खुशियों की दास्तां- स्वयं की एफपीओ बनाकर आदिवासी महिलाएं कमा रही हैं मुनाफा

मयंक भार्गव

बैतूल, 09 नवंबर ;अभी तक;  जिले की आदिवासी किसान महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए मध्यप्रदेश डे-राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन द्वारा सतत प्रयास किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में वर्ष 2015 में शाहपुर विकासखंड के भौंरा में महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए चिरायु महिला फसल उत्पादक कंपनी लिमिटेड (एफपीओ) का गठन किया गया। कंपनी का गठन नर्मदा महिला संघ, प्रदान लघु किसान कृषि व्यापार संघ और मप्र डे-राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के संयुक्त तत्वावधान में किया गया। कंपनी की सदस्यता में नर्मदा महिला संघ एवं प्रदान लघु किसान कृषि व्यापार संघ के साथ-साथ मप्र डे-राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़ी महिला किसान सदस्यों को प्राथमिकता दी गई। इस प्रकार क्षेत्र के 25 ग्रामों की लगभग एक हजार महिलाएं कंपनी की सदस्य बनाई गईं।

एनआरएलएम के जिला प्रबंधक श्री सतीश पंवार से प्राप्त जानकारी के अनुसार चिरायु महिला फसल उत्पादक कंपनी लिमिटेड (एफपीओ) का मुख्य काम बैतूल जिले के शाहपुर और घोड़ाडोंगरी ब्लॉक के ग्रामों में आजीविका के मुद्दों पर काम करना और किसानों के रूप में महिलाओं की पहचान बनाना है। महिला किसान इस वास्तविकता से अच्छी तरह वाकिफ  हैं कि इस क्षेत्र के अधिकांश किसानों के पास कम जमीन, अकुशल कृषि प्रौद्योगिकी और बाजार तक कम पहुंच है। किसानों की जरूरतों और आमदनी में वृद्धि के लिए चिरायु कंपनी समय पर खाद और बीज का इनपुट, वित्तीय संस्थानों के साथ क्रेडिट लिंकेज, कृषि संबंधित तकनीकी ज्ञान, फसल निगरानी और रोग प्रबंधन, फसल प्रदर्शनों के माध्यम से नई फसलों को पेश करना एवं फसल उत्पादन को मंडी में बेचने पर कार्य कर रही है, ताकि महिला किसानों की आय में वृद्धि हो सके।

मक्का बीज उत्पादन पर किया काम
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चिरायु कंपनी ने वर्ष 2019 के रबी मौसम में मक्का बीज उत्पादन पर अधिक ध्यान दिया। उस समय बाजार में उच्च गुणवत्ता वाले संकर बीजों की उपलब्धता कम होने के कारण किसानों के पास मक्का बीज के सीमित विकल्प रह गए थे। उस समय मक्का खेती में अच्छी गुणवत्ता का बीज काफी मंहगा मिलता था जिसकी वजह से किसान खराब गुणवत्ता वाले, कम उपज वाले बीजों का उपयोग करते थे, जिससे मिट्टी की सेहत खराब होती थी एवं उत्पादन भी कम मिलता था। चिरायु कंपनी बनाने के बाद कंपनी (एफपीओ) के सीईओ श्री कमलेश कोटेचा और कंपनी की अध्यक्ष सुश्री ललिता चौरे ने समस्त महिलाओं के साथ निर्णय लेकर कंपनी के सदस्यों को कम दाम पर उच्च गुणवत्ता वाले संकर बीजों को प्रदान करना शुरू किया, जिससे मक्का के उत्पादन की लागत को कम करके उसकी उत्पादकता बढ़े।
ऐसे बढ़ाया उत्पादन और कमाया लाभ
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सबसे पहले कंपनी के माध्यम से तीन अनुभवी सदस्य किसानों का चयन तीन एकड़ भूमि पर मक्के के उत्पादन का पायलट प्रोजेक्ट करने के लिए किया गया। जिसका नतीजा अत्यन्त उत्साहवर्धक रहा। कंपनी के सदस्यों द्वारा पिछले वर्ष करीबन दो हजार एकड़ से अधिक भूमि में मक्के का उत्पादन किया गया। चिरायु कंपनी ने एक वर्ष में लगभग 700 टन से अधिक मक्का को मंडी में बेचकर लगभग दो करोड़ रुपये का वार्षिक कारोबार किया है जिससे प्रत्येक शेयरधारक को एक एकड़ भूमि से लगभग 15 हजार रुपये की आय प्राप्त हुई है।
अपने इन्ही प्रयासों के लिए, चिरायु कंपनी (एफपीओ) को एक्सेस डेवलपमेंट सर्विसेज द्वारा ‘एफपीओ ऑफ  द ईयर’ श्रेणी के तहत ‘एफ पीओ इम्पैक्ट अवाड्र्स 2020’ के लिए चुना गया।