खूब महंगे हो गए सोना -चांदी लेकिन मजबूरी करवाती है इसकी खरीदी

      (महावीर अग्रवाल )
मन्दसौर  २६ दिसंबर ;अभी तक;  देश मे महंगाई से कोन परेशान नही है। यह महंगाई है कि इसने सभी को झकझोर कर रख दिया है। ठंड में आग झरती महंगाई के आलम यह है कि हर वस्तु, चीज,सामग्री ,खाद्य पदार्थ हो या विश्व के महंगे सोना,-चांदी सभी को तो यह प्रतिदिन छू रही है। हा परन्तु सभी वस्तुओं के मूल्य तो इस महंगाई के दौर में भी प्रतिदिन भाव मालूम तो रहते है कि आज किस वस्तु का क्या भाव है लेकिन यह विश्व बाजार की करंट करंसी सोना – चांदी है कि अपने भाव हर पल बदलते रहते है।
                      इसके भाव के आलम यह है कि जब जागो तब सवेरा यानी जब भाव जानोगे तब नए रूप के दर्शन होंगे इसके अंतरराष्ट्रीय बाजार भाव और देश के स्थानीय भावों को देखें तो ग्राहक कुछ समझ ही नहीं पाता है कि यह सब क्या खेल है हां यह तो सही है कि इसके भाव तो सराफे के  बड़े कारोबारी ही समझते हैं और कभी-कभी वह भी नहीं समझ पाए तो कोई आश्चर्य नहीं होगा अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने चांदी के भाव और यहां इनके स्थानीय भाव का कभी मिलन होता नहीं है ग्राहक को बाजार में इनके जो भाव बता दिए उसी पर खरीदी और बिक्री हो रही है इनका मोल- भाव कभी कोई नहीं कर पाता है इस महंगाई ने वर्ष 2021 में तो रिकॉर्ड बनाया हो तो कोई आश्चर्य नहीं होगा।
                       देश मे पेट्रोल-डीजल ने तो विश्व में कच्चे तेल के बढ़ते भावों का हवाला देकर तेल कम्पनियों प्रतिदिन खूब बढ़ाए भाव परन्तु वर्ष 2021 की समाप्ति के दिनों में पता नही विश्व में कच्चे तेल के दाम कम होना शुरू भी हुए के नही या स्थिर हो गए। कच्चे तेल के भावों को लेकर पहले खूब ढ़िढोरा पीटा जा रहा था लेकिन विगत लगभग डेढ़ माह से यह गधे के सर से गायब सींगों की कहावत को चरितार्थ कर रहे है। विश्व बाजार में कच्चे तेल के भाव जो भी हो लेकिन देश मे तो पेट्रोल – डीजल के भाव उच्च स्तर पर पहुंचा कर स्थिर बने हुए है। देश की तेल कम्पनियां घाटे से उभर कर पूंजीपति हुई या नही यह तो केंद्र सरकार को बताना चाहिए।जब भारत सरकार यह बताती रही थी कि कच्चे तेल के दाम बढ़ने से देश की तेल कपंनियां घाटे में है । इसलिए कच्चे तेल के बाजार भाव प्रतिदिन समीक्षा कर तय करने का अधिकार केंद्र सरकार ने तेल कंपनियों को दिया। अब कम करने का भी केंद्र सरकार ने निर्देश तेल कंपनियों को दिये या नही , यह जनता को पता ही नही चल रहा है।
                       खेर मूल्यवृद्धि से देश का अधिकांश वर्ग परेशान है लेकिन चंद लोगो के सर पर तो जू तक नही रेगी। वाह सिलसिला तो देश मे अब ऐसा ही चलेगा और दुहाई हर कोई राजनेतिक दल जनता की देकर चुनाव जीत कर कुर्सी पर अकूत संपत्ति के लिए बैठता रहेगा। अब प्रजातंत्र में जनता की स्थिति तो उस कहावत को चरितार्थ करती है जिसमे कहा गया कि खरबूजा छुरी पर गिरे या छुरी खरबूजे पर गिरे। चलो ठीक है कुछ भी प्रमाण रख दो राजनीति दलों के नेताओं पर कोई असर होने वाला नही क्योंकि आखिर वे भी तो लाभार्थी में शामिल है।
                     बात यदि अब मूल्यवान धातुओं सोना और चांदी की देखें तो पता चलता है कि कोई भी माइका लाल इन धातुओं के मूल्य बिना वायदा बाजार की स्क्रीन पर देखें नहीं बता सकता ।वायदा बाजार पर भी इन दोनों मूल्यवान धातुओं के भावों का आलीशान महल है जिसके कमरों की गिनती जो इस व्यापार को कर रहे हैं वहीं कर बता सकते हैं। इन मूल्यवान धातुओं के भाव भी भूल भुलैया की तरह कहे जाए तो कोई नई बात नहीं होगी ।कभी इनके भाव वायदा बाजार की स्क्रीन के भाव से काफी ऊपर होते हैं तो कभी बराबर या कभी तो चांदी के भाव नीचे भी बताएं जाते हैं हर कोई इन धातुओं के भाव आसानी से नहीं बता सकता। देश में यही एकमात्र ऐसा सोने चांदी का व्यापार है जिसके भावों को लेकर हर वक्त एक नया रूप लिए ग्राहक के सामने होते हैं। कभी ज्यादा घटबढ़ वायदा बाजार की स्क्रीन पर होती है तो वह जानकार भी ऊपर फोन कर पता करने के बाद भाव बता पाता है ।सोना चांदी के जादुई भाव को तो प्रत्यक्ष रूप मैं जान सकते हैं।
                           सोना चांदी के भाव का एक नजारा यह देखो इसके भाव भी दो तरह के होते हैं एक वायदा बाजार के स्क्रीन पर और एक सराफा बाजार की भाषा में हाजर के भाव। यह तो मंदसौर के नजारे हैं लेकिन देश के बड़े से बड़े और छोटे से छोटे शहरों तक में इन दोनों भाव में काफी अंतर ही नहीं होता है बल्कि कई बार तो अंतर को कोई समझ ही नहीं सकता। यह केंद्र सरकार की नीति ही जाने ।एक दिन वायदा बाजार पर चांदी के भाव पूछने पर बताया गया कि 60700 रु प्रति किलो स्क्रीन पर जबकि हाजर के भाव पूछने पर बताया कि 61400 रु । अब बताओ ग्राहक कैसे समझेगा की भाव क्या है। सोने के भाव पूछने पर बताया कि स्क्रीन पर 48100 रु प्रति 10 ग्राम जबकि हाजर के भाव 49350 रु । अब बताइए ग्राहक कैसे समझेगा इनके भावों को लेकर। अब ये स्क्रीन के भाव तो वो होते है जो विश्व बाजार में है और वे केवल स्क्रीन के सौदे के है लेकिन यदि आपको माल चाहिए तो वे भाव अलग होते है।
अब सोने -चांदी के स्क्रीन और हाजर का झपट्टा भी जरा इस प्रकार से है समझने के लिए। जिम्मेदार सराफा व्यवसाई ने बताया कि वायदा बाजार से इन धातुओं के भाव बाजार की  लेवाली – देवाली पर निर्भर रहते हैं। वायदा बाजार भाव बढ़ने पर बेचवाल अधिक आएंगे तो व्यापारी उस माल को रखेगा कहां इसलिए वायदा बाजार से हाजर का भाव में अंतर कम हो जाता है फिर वायदा बाजार के भाव बिना जीएसटी के रहते हैं हाजर के भाव में जीएसटी भी जोड़ दिया जाता है जबकि बड़ा कारोबार तो बिना बिल के हो रहा है। वायदा बाजार के भाव नीचे रहने पर व्यापारी का कहना है कि भाव पड़ता नहीं रहता है। एक अन्य व्यापारी का कहना है कि वायदा बाजार पर सोना चांदी के भाव का जिस दिन स्क्रीन पर कटान आता है उस दिन इनके भाव बराबर रहते हैं इसके वायदा और हाजर के भाव में ₹600- 700रु से लेकर 1500 रु से ₹2000 तक का अंतर रहता है। यानी सट्टेबाजी और हजार के भाव अलग रहते हैं ।सट्टेबाजी का काम इस स्क्रीन पर के भाव से होता है। अब देखो विश्व बाजार में सोना चांदी के भाव चाहे जो रहे लेकिन इन मूल्यवान धातुओं के भाव यहां कुछ और ही रहते हैं और उसी पर लोगो के द्वारा खरीदारी व बिक्री हो रही है। अब यहां एक और स्थिति यह देखो विश्व की करंसी मानी जानी वाली सोने का भाव ग्राहक से खरीदी से कुछ नीचे में ही व्यापारी खरीदी करता है। इसलिए यह भी कहा जाता है कि इन मूल्यवान धातुओं की खरीदी हो या बिक्री नुकसान तो ग्राहक का ही होता है। है न अच्छा लाभ का धंधा।