे। पूरे प्रदेश में भिंड ही एक  ऐसा जिला है जहां जिला जेल नहीं है।एक प्रश्न के उत्तर में उन्होंने कहा की जेलों में बिना  कोरोना टेस्ट के किसी भी बंदी को अंदर प्रवेश नहीं दिया जाता। मंदसौर क्षेत्र के लिए उन्होंने कहा कि यहां एनडीपीएस के कैदी ज्यादा है । इनमें नशा करने वाले भी है। इसकी वजह मुझसे ज्यादा आप लोग  जानते हैं। उन्होंने बताया कि बीमार कैदियों का उपचार हमारे लिए सबसे बड़ी समस्या होती है। जल्द ही केंद्रीय जेलों में कैंटीन सुविधा शुरू करने की योजना पर थी विचार चल रहा है जहां कैदियों को उनकी आवश्यकता का सामान उपलब्ध हो सकेगा।
                     एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि प्रदेश की जेलों में खूंखार बंदी अपराधियों के अन्य बंदियों को आतंकित करने या मारपीट के मामले कम हैं। पत्रकारों ने उनका ध्यान जेलों की कई व्यवहारिक समस्याओं पर भी दिलाया। जिनके समाधान की बात उन्होंने कही। डीजी जेल से अरविंद कुमार ने टेस्ला कंपनी के एमडी मनीष मारू द्वारा प्रदेश की जेलों में आवश्यकतानुसार एलईडी टीवी सेट भेंट करने का सेवा प्रकल्प प्रस्तुत किया है । उज्जैन संभाग में मंदसौर जिला जेल से शुरू की गई यह सेवा सराहनीय पहल है। समाज का हर क्षेत्र में सहयोग योगदान होता है लेकिन समाज की सेवा में जेल विभाग हमेशा उपेक्षित रहता है लेकिन कैदियों की सुविधा के लिए श्री मारू की कम्पनी की सेवा सराहनीय है।